Saidraja Election 2027: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की सैयदराजा विधानसभा सीट सूबे की सबसे हॉट और वीआईपी सीटों में शुमार की जाती है. यह एक ऐसी विधानसभा है जहां कभी पूर्वांचल के बड़े बाहुबली चुनाव हार जाते हैं तो कभी उनका भतीजा उस हार का बदला लेकर लगातार जीत का परचम लहराता है. बात हो रही है माफिया डॉन बृजेश सिंह और उनके भतीजे सुशील सिंह की. साल 2012 में वजूद में आई इस सीट का इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है. यहां मुकाबला सीधे तौर पर दो रसूखदार क्षत्रिय परिवारों के बीच होता आया है. एक तरफ जहां भाजपा के मौजूदा विधायक सुशील सिंह अपनी जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में हैं. वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के नेता मनोज सिंह डब्लू साल 2012 की तरह एक बार फिर बड़ा उलटफेर करने का दम भर रहे हैं. स्थानीय जानकारों और पत्रकारों की मानें तो आगामी 2027 के रण में यहां की लड़ाई बेहद कशमकश और धुआंधार होने वाली है.
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चाचा हारे, भतीजे ने लिया बदला
साल 2012 में जब सैयदराजा विधानसभा सीट पर पहली बार चुनाव हुआ, तब बाहुबली बृजेश सिंह उर्फ अरुण कुमार सिंह ने जेल में रहते हुए प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ा था. लेकिन उस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी मनोज सिंह डब्लू ने उन्हें करीब 2,000 वोटों से हराकर सबको चौंका दिया था.
परिवार की इस मात का बदला लेने के लिए 2017 में बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह मैदान में उतरे. उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर मनोज सिंह डब्लू को पटखनी दी और मनोज सिंह तीसरे नंबर पर खिसक गए. साल 2022 के चुनाव में एक बार फिर दोनों के बीच सीधी टक्कर हुई, जहां मनोज सिंह डब्लू (सपा) रनर-अप रहे और सुशील सिंह (भाजपा) दोबारा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे.
तीसरे टर्म में पूरे होंगे अधूरे वादे- सुशील सिंह
सुशील सिंह अपनी दो लगातार जीतों के बाद भाजपा विधायक सुशील सिंह का दावा है कि उन्होंने जनता से किए अधिकांश वादों को पूरा किया है. सुशील सिंह कहते हैं 'हमने जो वादे किए थे, उनमें से काफी में हम सफल हो चुके हैं. कुछ चीजें अभी बची हैं, जैसे तहसील का निर्माण और सब-स्टेशन का काम. हमारा जो पुल है उसकी शुरुआत 2022 के चुनाव से ठीक पहले कर दी गई थी. तहसील का काम जनगणना की प्रक्रिया रुकने की वजह से अटका हुआ है जो जल्द पूरा होगा। हम बिजली, पानी, सड़क और बेहतर कानून-व्यवस्था के दम पर एक बार फिर जनता से आशीर्वाद मांग रहे हैं.'
हार से बहुत कुछ सीखा, अब बदला पूरा होगा- मनोज सिंह डब्लू (सपा)
वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता मनोज सिंह डब्लू इस बार आर-पार के मूड में हैं. अपनी तैयारियों को लेकर वे कहते हैं 'उत्तर प्रदेश का चुनाव अलग होता है और सैयदराजा का चुनाव बिल्कुल अलग. यहां कैसे-कैसे लोग चुनाव लड़ते हैं, यह सब जानते हैं. पिछली हार से हमने बहुत कुछ सीखा है जो कमियां रह गई थीं उन्हें अब दूर कर लिया गया है. अब कोई टेंशन नहीं है, 2027 के लिए हमारी पूरी तैयारी है और किसी भी कीमत पर हम यह चुनाव जीतेंगे.'
सैयदराजा का जातीय गणित
स्थानीय पत्रकारों और आंकड़ों के मुताबिक, सैयदराजा सीट पूरी तरह से राजपूत (क्षत्रिय) बाहुल्य मानी जाती है. यही वजह है कि पिछले तीनों चुनावों में विजेता और उपविजेता दोनों ही क्षत्रिय उम्मीदवार रहे हैं. इस सीट का अनुमानित जातीय समीकरण इस प्रकार है.
क्षत्रिय (ठाकुर): लगभग 50,000
यादव: लगभग 40,000
जाटव (दलित): लगभग 36,000
मुस्लिम: लगभग 25,000
ब्राह्मण: लगभग 22,000
लोहार और कोहार: लगभग 22,000
मौर्य (कुशवाहा): लगभग 21,000
वैश्य: लगभग 20,000
राजभर: लगभग 16,000
भूमिहार: लगभग 13,000
मल्लाह: लगभग 10,000
चौहान: लगभग 8,000
अन्य जातियां: लगभग 34,000
चुनावी समीकरण: पार्टी कैडर बनाम व्यक्तिगत रसूख
इस सीट पर दोनों ही बड़े नेताओं का अपना मजबूत व्यक्तिगत वोट बैंक है.
भाजपा (सुशील सिंह) का समीकरण: भाजपा के टिकट पर लड़ने से सुशील सिंह को ब्राह्मण, ठाकुर, भूमिहार, मौर्य (कुशवाहा) और अन्य गैर-यादव ओबीसी जातियों का एकमुश्त वोट मिलता है.
सपा (मनोज सिंह डब्लू) का समीकरण: सपा के पाले में होने के कारण मनोज सिंह डब्लू के साथ यादव, मुस्लिम, बिंद और कुछ धड़ों के दलित मतदाताओं का स्वाभाविक झुकाव रहता है.
क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार?
स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि सैयदराजा में मुकाबला कभी त्रिकोणीय नहीं होता, बल्कि हमेशा आमने-सामने की सीधी टक्कर होती है. एक तरफ सुशील सिंह हैं जो लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं तो दूसरी तरफ मनोज सिंह डब्लू हैं जो अपनी रणनीतियों से अचानक हलचल मचा देते हैं. फिलहाल के समीकरणों में भाजपा के सुशील सिंह का पलड़ा थोड़ा भारी जरूर दिखाई दे रहा है. लेकिन मनोज सिंह डब्लू की जमीनी तैयारी को देखते हुए 2027 का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह मुकाबला देखने लायक होगा.
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