लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति का रुख बदल दिया है. खासकर कुर्मी वोट बैंक को लेकर सियासी दलों में जबरदस्त रस्साकसी छिड़ गई है. चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) गठबंधन के 7 कुर्मी सांसदों की जीत और बीजेपी गठबंधन की सहयोगी अनुप्रिया पटेल के घटते मार्जिन ने इस लड़ाई को और दिलचस्प बना दिया है. इसी बीच एनडीए के सहयोगी ओम प्रकाश राजभर ने डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती के बहाने अखिलेश यादव पर हमला बोला है. वहीं दूसरी ओर कभी सपा से बगावत करने वाली पल्लवी पटेल के बदले सुर यूपी की राजनीति में एक नए समीकरण का इशारा कर रहे हैं.
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राजभर का हमला
सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर इन दिनों कुर्मी समाज के बड़े नेता रहे स्वर्गीय डॉ. सोनेलाल पटेल की विरासत को लेकर अखिलेश यादव पर हमलावर हैं. राजभर ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा 'गुड मॉर्निंग अखिलेश यादव जी. एक गलती छुपाने के लिए दूसरी गलती मत कीजिए मेरे मित्र. जब मैंने डॉक्टर सोनेलाल जी को याद न करने का मुद्दा उठाया तो आप दबाव में आकर सम्मान का दिखावा करने लगे.'
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख ने कुर्मी समाज को गुमराह करने के लिए 2 जुलाई 2023 की एक पुरानी खबर की तारीख बदलकर उसे अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स में वायरल कराया ताकि ऐसा लगे कि उन्होंने इस बार भी जयंती मनाई थी. राजभर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राजनीति अब एसी कमरों और व्हाट्सएप की नहीं रही और वे कुर्मी भाइयों के साथ ठगी नहीं होने देंगे.
अखिलेश यादव का पलटवार
राजभर के इन हमलों पर अखिलेश यादव ने भी करारा जवाब दिया. उन्होंने राजभर का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोगों की बारगेनिंग पावर अब जीरो हो चुकी है. अखिलेश ने कहा 'बीजेपी बेहद चालबाज और होशियार पार्टी है. वह अच्छी तरह जानती है कि किस नेता से क्या बुलवाना है और किसे क्या लिखकर भिजवाना है.'
2024 के चुनाव ने बदली कुर्मी सियासत की दिशा
दरअसल इस पूरी लड़ाई के पीछे 2024 के चुनावी आंकड़े हैं.
सपा+इंडिया गठबंधन: इन्होंने 10 कुर्मी उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से 7 ने शानदार जीत दर्ज की.
बीजेपी+एनडीए: बीजेपी से पंकज चौधरी जीते जबकि अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से बेहद कम मार्जिन से जीत पाईं और सोनभद्र में उनके सहयोगी हार गए.
यही वजह है कि पूर्वांचल से लेकर अवध और बुंदेलखंड तक फैले इस मजबूत वोट बैंक पर अब दोनों खेमों की नजर है. एक तरफ जहां बीजेपी के पास पंकज चौधरी, विनय कटियार, स्वतंत्र देव सिंह और संतोष गंगवार (पूर्व सांसद) जैसे चेहरे हैं, वहीं सपा के पास लालजी वर्मा और रामप्रसाद चौधरी जैसे दिग्गज कुर्मी नेता मौजूद हैं.
पल्लवी पटेल की घर वापसी के संकेत?
इस पूरी सियासी तस्वीर में पल्लवी पटेल का रुख सबसे दिलचस्प मोड़ ले रहा है. 2024 का चुनाव ओवैसी के साथ पीडीएम गठबंधन बनाकर लड़ने वाली पल्लवी पटेल आजकल सपा और कांग्रेस के प्रति नरम दिख रही हैं. एक हालिया पॉडकास्ट में उन्होंने राहुल गांधी को 10 में से 9 और अखिलेश यादव को 8 नंबर दिए. जबकि बीजेपी को कोई क्रेडिट नहीं दिया.
इतना ही नहीं 1 जुलाई को अखिलेश यादव के जन्मदिन पर पल्लवी ने उनके साथ अपनी तस्वीर शेयर कर बधाई भी दी थी. हालांकि, राज्यसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशी को लेकर हुई तल्खी के कारण अभी बात पूरी तरह नहीं बनी है. लेकिन माना जा रहा है कि पल्लवी का झुकाव एक बार फिर सपा गठबंधन की तरफ हो रहा है.
प्रतापगढ़ से लेकर पूरे यूपी में घेराबंदी
इस वोट बैंक की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस प्रतापगढ़ में खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने डॉ. सोनेलाल पटेल का नाम लिया, उसी सीट पर इस बार समाजवादी पार्टी के एसपी सिंह पटेल ने जीत दर्ज की है. साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में कुर्मी मतों को अपने पाले में खींचने के लिए शह-मात का यह खेल अभी और आक्रामक होने वाला है.
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