पापा विधायक हैं हमारे... कौन हैं भाजपा MLA राजेंद्र पटेल जिनके बेटे ने नैनीताल SDM से कही ये बात

BJP MLA Son Hooter Controversy: यूपी के फतेहपुर से भाजपा विधायक राजेंद्र पटेल के बेटे राहुल पटेल को नैनीताल में हूटर बजाकर वीआईपी धौंस दिखाना भारी पड़ गया. एसडीएम ने विधायक पुत्र की एक न सुनते हुए गाड़ी सीज कर दी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.

BJP MLA Son Hooter Controversy

रजत सिंह

03 Apr 2026 (अपडेटेड: 03 Apr 2026, 07:51 PM)

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BJP MLA Son Hooter Controversy: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की बिंदकी सीट से भाजपा विधायक राजेंद्र पटेल के बेटे राहुल पटेल इन दिनों चर्चा में हैं. दरअसल, राहुल अपने परिवार के साथ नैनीताल घूमने गए थे. यहां माल रोड पर हूटर बजाकर वीआईपी धौंस दिखाना उन्हें महंगा पड़ गया. मौके पर मौजूद एसडीएम ने न सिर्फ गाड़ी रोकी, बल्कि विधायक के बेटे राहुल पटेल की एक न सुनते हुए गाड़ी सीज कर दी.

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'पापा विधायक हैं हमारे'

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि होहल्ले के बीच चश्मा लगाए एसडीएम के सामने राहुल पटेल यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके पिता विधायक हैं. लेकिन एसडीएम ने उनकी एक न सुनी और गाड़ी को सीधे कोतवाली भेज दिया. काफी भागदौड़ और तहसील के चक्कर लगाने के बाद कहीं जाकर गाड़ी छूट पाई. कांग्रेस समेत तमाम सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को शेयर कर भाजपा के वीआईपी कल्चर पर निशाना साध रहे हैं.

कौन हैं विधायक राजेंद्र पटेल?

राजेंद्र पटेल सियासत के पुराने खिलाड़ी हैं. उनका राजनीतिक सफर तब शुरू हुआ था जब देश में जनता पार्टी का दौर था. वह कांशीराम और मायावती के नेतृत्व वाली बसपा में शामिल हुए और 1996 में पहली बार बिंदकी से विधायक बने. महज दो साल बाद ही राजेंद्र पटेल ने बसपा को ऐसा जख्म दिया जिसे पार्टी आज तक नहीं भूल पाई. उन्होंने रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) और अन्य बागी विधायकों के साथ मिलकर बसपा तोड़ी और जन लोकतांत्रिक बहुजन समाज पार्टी बनाई, जिससे मायावती की सरकार गिर गई. इसका इनाम उन्हें कल्याण सिंह की सरकार में मिला. वह पहले ग्रामीण इंजीनियरिंग सेवा मंत्री और फिर ग्रामीण विकास मंत्री बने.

कब हुई राजेंद्र पटेल की भाजपा में एंट्री?

2002 में बसपा से टिकट न मिलने पर वह बागी हो गए और निर्दलीय चुनाव लड़े. बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें बिंदकी से उतारा. राजेंद्र पटेल ने न केवल यह सीट जीती, बल्कि समाजवादी पार्टी की तरफ से लड़ रहे 2017 के पूर्व भाजपा विधायक को करारी शिकस्त दी. बिंदकी जैसी सीट, जिसे भाजपा कभी जीत नहीं पाती थी, उसे जिताने का श्रेय राजेंद्र पटेल को जाता है.

इंजीनियर बेटे संभालते हैं पिता का काम

राजेंद्र पटेल के दो बेटे हैं राहुल और रोहित. रोहित पेशे से इंजीनियर हैं, जबकि नैनीताल विवाद में फंसे राहुल पटेल भी टीसीएस (TCS) जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर रह चुके हैं. वर्तमान में राहुल अपने पिता के चुनाव जीतने के बाद से उनका सारा राजनीतिक कामकाज और प्रबंधन देख रहे हैं.