क्या है अंतरराष्ट्रीय जाट संसद, कौन है इसके पीछे... इसमें संजीव बालियान ने कही ऐसी बात जिसकी अब खूब चर्चा

मेरठ में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा से जाट शब्द हटाने पर भारी विवाद. संजीव बालियान ने प्रशासन पर साधा निशाना. जानें क्या है अंतरराष्ट्रीय जाट संसद और राम अवतार पलसियाना का अल्टीमेटम.

Sanjeev Baliyan

रजत सिंह

• 09:10 PM • 30 Mar 2026

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मेरठ के सुकौती में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है. जाट शब्द को लेकर प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के बीच ठन गई है. आरोप है कि प्रतिमा के नीचे पट्टिका पर लिखे अंतरराष्ट्रीय जाट संसद शब्द में से प्रशासन ने जाट शब्द को हटा दिया है जिससे जाट समुदाय में भारी रोष है. भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान के तल्ख तेवरों ने इस विवाद को राजनीतिक रूप दे दिया है. 

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क्या है पूरा विवाद?

हालिया मेरठ के सुकौती में जाटों के नायक महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम था. इस कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, राजस्थान के सांसद हनुमान बेनीवाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान जैसे दिग्गज शामिल हुए. विवाद तब शुरू हुआ जब अनावरण स्थल और पास ही स्थित महाराजा जवाहर सिंह क्रीड़ा स्थल के गेट से जाट शब्द हटा दिया गया. अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के संस्थापक राम अवतार पलसियाना का आरोप है कि जब सभा चल रही थी तभी पुलिस प्रशासन ने गुपचुप तरीके से जाट शब्द वहां से हटा दिया.

संजीव बालियान के तल्ख तेवर- अपमान सहा है, झुके नहीं

इस घटना पर बीजेपी नेता संजीव बालियान ने मंच से अपना गुस्सा जाहिर किया. उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, "मैं पूरी रात अपमान सहता रहा, बदतमीजियां देखीं. हम इसलिए झुके क्योंकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को आना था और हम नहीं चाहते थे कि उनके आने में कोई बाधा आए. लेकिन किसी की औकात नहीं जो हमें झुका दे." 

कौन हैं राम अवतार पलसियाना और क्या है जाट संसद?

राजस्थान के जयपुर निवासी राम अवतार पलसियाना ने 2010 में अंतरराष्ट्रीय जाट संसद की स्थापना की थी. क्षत्रिय महासभा और करणी सेना की तर्ज पर यह संगठन जाट समुदाय को एकजुट करने और उनके नायकों की पहचान स्थापित करने का काम करता है. राम अवतार का कहना है कि उनका संगठन किसी राजनीतिक दल का पिछलग्गू नहीं है, बल्कि जहां जाटों के साथ अन्याय होता है, वहां वे मजबूती से खड़े होते हैं. 

प्रशासन को 15 दिन की मोहलत

विवाद बढ़ने के बाद राम अवतार पलसियाना ने बताया कि पुलिस ने उनसे 15 दिन का समय मांगा है ताकि कानूनी तौर पर यह देखा जा सके कि वहां 'जाट' शब्द कैसे लिखा जा सकता है. संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों में सम्मान बहाल नहीं हुआ, तो वे घर-घर जाकर इस अपमान की कहानी बताएंगे.

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