2027 से पहले सपा-कांग्रेस में बढ़ी तकरार, सांसद रामशंकर राजभर ने इमरान मसूद की ओवैसी और हुमायूं कबीर से कर डाली तुलना

यूपी तक

• 04:06 PM • 14 Jul 2026

2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयानों पर अब सपा सांसद रामशंकर राजभर ने पलटवार करते हुए उनकी तुलना असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर से की है.

SP Congress Political Clash

SP Congress Political Clash (Photo Enhanced by AI)

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SP Congress Political Clash: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ ही विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक समीकरण भी बदलते नजर आ रहे हैं. साल 2024 लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच अब बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के लगातार सपा और उसकी राजनीति पर सवाल उठाने के बाद अब समाजवादी पार्टी ने भी खुलकर जवाब देना शुरू कर दिया है. सपा सांसद रामशंकर राजभर ने इमरान मसूद की तुलना एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और पश्चिम बंगाल के नेता हुमायूं कबीर से करते हुए उन पर भाजपा को फायदा पहुंचाने वाले बयान देने का आरोप लगाया है.

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2024 की साझेदारी के बाद बदलने लगे सियासी रिश्ते

लोकसभा चुनाव 2024 में सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन कर चुनाव लड़ा था और विपक्ष को इसका फायदा भी मिला. हालांकि विधानसभा चुनाव 2027 से पहले दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी बढ़ती दिखाई दे रही है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार समाजवादी पार्टी की राजनीति, खासकर उसके मुस्लिम नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं. इसे देखते हुए सपा ने भी अब सार्वजनिक तौर पर जवाब देना शुरू कर दिया है.

इमरान मसूद ने सपा को लेकर क्या कहा

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हाल के दिनों में कई बयान दिए हैं. उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी को यह नहीं भूलना चाहिए कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन और मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन ने उसकी जीत में बड़ी भूमिका निभाई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी किसी ऐसे मुस्लिम नेता को पसंद नहीं करती, जो अपनी बात रखता हो. मसूद ने कहा कि उनकी जीत राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व की वजह से हुई.

सपा सांसद रामशंकर राजभर ने दिया जवाब

इमरान मसूद के बयानों के बाद समाजवादी पार्टी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. सपा सांसद रामशंकर राजभर ने कहा कि इमरान मसूद 2009 से लगातार चुनाव हारते रहे और 2024 में समाजवादी पार्टी के समर्थन से सांसद बन पाए. ऐसे में अब उनका यह कहना कि वे सपा के बिना भी जीत सकते हैं, वास्तविकता से दूर है. वहीं, सहारनपुर के पूर्व सांसद और सपा नेता हाजी फजलुर्रहमान ने भी आरोप लगाया कि इमरान मसूद के बयान गठबंधन में दरार पैदा करने वाले हैं और इससे भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल सकता है.

ओवैसी और हुमायूं कबीर से की तुलना

रामशंकर राजभर ने इमरान मसूद की तुलना असदुद्दीन ओवैसी और पश्चिम बंगाल के नेता हुमायूं कबीर से करते हुए कहा कि उनके बयान अब उसी तरह की राजनीति की याद दिलाते हैं. राजभर का कहना है कि जिस तरह ओवैसी और हुमायूं कबीर लगातार एक वर्ग विशेष के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं, उसी तरह इमरान मसूद भी केवल उसी दिशा में बयान दे रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से ऐसे बयानों पर संज्ञान लेने और गठबंधन धर्म निभाने की अपील भी की.
सपा सांसद ने आरोप लगाया कि भाजपा उत्तर प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की राजनीति करना चाहती है और इमरान मसूद के बयान उसी माहौल को मजबूत करने का काम कर रहे हैं. राजभर ने कहा कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों के समर्थन के कारण 'मुल्ला मुलायम' जैसे राजनीतिक तंज भी सहे, लेकिन पार्टी हमेशा व्यापक सामाजिक आधार बनाने की कोशिश करती रही है. उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ही गठबंधन की बड़ी पार्टी है.

पीडीए रणनीति पर असर की चिंता

समाजवादी पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि इमरान मसूद के बयान पार्टी की 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को नुकसान पहुंचा सकते हैं. रामशंकर राजभर जैसे नेताओं का मानना है कि सपा ने 2024 में केवल मुस्लिम मतों के आधार पर नहीं, बल्कि गैर-यादव पिछड़ों, दलितों और अन्य वर्गों के समर्थन से बेहतर प्रदर्शन किया था. ऐसे में यदि चुनावी जीत का पूरा श्रेय केवल एक वर्ग को दिया जाएगा तो इससे पार्टी के व्यापक सामाजिक समीकरण पर असर पड़ सकता है.

सपा का राजनीतिक संदेश क्या है

राजभर ने कहा कि इमरान मसूद के हालिया बयानों से यह संदेश जा रहा है कि पिछड़े और दलित समाज के योगदान को कम करके आंका जा रहा है. उनका कहना है कि इसी वजह से पार्टी ने इमरान मसूद को ओवैसी और हुमायूं कबीर जैसी राजनीति से जोड़ते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि इस तरह की बयानबाजी भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को मजबूती दे सकती है.

कांग्रेस और सपा के रिश्तों पर बढ़ी चर्चा

लगातार हो रही बयानबाजी के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के भविष्य के रिश्तों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. दोनों दलों ने 2024 में साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन अब सार्वजनिक मंचों से एक-दूसरे पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकजुटता किस दिशा में जाएगी.

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अगले कदम पर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रामशंकर राजभर का इमरान मसूद पर हमला केवल व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है. विश्लेषकों के अनुसार इसके जरिए कांग्रेस को यह संदेश देने की कोशिश हो सकती है कि गठबंधन की राजनीति में ऐसे बयान स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जो पार्टी की पीडीए रणनीति या व्यापक सामाजिक आधार को प्रभावित करें. आने वाले समय में दोनों दलों के नेताओं के रुख पर सबकी नजर रहेगी.