यूपी Tak का खास शो 'आज का UP' प्रदेश की उन बड़ी खबरों का विश्लेषण करता है, जो राजनीति, प्रशासन और समाज पर सीधा असर डालती हैं. इस एपिसोड में तीन बड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. पहली खबर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान की है, जिसमें उन्होंने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा. दूसरी खबर इस पूरे मामले से जुड़े 23 साल पुराने घटनाक्रम और उस समय की परिस्थितियों की पड़ताल है कि आखिर 2003 में क्या हुआ था. तीसरी खबर इस बात का विश्लेषण है कि आखिर अभी इस मुद्दे को उठाने के पीछे राजनीतिक संदेश क्या है और आगामी चुनाव से पहले हिंदुत्व बनाम सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति किस दिशा में बढ़ रही है.
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CM योगी ने फिर उठाया हनुमानगढ़ी में नमाज का मुद्दा, 23 साल पुराना विवाद चर्चा में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालिया अयोध्या के बीकापुर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके शासनकाल में 'हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने का पाप किया गया था.' उन्होंने अपने संबोधन में यह बात दो बार दोहराई और इसे आस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया.
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद 2003 की वह घटना फिर चर्चा में आ गई, जब हनुमानगढ़ी परिसर में रोजा-इफ्तार और नमाज कराने की योजना सामने आई थी. सीएम योगी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि जो लोग आस्था की बात करते हैं, वही उस समय इस तरह की व्यवस्था कराने की कोशिश कर रहे थे.
क्या सचमुच हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज हुई थी? जानिए 2003 की पूरी कहानी
यह पूरा मामला अक्टूबर 2003 का है. उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे. बताया गया कि रमजान के दौरान सद्भावना कार्यक्रम के तहत हनुमानगढ़ी के पास रोजा-इफ्तार और नमाज आयोजित करने की योजना बनाई गई थी. तत्कालीन लखनऊ जोन के आईजी की ओर से यह प्रस्ताव रखा गया था और उस समय हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास ने भी इस योजना को मंजूरी दे दी थी. तैयारी इस बात की थी कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों के पास नमाज और रोजा-इफ्तार का आयोजन होगा.
हालांकि, तत्कालीन फैजाबाद के एसएसपी राजीव सबरवाल ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस कार्यक्रम को उस स्थान पर होने से रोक दिया. इस मुद्दे पर तत्कालीन आईजी और एसएसपी के बीच मतभेद भी हुए थे.
बताया गया कि जैसे ही यह योजना सार्वजनिक हुई, अयोध्या के साधु-संतों ने विरोध शुरू कर दिया. महंत धर्मदास ने इस मामले को अदालत तक पहुंचाया. विरोध और कानून-व्यवस्था की आशंका को देखते हुए सीढ़ियों पर प्रस्तावित कार्यक्रम नहीं हो सका.
खबर के अनुसार, बाद में महंत ज्ञानदास के कमरे में रोजा-इफ्तार का आयोजन हुआ और वहीं नमाज भी अदा की गई. इस दावे का उल्लेख पूर्व डीजीपी और वर्तमान राज्यसभा सांसद बृजलाल के बयान के हवाले से किया गया.
सीएम योगी ने अभी यह मुद्दा क्यों उठाया? सियासत का क्या है संदेश
शो में इस पूरे घटनाक्रम को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से भी जोड़कर देखा गया. विश्लेषण में कहा गया कि हाल के दिनों में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार आस्था और धार्मिक मुद्दों पर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहे हैं.
राम मंदिर, चढ़ावा विवाद और धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दों पर समाजवादी पार्टी के रुख का जिक्र करते हुए कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब पुराने घटनाक्रमों को सामने लाकर जवाबी राजनीतिक रणनीति अपना रहे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने हनुमानगढ़ी का मामला उठाया और अपने भाषण में सवाल किया कि अगर किसी मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ संभव नहीं है, तो फिर हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़ाने की कोशिश क्यों की गई थी. आगामी चुनावों से पहले प्रदेश की राजनीति में हिंदुत्व बनाम सॉफ्ट हिंदुत्व की बहस और तेज होती दिखाई दे रही है. मुख्यमंत्री के इस बयान को भी उसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया गया.
वीडियो में देखें पूरी रिपोर्ट:
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