OP Rajbhar on Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानों के तीर और सोशल मीडिया पर सियासी जंग कोई नई बात नहीं है. लेकिन सुभासपा (SBSP) चीफ ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक ऐसा X पोस्ट किया है जिसने सियासी गलियारों में एक नई चर्चा शुरू कर दी है. राजभर ने बेहद सधे हुए लेकिन तीखे राजनीतिक अंदाज में अखिलेश यादव की चुनावी सक्रियता, उनके वोट बैंक और उनकी हालिया रैलियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. राजभर ने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि अखिलेश यादव दादरी की रैली के बाद से हताश हो चुके हैं.
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'कितना सोएंगे महाराज, आज मैंने सपने में देखा...'
ओम प्रकाश राजभर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया एक्स पर लिखा 'गुड मॉर्निंग अखिलेश जी. उठ जाइए, सुबह हो चुकी है. कितना सोयेंगे महाराज. अच्छा सुनिए. आज मैंने सपने में देखा कि आप चुनाव तक आराम की मुद्रा में ही रहने वाले हैं. यानी ऐसे ही सोए रहेंगे.' राजभर का यह 'सपने वाला' तंज सीधे तौर पर सपा की चुनावी तैयारियों और मैदान में उनकी मौजूदगी पर निशाना है.
दादरी की 'फ्लॉप रैली' और खासमखास लोगों का हवाला
राजभर यहीं नहीं रुके उन्होंने अखिलेश यादव की हिम्मत और उनकी जमीन खिसकने का दावा करते हुए एक बड़ा सियासी हमला बोला. राजभर ने ट्वीट में आगे लिखा 'सपने से याद आया कि दादरी की फ्लॉप रैली के बाद आपको समझ आ गया कि आपकी जमीन अब खोखली हो चुकी है. इसीलिए कोई रैली नहीं कर रहे हैं. आपके ही खासमखास लोग बता रहे हैं कि उस रैली का हश्र देखकर आप अब कोई दूसरी रैली करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. आप निराश और हताश हो चुके हैं.' राजभर का यह दावा कि सपा के ही अंदरूनी लोग उन्हें खबरें दे रहे हैं, सपा के भीतर भी कड़वाहट बढ़ा सकता है.
'सिर्फ यादव और मियां भाई के वोट से काम नहीं बनेगा मित्र'
ट्वीट के आखिरी हिस्से में सुभासपा चीफ ने खुद को अखिलेश यादव का मित्र बताते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश के पारंपरिक वोट बैंक और सोशल मीडिया की राजनीति से बाहर निकलने की नसीहत दे डाली. राजभर ने लिखा 'उठ जाइए महाराज. हम तो आपके मित्र हैं. मित्रता की वजह से आपकी चिंता रहती है मुझे. सिर्फ यादव और मियां भाई के वोट से काम नहीं बनेगा मित्र. ना ट्विटर, एसी-पीसी काम करेगा. इसलिए उठ जाग मुसाफिर भोर भयो.'
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजभर का यह ट्वीट सीधे तौर पर सपा के कोर वोट बैंक (MY समीकरण) को टारगेट करने और अखिलेश यादव को जमीन पर घेरने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. अब देखना यह होगा कि समाजवादी पार्टी की तरफ से राजभर के इस 'जगाओ अभियान' पर क्या पलटवार आता है.
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