कौन हैं पूजा शुक्ला? सपा की युवा ब्राह्मण नेता जिन पर अखिलेश यादव खेल रहे हैं 'बड़ा दांव'

रजत सिंह

• 08:42 AM • 09 Jul 2026

लखनऊ की समाजवादी पार्टी नेता पूजा शुक्ला इन दिनों चर्चा में हैं. जानिए छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा चुनाव और ब्राह्मण राजनीति में उनकी बढ़ती भूमिका.

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समाजवादी पार्टी की युवा नेता पूजा शुक्ला इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं. लखनऊ में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम की तैयारियों में उनकी सक्रिय भूमिका के बाद उनका नाम सुर्खियों में है. राजनीतिक गलियारों में उन्हें समाजवादी पार्टी के उभरते ब्राह्मण चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है. 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता भी लगातार बढ़ी है.

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शंकराचार्य के कार्यक्रम को लेकर चर्चा में

हाल ही में लखनऊ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम और गौ रक्षा धर्म यात्रा की तैयारियों में पूजा शुक्ला सक्रिय नजर आईं. कार्यक्रम स्थल पर मंच और पोस्टरों के जरिए गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को प्रमुखता दी गई. राजनीतिक जानकार इसे समाजवादी पार्टी की ब्राह्मण समाज तक पहुंच मजबूत करने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं.

छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर

पूजा शुक्ला लखनऊ की रहने वाली हैं और एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं. उनके पिता प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े हैं. साल 2017 में जब वह लखनऊ विश्वविद्यालय में एमए की छात्रा थीं, तब मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाने के मामले में पहली बार चर्चा में आईं. इस दौरान पुलिस कार्रवाई हुई और कई छात्र नेताओं के साथ उन्हें भी हिरासत में लिया गया. इसके बाद नागरिकता संशोधन कानून (CAA-NRC) के विरोध प्रदर्शन में भी उन्होंने भाग लिया. आंदोलन के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा.

मुलायम सिंह यादव से मुलाकात के बाद मिली जिम्मेदारी

जेल से रिहा होने के बाद पूजा शुक्ला ने समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की. इसके बाद उन्हें समाजवादी छात्र सभा में जिम्मेदारी दी गई. यहीं से उनकी सक्रिय राजनीति की शुरुआत मानी जाती है. इसके बाद वह लगातार छात्र आंदोलनों और विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रहीं.

कई आंदोलनों में दिखीं मुखर

पूजा शुक्ला समय-समय पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करती रही हैं. महिला हेल्पलाइन 112 के कर्मचारियों के आंदोलन में भी वह पहुंचीं, जहां पुलिस के साथ उनकी नोकझोंक चर्चा का विषय बनी थी.

इसके अलावा चुनाव के दौरान भी बूथ स्तर पर अधिकारियों से बहस और विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आती रही हैं.

खुशी दुबे मामले में भी रहीं सक्रिय

कानपुर के बिकरू कांड के बाद जेल गई खुशी दुबे के मामले में भी पूजा शुक्ला सक्रिय रहीं. बताया जाता है कि उन्होंने खुशी दुबे के परिवार से मुलाकात की और उन्हें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मिलवाया. इस दौरान पार्टी की ओर से परिवार की आर्थिक मदद भी की गई थी.

2022 में मिला विधानसभा का टिकट

समाजवादी पार्टी ने 2022 विधानसभा चुनाव में लखनऊ उत्तर सीट से पूजा शुक्ला को उम्मीदवार बनाया था. इस सीट से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता और अखिलेश यादव के करीबी अभिषेक मिश्रा चुनाव लड़ते रहे थे. ऐसे में उनका टिकट काटकर पूजा शुक्ला को मौका देना भी पार्टी के बड़े राजनीतिक फैसलों में माना गया.

2027 से पहले बढ़ी सक्रियता

2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी लगातार ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों पर मुखर नजर आ रही है. रामचरितमानस विवाद, शंकराचार्य से जुड़े मुद्दे और धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़ती भागीदारी के बीच पूजा शुक्ला की सक्रियता भी बढ़ी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी उन्हें युवा ब्राह्मण चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है.