पैरवी या खुद की मेहनत से बने प्रदेश उपाध्यक्ष... क्या राजनाथ सिंह के उत्तराधिकारी बनेंगे उनके छोटे बेटे नीरज सिंह?

UP Political News: यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में देखिए उत्तर प्रदेश बीजेपी की सबसे बड़ी संगठनात्मक सूची का विश्लेषण. जानिए 19 उपाध्यक्षों की लिस्ट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह के शामिल होने की अंदर की पूरी कहानी.

UP Political News

UP Political News

कुमार अभिषेक

• 10:23 AM • 26 Jun 2026

follow google news

UP Political News: यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक और संगठनात्मक हलचलों का सटीक विश्लेषण लेकर आता है. आज के इस विशेष एपिसोड में हम उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करेंगे, जिसमें पहली बड़ी खबर यूपी बीजेपी द्वारा जारी की गई संगठन की अब तक की सबसे बड़ी लिस्ट है. दूसरी बड़ी खबर इस लिस्ट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने का चौंकाने वाला फैसला है और तीसरी बड़ी खबर इस नियुक्ति के पीछे की छिपी अंदर की कहानी और लखनऊ की भावी चुनावी राजनीति पर इसके असर का दिलचस्प विश्लेषण है.

यह भी पढ़ें...

यूपी बीजेपी ने जारी की संगठन की सबसे बड़ी सूची, जातीय और सामाजिक समीकरणों पर जोर

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज अपने संगठन की अब तक की सबसे बड़ी सूची जारी कर दी है. चुनावी और संगठनात्मक तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही इस लिस्ट में पार्टी ने बड़े पैमाने पर पदाधिकारियों की घोषणा की है.  

इस नई सूची के तहत बीजेपी ने:

  • 19 प्रदेश उपाध्यक्षों के नामों का ऐलान किया है.  
  • 8 प्रदेश महामंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है. 
  • 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों की नियुक्ति की है.  
  • 17 प्रदेश मंत्रियों की सूची जारी कर संगठन को नया विस्तार दिया है.

इस पूरी लिस्ट को तैयार करने में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के जातीय और सामाजिक समीकरणों का विशेष रूप से ध्यान रखा है, ताकि हर वर्ग को संगठन में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके.  

राजनाथ सिंह के दूसरे बेटे नीरज सिंह की एंट्री, लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम

इस पूरी संगठनात्मक सूची में जिस एक नाम ने राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी के भीतर सबको सबसे ज्यादा चौंकाया, वह नाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह का है. वह लोग जो यूपी की राजनीति को सतही तौर पर देखते हैं, उनके लिए यह बेहद हैरान करने वाला फैसला है, क्योंकि राजनाथ सिंह खुद देश की सियासत के शीर्ष पायदान पर हैं और उनके बड़े बेटे पंकज सिंह भी भाजपा की राजनीति में कई बार के विधायक और प्रदेश महामंत्री जैसे बड़े पदों पर रहकर अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं.

अब राजनाथ सिंह के दूसरे और छोटे बेटे नीरज सिंह को सीधे प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण और बड़े पद पर बिठा दिया गया है. इस घोषणा के बाद से ही पूरी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ी चर्चा नीरज सिंह के नाम को लेकर ही हो रही है कि आखिर संगठन में उनकी इस धमाकेदार एंट्री के मायने क्या हैं.  

पैरवी या खुद की मेहनत? नीरज सिंह की संगठन में एंट्री की पूरी 'अंदर की कहानी'

नीरज सिंह को अचानक यह पद नहीं मिला है, बल्कि इसके पीछे लखनऊ की जमीन पर उनकी सालों की सक्रियता और एक अंदरूनी राजनीतिक कहानी है.

जमीन पर लगातार सक्रियता: भले ही बाहरी लोगों के लिए यह नाम नया हो, लेकिन नीरज सिंह साल 2014 से लेकर 2026 तक लखनऊ की जमीन पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहे हैं. बिना किसी पद (न विधायक, न सांसद, न संगठन का पद) के भी लखनऊ में भाजपा के किसी भी सामान्य नेता की तुलना में सबसे बड़ी भीड़ नीरज सिंह के दरवाजे पर ही देखी जाती रही है.  

रिकॉर्ड सदस्यता और नमो ऐप का काम: नीरज सिंह ने बीजेपी के सदस्यता अभियान में एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में देश में सबसे ज्यादा सदस्य बनाने का रिकॉर्ड बनाया. इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किए गए 'नमो ऐप' को आम लोगों के मोबाइल तक पहुंचाने में भी वे देश में नंबर वन रहे हैं. 

सामाजिक कार्य और युवाओं में पैठ: लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर हर साल विशाल स्वास्थ्य मेला और रोजगार मेला आयोजित करने का जिम्मा नीरज सिंह ही संभालते रहे हैं. इसके चलते स्थानीय युवाओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ उनका बेहतरीन तालमेल है.

क्या राजनाथ सिंह ने की पैरवी? 

राजनाथ सिंह को करीब से जानने वालों का मानना है कि उन्होंने अपने छोटे बेटे के लिए शीर्ष नेतृत्व या संगठन से कोई पैरवी नहीं की होगी, ताकि उन पर 'परिवारवाद' का आरोप न लगे. नीरज सिंह पिछले कई सालों से संगठन में जगह पाने के लिए खुद मेहनत कर रहे थे और कई बार जगह न मिलने पर उनके भीतर निराशा भी देखी जा रही थी. लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री जैसे बड़े नेताओं तक उन्होंने अपनी काम के दम पर जो पहचान बनाई, यह उसी का नतीजा माना जा रहा है.

भविष्य की चुनावी राजनीति के मायने: राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जब तक पंकज सिंह नोएडा से विधायक हैं और राजनाथ सिंह लखनऊ से सांसद हैं, तब तक नीरज सिंह को शायद चुनावी राजनीति में मौका न मिले. लेकिन भविष्य में जब राजनाथ सिंह चुनावी राजनीति से अलग होंगे, तो लखनऊ की प्रतिष्ठित लोकसभा सीट या किसी विधानसभा सीट पर नीरज सिंह की दावेदारी को इस उपाध्यक्ष पद (जो कि अध्यक्ष के बाद सबसे बड़ा पद माना जाता है) से बहुत बड़ा बल मिला है.  

यहां देखें वीडियो रिपोर्ट

ये भी पढ़ें: कौन हैं नीरज सिंह? न चुनाव लड़ा और न भाषण दिए, फिर भी भाजपा ने बना दिया यूपी का प्रदेश उपाध्यक्ष