अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब इस पर जारी राजनीतिक घमासान में शब्दों की मर्यादा भी तार-तार होने लगी है. इस मुद्दे पर जहां समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव लगातार हमलावर हैं. वहीं पलटवार करने उतरी भाजपा के एक राज्य मंत्री के बिगड़े बोल सामने आए हैं. उत्तर प्रदेश सरकार में स्टांप शुल्क और पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने अखिलेश यादव को लेकर एक अमर्यादित शब्द का इस्तेमाल कर डाला. इस बयान के बाद यूपी की सियासत गरमा गई है और समाजवादी पार्टी ने मंत्री को तुरंत बर्खास्त करने की मांग करते हुए भाजपा को गालीबाजों का गिरोह करार दिया है.
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आपा खो बैठे मंत्री रविंद्र जायसवाल
बुधवार को यूपी सरकार के राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल एक सरकारी कार्यक्रम में शिरकत करने चंदौली पहुंचे थे. वहां मीडिया से बात करते हुए जब उनसे राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर सवाल पूछा गया तो वे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर भड़क उठे. उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, 'जब मैं विधायक था और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे तब वह विधानसभा में प्रस्ताव लाए थे कि मुस्लिमों के कब्रिस्तानों को सुरक्षित करने के लिए बाउंड्री वॉल कराई जाएगी. मैंने तब मांग की थी कि हिंदुओं के श्मशानों के लिए भी फंड दिया जाए. लेकिन उन्होंने मना कर दिया था. इन्हें सिर्फ कब्रिस्तान वाले ही प्रिय हैं.'
इसी दौरान शब्दों की मर्यादा भूलते हुए मंत्री जायसवाल ने आगे कहा 'यह राम के नाम पर राम के आस्थावानों की भावनाओं को कुरेदने का काम कर रहे हैं. इससे 100 करोड़ हिंदुओं को घाव लगा है. लेकिन यह ससुरा कुरेद-कुरेद कर सिर्फ लुंगी और जालीदार टोपी पहनने वालों के वोट बैंक के लिए काम कर रहा है.'
सपा का तीखा पलटवार
अखिलेश यादव के खिलाफ सत्ताधारी दल के मंत्री द्वारा इस तरह की भाषा के इस्तेमाल पर सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज सिंह काका ने एक वीडियो बयान जारी कर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि देश के इतने बड़े नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह की अभद्र भाषा और गाली का प्रयोग करना बेहद शर्मनाक है.
मनोज सिंह काका ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरते हुए कहा 'यह बयान भारतीय जनता पार्टी के गिरते विमर्श और उनकी दूषित नैतिक सोच का जीता-जागता प्रमाण है. भाजपा अब पूरी तरह से गालीबाजों का गिरोह बन चुकी है. अगर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री में थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो उन्हें इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए. देश से माफी मांगनी चाहिए और ऐसे बदजुबान मंत्री रविंद्र जायसवाल को तत्काल प्रभाव से सरकार से बर्खास्त करना चाहिए.'
राम मंदिर के चढ़ावे से शुरू हुआ यह विवाद अब पूरी तरह से व्यक्तिगत कीचड़ उछालने और राजनीतिक रूप से ध्रुवीकरण वाले बयानों में तब्दील होता नजर आ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ने के आसार हैं.
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