UP Kiska: बाहुबली उदयभान करवरिया के इलाके में किसकी जमेगी धाक? जानिए क्या कहते हैं बारा के सियासी समीकरण

UP Kiska: प्रयागराज के बारा विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है. विधायक वाचस्पति के विकास दावों और बाहुबली उदयभान करवरिया के प्रभाव के बीच सपा-भाजपा की कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. ब्राह्मण और कुर्मी बहुल इस सीट के जातिगत समीकरण और स्थानीय मुद्दों पर आधारित यूपी तक की विशेष रिपोर्ट.

Bara Vidhan Sabha 2027

रजत सिंह

03 Apr 2026 (अपडेटेड: 03 Apr 2026, 05:27 PM)

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Bara Vidhan Sabha 2027: प्रयागराज की बारा विधानसभा सीट हमेशा से चर्चा में रही है. कभी यहां बहुगुणा परिवार का डंका बजता था तो कभी करवरिया परिवार का वर्चस्व रहा. वर्तमान में यह सीट सुरक्षित श्रेणी में है और यहां से अपना दल (एस) और भाजपा गठबंधन के वाचस्पति विधायक हैं. लेकिन 2027 की चुनावी आहट ने यहाँ के समीकरणों को फिर से गरमा दिया है.

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विकास का दावा बनाम 'पैराशूट' प्रत्याशी का मुद्दा

वर्तमान विधायक वाचस्पति जो कभी बसपा और सिराथू की राजनीति करते थे. 2022 में अपना दल के टिकट पर यहां से जीते. उन्होंने अपनी उपलब्धियों की एक पूरी बुकलेट छपवाई है और दावा किया है कि विधानसभा का कोई भी गांव ऐसा नहीं है जहां उन्होंने सड़कें न बनवाई हों. दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर उन्हें 'पैराशूट प्रत्याशी' (बाहरी) बताकर विरोध के सुर भी उठ रहे हैं. समाजवादी पार्टी ने भी यहां अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और पिछली हार का बदला लेने के लिए जमीन पर पसीना बहा रही है.

जातिगत समीकरण और 2027 की चुनौतियां

बारा सीट पर जीत-हार का फैसला यहां के उलझे हुए जातिगत समीकरण करते हैं. भले ही यह सुरक्षित सीट है. लेकिन सवर्णों और पिछड़ों का वोट यहाँ निर्णायक भूमिका निभाता है. यहां सबसे ज्यादा संख्या ब्राह्मणों (करीब 60,000) की है. इसके बाद कुर्मी (50,000), आदिवासी (40,000), कोयरी (25,000), पासी (25,000) और बिंद-निषाद (25,000) मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद है. समाजवादी पार्टी का अपना एक मजबूत वोट बैंक है. लेकिन पत्रकारों का मानना है कि केवल दलित वोटों के भरोसे यहां जीतना मुश्किल है. सपा को सवर्णों या अति पिछड़ों में सेंध लगानी होगी.

भाजपा और गठबंधन की राह

भाजपा यहां सत्ता की लहर और अपना दल के 'कुर्मी' वोट बैंक के सहारे है. हालांकि स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि 2027 में राह उतनी आसान नहीं होगी. बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों के साथ-साथ 'स्थानीय बनाम बाहरी' का मुद्दा भी जोर पकड़ रहा है.

उदयभान करवरिया का प्रभाव

बाहुबली उदयभान करवरिया, जो सपा विधायक जवाहर पंडित हत्याकांड में सजा काटकर बाहर आ चुके हैं. उनका प्रभाव आज भी इस क्षेत्र में माना जाता है. उनके परिवार की सक्रियता और सजा माफी के बाद का माहौल भी 2027 के नतीजों पर असर डाल सकता है. फिलहाल, बारा की जनता मौन है. लेकिन राजनीतिक दल अपनी गोटियां सेट करने में जुटे हैं. क्या वाचस्पति अपना किला बचा पाएंगे या सपा इस बार यहां 'साइकिल' दौड़ाने में सफल होगी? यह तो वक्त ही बताएगा.