उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं उन्नाव से लगातार तीसरी बार और कुल छह बार के सांसद साक्षी महाराज. उनके एक हालिया बयान ने यूपी की राजनीति में वैचारिक और जातीय विमर्श की नई बहस छेड़ दी है. यूपी Tak को दिए एक इंटरव्यू के दौरान साक्षी महाराज ने लोधी समाज की हिस्सेदारी से लेकर, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपने संबंधों पर बेबाकी से राय रखी है. खबर में आगे तफ्सील से जानिए साक्षी महाराज ने क्या-क्या कहा है?
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साक्षी महाराज ने लोधी समाज के ऐतिहासिक गौरव का स्मरण कराते हुए कहा कि अंग्रेजों से लेकर आधुनिक भारत की राजनीति तक, इस समाज का योगदान अपरिहार्य रहा है. उन्होंने महारानी अवंतीबाई लोधी और अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के बलिदान का जिक्र करते हुए कहा कि लोधी समाज इकलौता ऐसा समाज है जो बिना मांगे भाजपा को वोट देता है.
उन्होंने जोर देकर कहा, "लोधी समाज इकलौता है जो भाजपा का झंडा लेकर चलने वाले किसी भी प्रत्याशी को वोट दे देता है. ऐसे में समाज का सम्मान होना आवश्यक ही नहीं, अपरिहार्य है." उन्होंने सीधे तौर पर स्वीकार किया कि समाज के भीतर यह भावना घर कर रही है कि सत्ता और संगठन में उन्हें वह सम्मानजनक साझेदारी नहीं मिल रही है, जो मिलनी चाहिए.
साक्षी महाराज ने उत्तर प्रदेश के प्रशासन को लेकर जो सवाल उठाए, उसने सरकार के भीतर के अंतर्विरोधों को उजागर कर दिया है. विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की प्रतिमा लगाने को लेकर हुए विवाद पर उन्होंने गहरा दुख व्यक्त किया.
'प्रशासन भाजपा के पुराने नेताओं की नहीं सुन रहा'
साक्षी महाराज ने कहा, "अमाहापुर में जब हम मूर्ति लगाने गए तो प्रशासन पूरी ताकत से विरोध में था. जिन कल्याण सिंह का सम्मान प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह जी करते हैं, जिनकी अर्थी के पीछे योगी जी मीलों पैदल चले, उनकी मूर्ति के लिए हाथ जोड़ना पड़े यह दुर्भाग्यपूर्ण है."
'मोदी कहें तो आज ही छोड़ दूं राजनीति'
अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के सवाल पर साक्षी महाराज ने खुद को एक निष्ठावान कार्यकर्ता बताया. उन्होंने कहा कि उनके जीवन में स्वर्ण काल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद शुरू हुआ.
सन्यासी होने के नाते उन्होंने अपनी विरक्ति जाहिर करते हुए कहा, "मैं पीएम मोदी और अमित शाह का व्यक्ति हूं, जिस दिन वे कहेंगे, उसी दिन कुर्सी छोड़ दूंगा. मुझे कोई लालसा या अभिलाषा नहीं है." उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी ने उन्हें उनकी पात्रता से कहीं ज्यादा दिया है, इसलिए वे स्वयं के लिए कुछ नहीं मांग रहे, बल्कि समाज की आवाज उठा रहे हैं.
शंकराचार्य विवाद पर कही ये बात
प्रयागराज कुंभ के दौरान शंकराचार्य के साथ हुए व्यवहार और प्रशासन की भूमिका पर साक्षी महाराज ने सधी हुई लेकिन स्पष्ट प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि आध्यात्म की दृष्टि से वे शंकराचार्य से सीनियर हैं और व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन का काम है. उन्होंने संतों को नसीहत देते हुए कहा कि संतों का क्रोध पानी की लकीर की तरह होना चाहिए, न कि उसे एजेंडा बना लेना चाहिए.
वहीं, सवर्ण समाज के साथ अपने संबंधों पर उन्होंने कहा कि वे कभी जातिवादी नहीं रहे. उन्होंने याद दिलाया कि वे मथुरा और फर्रुखाबाद जैसे क्षेत्रों से चुनाव जीते हैं, जहाँ लोधी समाज की संख्या कम थी, फिर भी उन्हें ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों का भरपूर समर्थन मिला.
मुलायम सिंह यादव से संबंध पर क्या कहा?
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ अपने रिश्तों पर साक्षी महाराज ने एक दिलचस्प खुलासा किया. उन्होंने कहा कि विचारधारा के स्तर पर वे धुर विरोधी थे, लेकिन व्यक्तिगत संबंध हमेशा मधुर रहे. उन्होंने कहा, "मुलायम सिंह जी को मुझसे ज्यादा गालियां किसी ने नहीं दीं, लेकिन संकट काल में उन्होंने मेरा साथ दिया."
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर साक्षी महाराज पूरी तरह आश्वस्त नजर आए. उन्होंने दावा किया कि विपक्ष हिंदू विरोधी बयान देकर अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मार रहा है और भाजपा भारी बहुमत से फिर सरकार बनाएगी. जब उनसे मुख्यमंत्री के चेहरे के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है और राष्ट्रीय नेतृत्व जिसे तय करेगा, कार्यकर्ता उसे ही स्वीकार करेंगे.
यहां देखें पूरा इंटरव्यू
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