अब्बास अंसारी ने धर्मेंद्र यादव को लगाया गले, क्या मऊ में सपा करने वाली है बड़ा खेल?

रजत सिंह

• 12:36 PM • 07 Jul 2026

Abbas Ansari hug Dharmendra Yadav: मऊ में धर्मेंद्र यादव और अब्बास अंसारी की मुलाकात से 2027 विधानसभा चुनाव की सियासत गरमा गई है. क्या अब्बास सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे? जानिए बीजेपी की रणनीति, मऊ का जातीय गणित और बदलते राजनीतिक समीकरणों का पूरा विश्लेषण.

Abbas Ansari hug Dharmendra Yadav

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Abbas Ansari hug Dharmendra Yadav: पूर्वांचल की राजनीति में इन दिनों एक तस्वीर और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त सुर्खियां बटोर रहा है. यह वीडियो किसी और का नहीं बल्कि आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी के सांसद और अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव और मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी का है. मऊ के मधुबन में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद जब दोनों नेता एक-दूसरे के गले मिले तो पूर्वांचल के सियासी गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया. सिर पर लाल टोपी और कंधे पर लाल गमछा डाले अब्बास अंसारी का यह अंदाज साफ इशारा कर रहा है कि वे अब सुभासपा का दामन छोड़ पूरी तरह सपा के रंग में रंग चुके हैं. इस गर्माई सियासत के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या साल 2027 के विधानसभा चुनाव में अब्बास अंसारी मऊ सदर सीट से सीधे समाजवादी पार्टी के सिंबल पर मैदान में उतरेंगे?

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सपा से टिकट के सवाल पर बोले अब्बास

यह पूरा वाकया मऊ के मधुबन में आयोजित ब्रिगेडियर उस्मान के एक कार्यक्रम का है जहां अंसारी परिवार के साथ बतौर मुख्य अतिथि सपा सांसद धर्मेंद्र यादव पहुंचे थे. कार्यक्रम के बाद जब धर्मेंद्र यादव विदा होने लगे तो अब्बास अंसारी ने उन्हें गर्मजोशी से गले लगाया. जब मौके पर मौजूद पत्रकारों ने अब्बास अंसारी से सीधा सवाल किया कि 'क्या वे आगामी चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ने जा रहे हैं?' तो अब्बास ने मुस्कुराते हुए कहा 'यह तो जनता बताएगी यार. मेरा काम सिर्फ खिदमत-ए-खल्क (जनता की सेवा) करना है और इसके लिए मुझे किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. हमारा और मऊ की आवाम का ताने-बाने का रिश्ता है जिसे कोई जुदा नहीं कर सकता. बाकी सब अल्लाह पर छोड़ दो, जब नतीजा आएगा तो हमेशा की तरह बोलने वालों के मुंह अपने आप बंद हो जाएंगे.'

मुख्तार गरीबों के लिए देवता थे, अब्बास ही जीतेगा- अफजाल अंसारी

इस सियासी सुगबुगाहट के बीच अंसारी परिवार के मुखिया और गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी ने भी डंके की चोट पर अब्बास की दावेदारी को हवा दे दी है. उन्होंने मुख्तार अंसारी की मौत का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा 'मऊ की महान जनता के आशीर्वाद से मुख्तार अंसारी लगातार पांच बार चुनाव जीते. इस जालिम हुकूमत ने उन्हें 18 साल जेल में रखकर यातनाएं दीं और जहर देकर शहीद कर दिया. लेकिन गरीबों के दिलों से उनका नाम कोई नहीं मिटा सकता. अब्बास अंसारी के रगों में भी उसी मुख्तार अंसारी और देश के लिए कुर्बानी देने वाले ब्रिगेडियर उस्मान का खून है. वह जुल्म के सामने झुका नहीं है. अब्बास एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट शूटर और वर्ल्ड कप में भारत की टीम का कैप्टन रहा है. अगर समाजवादी पार्टी उसे उम्मीदवार बनाती है, तो मऊ की जनता उसे रिकॉर्ड मतों से जिताएगी.'

सिंबल देने पर क्या घेरेगी बीजेपी?

अब्बास अंसारी ने साल 2022 का चुनाव ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा के टिकट पर लड़ा था. क्योंकि उस समय सपा और सुभासपा का गठबंधन था. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, साल 2017 से पहले अखिलेश यादव ने अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे चेहरों से दूरी बनाने की नीति अपनाई थी, यही वजह थी कि 2022 में सीधे सपा का सिंबल न देकर गठबंधन के तहत अब्बास को टिकट दिलवाया गया था.

लेकिन इस बार स्थितियां बदल चुकी हैं. सपा के गठबंधन में अब न तो सुभासपा है और न ही निषाद पार्टी. ऐसे में यदि सपा सीधे अपने सिंबल पर अब्बास अंसारी को मऊ सदर से उतारती है तो बीजेपी इसे पूरे पूर्वांचल में माफिया और गुंडागर्दी के मुद्दे पर बड़ा चुनावी हथियार बना सकती है.

बीजेपी का मास्टर प्लान और मऊ का जातीय गणित

भाजपा इस बार अंसारी परिवार के इस अभेद्य गढ़ को भेदने की पूरी तैयारी में है. चर्चा है कि मऊ सदर सीट से बीजेपी इस बार उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता और मौजूदा ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा को मैदान में उतार सकती है जो खुद मऊ के रहने वाले हैं और भूमिहार समुदाय से आते हैं. बीजेपी का प्लान मऊ सदर और मोहम्मदाबाद जैसी सीटों पर अंसारियों के वर्चस्व को पूरी तरह खत्म करने का है.

हालांकि मऊ सदर का जातीय समीकरण अंसारी परिवार के पक्ष में झुका हुआ नजर आता है. यहां मुस्लिम और अंसारी मतदाताओं का एकतरफा वोट बैंक है. खुद ओम प्रकाश राजभर (जो फिलहाल बीजेपी खेमे में हैं) एक बार स्वीकार कर चुके हैं कि मऊ में अंसारी परिवार का अपना मजबूत व्यक्तिगत वोट बैंक है जिसे हिला पाना किसी भी दल के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण काम है.

फिलहाल धर्मेंद्र यादव और अब्बास अंसारी के इस गले मिलने वाली तस्वीर ने मऊ की चुनावी बिसात पर पहली चाल चल दी है. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या अखिलेश यादव बीजेपी के 'माफिया कार्ड' के हमले को झेलते हुए अब्बास अंसारी को साइकिल का सिंबल सौंपते हैं या फिर पूर्वांचल की इस हॉट सीट पर कोई नया सियासी समीकरण जन्म लेता है.