किसी भी नाते-रिश्तेदार को टिकट नहीं देंगे अखिलेश यादव, सपा के कई दिग्गज नेता हो सकते हैं परेशान!

कुमार अभिषेक

• 11:33 AM • 14 Jul 2026

Aak ka UP: यूपी तक के शो आज का यूपी में देखें सपा के अंदरूनी टिकट घमासान का पूरा विश्लेषण. सांसद आनंद भदौरिया के ट्वीट और अखिलेश यादव के नए नियमों से मची सियासी खलबली.

Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav (File Photo)

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Aaj ka UP: यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' के इस अंक में हम राज्य की तीन बड़ी और बेहद अहम सियासी खबरों का विश्लेषण कर रहे हैं. इसमें पहली बड़ी खबर समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर 2027 के विधानसभा चुनाव टिकटों को लेकर मचे घमासान और धौरहरा से सपा सांसद आनंद भदौरिया के एक तंज भरे ट्वीट से जुड़ी है जिसने अंदरूनी नाराजगी को उजागर कर दिया है. दूसरी बड़ी खबर अखिलेश यादव द्वारा पार्टी में टिकट वितरण के लिए बनाए गए उन सख्त और नए नियमों को लेकर है जिससे कई दिग्गज नेता परेशान नजर आ रहे हैं. वहीं तीसरी बड़ी खबर यादव परिवार सहित पार्टी के उन रसूखदार नेताओं और नए उभरते सांसदों के बीच के उस अपवाद और अंतर्विरोध की है जो अपने नाते-रिश्तेदारों के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं और जिस पर अब अखिलेश यादव इनफ इज इनफ के मूड में लगाम कसने की तैयारी कर चुके हैं.

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सपा सांसद आनंद भदौरिया का ट्वीट और पीठ पीछे का दर्द

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के अंदरूनी खेमे में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. धौरहरा से सपा सांसद आनंद भदौरिया के एक लंबे-चौड़े ट्वीट ने इस सुगबुगाहट को हवा दे दी है. भदौरिया ने अपने इस ट्वीट में कार्यकर्ताओं और टिकटार्थियों पर तीखा तंज कसते हुए लिखा है कि 2027 के चुनाव में उम्मीदवार कौन होगा, यह सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करेंगे और इस बार किसी की सिफारिश काम नहीं आने वाली है.

सांसद ने अपनी तल्खी जाहिर करते हुए लिखा 'मैं धौरहरा लोकसभा के पांचों क्षेत्रों में किसी का पैरोकार नहीं हूं और मेरा कोई पसंदीदा उम्मीदवार नहीं है. टिकट चाहने वाले सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का दरवाजा खटखटाएं.' उन्होंने कार्यकर्ताओं पर निशाना साधते हुए आगे लिखा कि लोग अकेले में तो तारीफ करते हैं. लेकिन पीठ पीछे क्या कहते हैं, उसका भगवान ही मालिक है. भदौरिया का यह ट्वीट साफ इशारा करता है कि टिकट की पैरवी को लेकर उन पर भारी दबाव था और पार्टी के भीतर गुटबाजी से वह आहत हैं.

अखिलेश यादव का नया फॉर्मूला: सिफारिश और नाते-रिश्तेदारों को नो-एंट्री

पार्टी सोर्सेज की मानें तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कुछ बेहद कड़े नियम-कानून तय कर दिए हैं. अखिलेश ने साफ संकेत दे दिए हैं कि जो नेता खुद सांसद या विधायक हैं वे अपने परिवार, पत्नी या बच्चों के लिए टिकट की होड़ से दूर रहें. इस बार किसी भी बड़े नेता की सिफारिश पर आंख मूंदकर टिकट नहीं बांटे जाएंगे.

अखिलेश यादव का यह नया कड़ा रुख उन नेताओं के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है जो अपने रसूख के दम पर अपने करीबियों को चुनावी मैदान में उतारने का सपना देख रहे थे. पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव में केवल जिताऊ और जमीनी कार्यकर्ताओं को ही तरजीह दी जाएगी न कि नेताओं के परिवारों को.

'इनफ इज इनफ': सपा के दिग्गजों और नए सांसदों के बीच फंसा पेच

इस पूरी सियासी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि अखिलेश यादव का यह नो-फैमिली नियम हर किसी पर लागू कर पाना आसान नहीं दिख रहा है. पार्टी के भीतर कई ऐसे रसूखदार और बड़े चेहरे हैं जिनके आगे यह नियम अपवाद बनता दिख रहा है. उदाहरण के लिए यादव परिवार से तेज प्रताप यादव, बाबू सिंह कुशवाहा, अवधेश प्रसाद के बेटे, आर.के. चौधरी और इंद्रजीत सरोज जैसे दिग्गज नेताओं के परिवारों को रोक पाना नेतृत्व के लिए भी बड़ी चुनौती है.

अब पेंच यह फंसा है कि जब इन बड़े नेताओं के परिवारों को टिकट मिलेगा तो नए उभरते हुए नेता और हाल ही में जीतकर आए सांसद भी अपने परिवारों के लिए दावेदारी ठोक रहे हैं. अंदरखाने चर्चा है कि खुद आनंद भदौरिया भी अपने परिवार के लिए टिकट की उम्मीद रखते हैं. हालांकि, अखिलेश यादव अब इनफ इज इनफ यानी बहुत हो गया के मूड में हैं और नए चेहरों के रिश्तेदारों के लिए रास्ता ब्लॉक करते दिख रहे हैं जो पार्टी में एक बड़ी नाराजगी की वजह बन सकता है.