Brajbhushan Rajput Statement: इटावा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान महोबा जिले की चरखारी विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक ब्रजभूषण राजपूत के बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना अपनी ही सरकार के एक मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जब उन्होंने गरीबों और किसानों के हक की आवाज उठाई तो कुछ लोगों के 'पेट में दर्द' होने लगा. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अभी 'तलवार उठाई नहीं है' और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने के लिए तैयार हैं.
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प्रतिभा सम्मान समारोह में दिया बयान
ब्रजभूषण राजपूत इटावा में आयोजित 'मिशन अवंती: वीरांगना अवंती बाई लोधी प्रतिभा सम्मान समारोह' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे. कार्यक्रम में लोधी राजपूत समाज को संबोधित करते हुए उन्होंने कई ऐसे बयान दिए, जिन्हें राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है.
'मंत्री से भिड़ा तो कई लोगों को होने लगी परेशानी'
अपने संबोधन में विधायक ने कहा कि उनके पास बड़ी संख्या में गरीब और किसान अपनी समस्याएं लेकर आते हैं. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों से सीधे बात कर लोगों की समस्याओं का समाधान कराने का प्रयास किया और जरूरत पड़ने पर अपनी ही पार्टी के एक मंत्री से भी टकरा गए, तो कई लोगों को यह बात पसंद नहीं आई.
उन्होंने कहा, "गरीबों और किसानों की लड़ाई में जब मैं अपनी ही पार्टी के मंत्री से लड़ने लगा तो बहुत से लोगों के पेट में दर्द होने लगा. कुछ लोग मेरा राजनीतिक करियर खत्म करने की बातें करने लगे."
विरोधियों को दी चेतावनी
अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए ब्रजभूषण राजपूत ने कहा, "अरे नादानो, नदी के किनारे बैठकर समुद्र को नापना छोड़ दो. अभी तो हम अपनी मर्यादाओं में रहकर जनता, किसानों और नौजवानों को न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं."
'अभी तलवार उठाई नहीं है'
अपने भाषण में उन्होंने आगे कहा, "अभी तो हमने तलवार उठाई नहीं है और तलवार उठाने का इतिहास हमारा पुराना है. लेकिन अब लोकतांत्रिक व्यवस्था है और हम लोकतांत्रिक तरीके से लड़ने के लिए तैयार हैं."
युवाओं से किया साथ देने का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान विधायक ने समाज के युवाओं से भी एकजुट होने की अपील की. उन्होंने कहा कि अगर लोधी समाज के युवा कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े होंगे तो उत्तर प्रदेश में समाज को नई पहचान और मजबूत स्थान दिलाने का काम किया जाएगा. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं.
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