मेरठ के ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर पनपे विवाद में मायावती की एंट्री, दलित समाज से की अपील

कुमार अभिषेक

• 12:01 PM • 10 Jul 2026

Mayawati about Lalita Gautam: मेरठ की ललिता गौतम हत्याकांड पर बसपा प्रमुख मायावती ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने दलित समाज से कानून हाथ में न लेने की अपील की और विपक्ष पर पीड़ितों के नाम पर राजनीति करने व माहौल भड़काने का आरोप लगाया.

Mayawati on Lalita Gautam Case

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Mayawati about Lalita Gautam: मेरठ की दलित बेटी ललिता गौतम हत्याकांड का मामला इन दिनों उत्तर प्रदेश की सियासत के केंद्र में बना हुआ है. बीते 8 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान मेरठ के SSP अविनाश पांडे द्वारा एक प्रदर्शनकारी वकील रवि गौतम को मारे गए थप्पड़ के बाद इस मुद्दे ने और तूल पकड़ लिया है.  इस पूरे घटनाक्रम और कलेक्ट्रेट के बाहर हुए भारी बवाल के बीच अब बसपा सुप्रीमो मायावती की एंट्री हो गई है. अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे को उठाते हुए मायावती ने जहां एक तरफ पीड़ित परिवार और दलित समाज से कानून हाथ में न लेने की अपील की है. वहीं दूसरी तरफ उन्होंने नाम लिए बिना आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और अन्य विपक्षी दलों पर मगरमच्छ के आंसू बहाने और राजनीतिक रोटियां सेकने का गंभीर आरोप लगाया है.

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सड़कों पर उतरकर हिंसा करना बाबा साहब की सीख नहीं- मायावती

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने दलित समाज को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों की याद दिलाते हुए कहा कि संघर्ष हमेशा संवैधानिक दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए. मायावती ने कहा 'बाबा साहब की हमेशा यही सलाह रही है कि अपने ऊपर होने वाले जुल्म के खिलाफ लड़ाई कानून को हाथ में लेकर नहीं बल्कि कानून के दायरे में रहकर लड़ी जानी चाहिए. यदि मामला अदालत में जाता है और निचली अदालत से इंसाफ नहीं मिलता तो हमें उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए. यह सारी व्यवस्था भारतीय संविधान में दी गई है.'

उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि इंसाफ के नाम पर सहारनपुर, मेरठ, प्रयागराज या देश के किसी भी अन्य कोने में सड़कों पर उतरकर हंगामा करना सही रास्ता नहीं है.

चंद्रशेखर आजाद पर तीखा हमला

मेरठ के कलेक्ट्रेट गेट पर हुए प्रदर्शन और चक्काजाम के बहाने मायावती ने उन राजनीतिक दलों और संगठनों को आड़े हाथों लिया जो इस समय प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं. बिना नाम लिए चंद्रशेखर आजाद पर सीधा हमला बोलते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा 'जो भी संगठन और दल अपनी राजनीति चमकाने के लिए इन दुखी और पीड़ित लोगों को भड़काकर सड़कों पर उतारते हैं, चक्काजाम कराते हैं और हिंसा का माहौल पैदा करते हैं, उनसे सावधान रहने की जरूरत है. ऐसे दलों के मुखिया बाद में मगरमच्छ की तरह आंसू बहाते हुए घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं और अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने लगते हैं.'

मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के उग्र प्रदर्शनों से पीड़ितों को कभी न्याय नहीं मिलने वाला बल्कि वर्तमान हालात में यह उन गरीब और दुखी लोगों के लिए मुश्किलें और ज्यादा बढ़ाने जैसा है क्योंकि पुलिस उन पर कानूनी कार्रवाई करती है.

वोट की ताकत समझें और सत्ता की चाबी अपने पास रखें

मायावती ने अंत में कहा कि लोगों को सड़कों पर बहकने के बजाय अपने वोट की असली ताकत को समझना होगा. उन्होंने कहा कि शोषित और वंचित समाज को अपनी राजनीतिक ताकत को मजबूत करना चाहिए और सत्ता की चाबी हमेशा अपने पास रखनी चाहिए ताकि उन्हें न्याय मांगने के लिए किसी के आगे गिड़गिड़ाना या सड़कों पर लाठियां न खानी पड़ें.

गौरतलब है कि 15 मई को मेरठ में दलित समाज की बेटी ललिता गौतम की निर्मम हत्या कर दी गई थी. पीड़ित परिवार के हक में और पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर भारी भीड़ जुटी थी जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी. इस मामले में पुलिस के आला अधिकारियों पर बदसलूकी और लाठीचार्ज के गंभीर आरोप लगे हैं जिस पर अब उत्तर प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गरमा चुकी है.