Sambhal Mosque Demolition News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के कसेरुआ गांव में कथित अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन द्वारा मुस्तफा कादरी मस्जिद को बुलडोजर से ध्वस्त किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है. वहीं समाजवादी पार्टी के संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे कानूनी प्रयासों और गुहारों की अनदेखी बताया है. वहीं प्रशासन का दावा है कि मस्जिद कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर बनी थी और न्यायालय के आदेश के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई. मामले को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक दावों के बीच बहस तेज हो गई है.
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सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने क्या लिखा?
संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा कि जुल्म की इंतिहा हो गई... लाख कोशिशों, गुज़ारिशों और कानूनी प्रयासों के बावजूद सम्भल प्रशासन द्वारा कसेरवा गांव में मस्जिद को शहीद कर दिया गया. ऐसा महसूस होता है अधिकारियों द्वारा आंखों पर पट्टी बांधकर एक तय निशाने के साथ कार्रवाई की जा रही है. यह कार्रवाई कई गंभीर सवाल खड़े करती है. जब लोगों की फरियाद, कानूनी दलीलें भी न सुनी जाएं, तो इंसाफ़ पर भरोसा कमजोर पड़ने लगता है. याद रखिए, भारत का संविधान किसी को भी कानून से ऊपर होने की इजाज़त नहीं देता. यह मुल्क किसी व्यक्ति, दल या सत्ता की जागीर नहीं है. मस्जिद के शहीद किए जाने के बाद पूरे गांव में ग़म, दर्द और मातम का माहौल है. मां-बहनों की आंखें अश्कबार हैं, बच्चे सहमे हुए हैं और हर दिल इस मंज़र को देखकर दुखी है. अगर किसी को यह लगता है कि ताकत के दम पर लोगों की आवाज़ दबा दी जाएगी, तो यह उसकी गलतफहमी है. नाइंसाफी के खिलाफ यह आवाज़ हर हाल में बुलंद होती रहेगी. कल इस मुद्दे पर प्रेस कांफ्रेंस करूँगा.
प्रेस कॉन्फ्रेंस का किया ऐलान
सपा सांसद ने दावा किया कि मस्जिद ध्वस्त किए जाने के बाद गांव में दुख और मायूसी का माहौल है. उन्होंने कहा कि महिलाएं, बच्चे और स्थानीय लोग इस घटना से आहत हैं. बर्क ने यह भी कहा कि यदि किसी को लगता है कि ताकत के बल पर लोगों की आवाज दबाई जा सकती है, तो यह गलतफहमी है और अन्याय के खिलाफ आवाज उठती रहेगी. सांसद ने इस पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी साझा करने के लिए अगले दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की घोषणा भी की है. दूसरी ओर, प्रशासन अपने फैसले को न्यायालय के आदेश और राजस्व अभिलेखों के आधार पर उचित ठहरा रहा है, जबकि मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है.
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