BSP Candidate Mohammadabad Gohna: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गोहना (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के 'कार्यकर्ता महासम्मेलन' में उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया जब मंच से नए प्रभारी प्रत्याशी के नाम का ऐलान हुआ. आजमगढ़ मंडल के मुख्य प्रभारी दिनेश चंद्रा ने जैसे ही इस सीट से जे.के. आजाद को बसपा का प्रभारी प्रत्याशी घोषित किया वैसे ही कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा. कार्यकर्ताओं ने हाथों में काली पट्टी बांधकर और 'बाहरी प्रत्याशी को वापस करो' तथा 'बाहरी को भगाना है' के जोरदार नारे लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया. माहौल इस कदर गरमा गया कि वहां तैनात पुलिस बल को बीच-बचाव कर हंगामा और नारेबाजी कर रहे लोगों को शांत कराना पड़ा.
ADVERTISEMENT
हमें लोकल प्रत्याशी चाहिए, बाहरी नहीं चलेगा- स्थानीय कार्यकर्ता
टिकट वितरण से नाराज बसपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी के इस फैसले पर खुलेआम बगावत का बिगुल फूंक दिया है. विरोध का नेतृत्व कर रहे स्थानीय कार्यकर्ता विपिन कुमार ने कहा कि 'मोहम्मदाबाद गोहना विधानसभा चाहती है कि इस बाहरी प्रत्याशी को तुरंत वापस किया जाए. जो नेता यहां दिन-रात जमीन पर पार्टी के लिए काम कर रहा है, उसे दरकिनार कर दिया गया और जिले के बाहर के व्यक्ति को टिकट थमा दिया गया. यह विधानसभा ऐसे प्रत्याशी को कतई स्वीकार नहीं करेगी. हमें यहां का लोकल प्रत्याशी चाहिए.'
वहीं कार्यक्रम में शामिल एक महिला कार्यकर्ता ने भी कड़े लहजे में कहा कि इस सीट पर सिर्फ और सिर्फ मोहम्मदाबाद विधानसभा का ही स्थानीय चेहरा होना चाहिए, किसी बाहरी को हम स्वीकार नहीं करेंगे.
बीजेपी-सपा पर यह मुद्दा क्यों नहीं लागू होता?
बाहरी प्रत्याशी के चयन और कार्यकर्ताओं के भारी विरोध पर आजमगढ़ मंडल के मुख्य प्रभारी दिनेश चंद्रा ने तीखा पलटवार किया. उन्होंने बाहरी के मुद्दे को खारिज करते हुए कहा 'जिले में कार्यकर्ता का मापदंड क्या होता है? हमारे देश का संवैधानिक अधिकार है कि उत्तर प्रदेश में कहीं भी निवास करने वाला व्यक्ति राज्य की किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकता है और देश का कोई भी नागरिक कहीं से भी लोकसभा लड़ सकता है.'
इस दौरान दिनेश चंद्रा ने सवाल उठाते हुए कहा कि 'आज जो लोग बाहरी-अंदर का मुद्दा उठा रहे हैं, यह नियम सपा के धर्मेंद्र यादव पर क्यों नहीं लागू होता? भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर क्यों नहीं लागू होता? यह कोई मुद्दा नहीं है, कुछ लोग इसे जानबूझकर मुद्दा बना रहे हैं.' उन्होंने आगे कहा कि मायावती जी ने बहुत सोच-समझकर बेहद मधुर और अच्छे व्यवहार के धनी भाई जे.के. आजाद को प्रत्याशी बनाया है. महासम्मेलन में उमड़ा भारी जनसैलाब इस बात का गवाह है कि सर्वसमाज हमारे साथ है और यह जनसैलाब जे.के. आजाद को विधायक बनाकर 2027 में बहन जी को मुख्यमंत्री बनाने का काम करेगा.
हाथी उठ गया तो पूरे जंगल में उत्पात मचा देगा-जे.के. आजाद
भारी विरोध के बीच प्रभारी प्रत्याशी घोषित हुए जे.के. आजाद ने मायावती के प्रति आभार जताया और विरोध की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा 'कार्यकर्ताओं के विरोध जैसी कोई बात नहीं है. बहुजन समाज पार्टी का जो भी आदेश होता है, वह माननीया बहन जी का आदेश होता है. हम सब उनके अनुशासित सिपाही हैं और उनका फैसला ही हमारे लिए सर्वमान्य है.'
हाथी देगा विपक्ष को जवाब
विरोधियों और आलोचकों पर तंज कसते हुए जे.के. आजाद ने कहा, "लोग कह रहे थे कि हाथी बैठ गया है. लेकिन मैं इतना ही कहूंगा कि आज का यह सम्मेलन तो सिर्फ एक झांकी है. हाथी जब एक बार उठ जाता है, तो पूरे जंगल में उत्पात मचा देता है. हम जिला कमेटी और संगठन के सहयोग से जनता के बीच जाएंगे, लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और न्याय की लड़ाई लड़ेंगे.'
बसपा के लिए राह नहीं होगी आसान
मोहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित सीट पर टिकट घोषित होते ही जिस तरह स्थानीय स्तर पर बगावत और गुटबाजी खुलकर सामने आई है उसने बसपा आलाकमान की चिंताएं जरूर बढ़ा दी हैं. एक तरफ जहां पार्टी नेतृत्व इसे विरोधियों की साजिश बताकर संवैधानिक अधिकार की दलील दे रहा है. वहीं जमीन पर डटे कार्यकर्ताओं की लोकल प्रत्याशी की मांग 2027 के चुनाव में पार्टी की चुनावी नैया के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.
ADVERTISEMENT











