ब्राह्मण, ओबीसी, ठाकुर, दलित, भूमिहार... भाजपा की नई टीम में किस जाति की कितनी हिस्सेदारी? 2027 से पहले दिया बड़ा हिंट

उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की सामाजिक रणनीति का संकेत भी मानी जा रही है.

UP Tak

आयशा शेख़

• 06:04 PM • 25 Jun 2026

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UP BJP New Team: उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी सामने आ गई है. पहली नजर में ये सिर्फ पदाधिकारियों की सूची लगती है, लेकिन अगर नामों के पीछे छिपे सामाजिक समीकरण को पढ़ें तो कहानी कुछ और ही नजर आती है.

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2027 विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन भाजपा ने अपनी नई संगठनात्मक टीम के जरिए संकेत जरूर दे दिया है कि आने वाले चुनाव में उसका सामाजिक गणित क्या रहने वाला है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से जारी सूची में क्षेत्रीय अध्यक्षों से लेकर उपाध्यक्षों तक जातीय संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई देती है.

सबसे पहले क्षेत्रीय अध्यक्षों पर नजर डालिए

भाजपा ने 6 क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए हैं. इनमें चार चेहरे ओबीसी समुदाय से आते हैं, जबकि एक ब्राह्मण और एक भूमिहार समाज से हैं.

क्षेत्रीय अध्यक्षों का जातीय समीकरण

  • नबाब सिंह नागर - ओबीसी
  • पूरन लाल लोधी - ओबीसी
  • राम किशोर साहू - ओबीसी
  • विनोद राय - भूमिहार
  • अशोक चौरसिया - ओबीसी
  • अवधेश द्विवेदी - ब्राह्मण

यानी 6 में से 4 पद ओबीसी समाज को दिए गए हैं.

उपाध्यक्षों की सूची में भी ओबीसी सबसे आगे

भाजपा ने 19 प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए हैं. इनमें सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व ओबीसी नेताओं का दिखाई देता है.

उपाध्यक्षों का अनुमानित सामाजिक प्रतिनिधित्व

  • 7 ओबीसी
  • 4 ठाकुर
  • 3 ब्राह्मण
  • 2 वैश्य
  • 2 दलित
  • 1 भूमिहार

इस सूची में सत्यपाल सैनी, मोहित बेनीवाल, देवेश कोरी, प्रियंका रावत, दर्विजय शाक्य, सुरेश मौर्य और राजेश यादव जैसे ओबीसी चेहरे शामिल हैं. वहीं नीरज सिंह, सुरेश राणा और रमेश सिंह जैसे ठाकुर नेताओं को भी जगह मिली है.

भाजपा आखिर क्या संदेश देना चाहती है?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओबीसी वोट बैंक निर्णायक माना जाता है. पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने गैर-यादव ओबीसी समुदायों के बीच मजबूत पकड़ बनाई है. नई कार्यकारिणी को देखकर लगता है कि पार्टी उसी सामाजिक आधार को और मजबूत करना चाहती है.

सिर्फ क्षेत्रीय अध्यक्षों में ही नहीं, बल्कि उपाध्यक्षों और अन्य पदों पर भी लोधी, साहू, सैनी, शाक्य, मौर्य, पाल, निषाद, राजभर, बिंद और विश्वकर्मा जैसे समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है.

दलित और पिछड़े वर्ग पर खास फोकस?

प्रदेश मंत्रियों की सूची में राहुल वाल्मीकि, आकांक्षा सोनकर, देवेश कोरी जैसे नाम दिखाई देते हैं. वहीं पिछड़ा वर्ग के कई नेताओं को भी जिम्मेदारी मिली है. भाजपा 2027 से पहले अपने उस सामाजिक गठजोड़ को और मजबूत करना चाहती है जिसने 2017 और 2022 में पार्टी को बड़ी जीत दिलाई थी.

क्या ब्राह्मण और सवर्ण नेतृत्व को भी साधा गया?

भाजपा ने सिर्फ ओबीसी प्रतिनिधित्व पर जोर नहीं दिया. अवधेश द्विवेदी को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं अर्चना मिश्रा, अभिजात मिश्रा, अवधेश श्रीवास्तव, यतेंद्र शर्मा और अन्य सवर्ण चेहरों को भी संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं.

यानी भाजपा ने नई टीम के जरिए एक तरफ ओबीसी आधार को मजबूत करने का संदेश दिया है, तो दूसरी तरफ अपने पारंपरिक सवर्ण समर्थन को भी संतुलित रखने की कोशिश की है.

2027 का ट्रेलर?

भाजपा की नई टीम सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं मानी जा रही. राजनीतिक हलकों में इसे 2027 विधानसभा चुनाव की सामाजिक रणनीति का शुरुआती खाका माना जा रहा है. सूची देखकर इतना जरूर कहा जा सकता है कि भाजपा ने जातीय प्रतिनिधित्व के सवाल को नजरअंदाज नहीं किया है.