Opinion: कारोबार से लेकर अर्थव्यवस्था तक-जानें योगी राज के 9 साल में कैसे बदला यूपी का 'कृषि मॉडल'

Opinion: योगी सरकार के 9 वर्षों में यूपी का कृषि क्षेत्र 8% से 18% विकास दर तक कैसे पहुंचा? पढ़ें गन्ना, एथेनॉल, सिंचाई और तकनीक के दम पर बदलते उत्तर प्रदेश की पूरी कहानी.

CM Yogi

यूपी तक

• 07:00 PM • 10 Apr 2026

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Opinion: उत्तर प्रदेश की पहचान वैसे तो लंबे समय से एक पारंपरिक कृषि राज्य के रूप में रही है, लेकिन बीते 9 वर्षों में यह परिभाषा बदल चुकी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कुशल नीतियों का प्रभाव है कि कृषि अब सिर्फ खेतों और फसलों की उपज तक सीमित गतिविधि नहीं रही, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था का केंद्रीय स्तंभ बनकर उभरी है. उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि, किसानों को सीधा लाभ, सिंचाई का विस्तार, तकनीक का उपयोग और कृषि आधारित उद्योगों में निवेश - इन सबने मिलकर यूपी के कृषि सेक्टर को एक नए मॉडल में तब्दील कर दिया है. यही वजह है कि आज उत्तर प्रदेश न केवल खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी है, बल्कि एथेनॉल व दुग्ध उत्पादन तथा बागवानी समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी देश का नेतृत्व कर रहा है.

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आंकड़ों में बदलाव की कहानी- विकास दर से GVA तक छलांग

अगर कृषि परिवर्तन को समझना हो तो सबसे पहले आंकड़ों पर नजर डालनी होगी. 2016-17 में जहां कृषि विकास दर 8% थी, वह अब बढ़कर 18% हो चुकी है. यह वृद्धि केवल संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है. राज्य के कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (GVA) ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर ₹6.95 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. खास बात यह है कि देश की केवल 11% कृषि योग्य भूमि होने के बावजूद उत्तर प्रदेश देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21% का योगदान दे रहा है. यानी कम संसाधनों में अधिक उत्पादन - यही इस मॉडल की असली ताकत है.

किसान सशक्तिकरण- बिना बिचौलियों के सीधे खाते में लाभ

 योगी सरकार ने किसानों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि भागीदार बनाने की कोशिश की है. बिचौलिया व्यवस्था को खत्म कर सीधे लाभ पहुंचाने का मॉडल अपनाया गया. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 3 करोड़ 12 लाख किसानों को ₹99 हजार करोड़ से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में भेजी गई. इसके अलावा, सरकार गठन के तुरंत बाद 86 लाख से अधिक किसानों का ऋण माफ किया गया. इस कदम ने किसानों को आर्थिक राहत ही नहीं दी, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास भी दिया कि सरकार उनके साथ खड़ी है.

गन्ना और एथेनॉल- यूपी बना देश का ग्रोथ इंजन

उत्तर प्रदेश ने गन्ना और एथेनॉल सेक्टर में जो उपलब्धि हासिल की है, उसने इसे राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दी है. गन्ने का रकबा 20.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28.61 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि उत्पादकता 72 टन से बढ़कर 83.25 टन प्रति हेक्टेयर पहुंच गई है. गन्ना किसानों को ₹3,12,928 करोड़ का रिकॉर्ड भुगतान भी किया गया है. वहीं, एथेनॉल उत्पादन 42 करोड़ लीटर से बढ़कर 187.80 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है, जिससे उत्तर प्रदेश देश का नंबर-1 एथेनॉल उत्पादक बन गया है.

सिंचाई विस्तार- ‘हर खेत को पानी’ नीति का जमीन पर असर

कृषि क्षेत्र में असली बदलाव तब आता है जब पानी की समस्या हल होती है. इसी तथ्य को ध्यान में रखकर पिछले 9 वर्षों में 1309 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया गया, जिससे 52.13 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता सृजित हुई. इसका सीधा लाभ 241.29 लाख किसानों को मिला. यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि फसल की स्थिरता, उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार की कहानी है.

बागवानी, निर्यात समेत कई फैक्टर्स में नंबर-1 बनने की ओर यूपी के बढ़ते कदम

उत्तर प्रदेश ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए बागवानी और वैल्यू एडेड कृषि पर भी जोर दिया है. बागवानी से किसानों की आय ₹41,000 करोड़ से बढ़कर ₹1,25,000 करोड़ हो गई है. वहीं निर्यात ₹400 करोड़ से बढ़कर ₹1,700 करोड़ तक पहुंच गया है. आम, आलू, मटर, आंवला और शहद के उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 है. यह दर्शाता है कि राज्य ने उत्पादन के साथ-साथ विविधीकरण पर भी ध्यान दिया है.

दुग्ध, मत्स्य और रेशम से मिला आय को बढ़ावा

कृषि को बहुआयामी बनाने के लिए पिछले 9 वर्षों में पशुपालन और मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया गया. उत्तर प्रदेश 388.15 लाख मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन के साथ देश में प्रथम स्थान पर है. मत्स्य उत्पादन 6.18 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 13.30 लाख मीट्रिक टन हो गया है, जबकि रेशम उत्पादन 268 से बढ़कर 480 मीट्रिक टन तक पहुंचा है. यह बदलाव दर्शाता है कि यूपी का किसान केवल एक फसल पर निर्भर रहने की बाध्यता से बाहर निकल रहा है.

तकनीक, निवेश और ‘यूपी एग्रीज- खेती का नया इकोसिस्टम

कृषि को भविष्य के अनुरूप बनाने के लिए तकनीक और निवेश दोनों पर जोर दिया गया है. प्रदेश में 86,128 सोलर पंप लगाए गए हैं और ड्रोन खरीद पर 40-50% का अनुदान दिया जा रहा है. यहीं पर ‘यूपी एग्रीज’ योजना इस परिवर्तन को और मजबूती देती है. विश्व बैंक के सहयोग से ₹4,000 करोड़ की इस योजना के माध्यम से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के 28 जिलों में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य केवल खेती नहीं, बल्कि कृषि को एक संपूर्ण वैल्यू चेन में बदलना है - जहां उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और मार्केट तक, सब कुछ इंटीग्रेटेड मोड में विकसित हो रहा है.

कृषि से 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की नींव

उत्तर प्रदेश में कृषि अब केवल जीविका नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति का आधार बन चुकी है. उत्पादन, निवेश, तकनीक और निर्यात-चारों स्तरों पर हुए बदलावों ने इसे राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बना दिया है. 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर बढ़ते उत्तर प्रदेश में कृषि की भूमिका निर्णायक है. योगी सरकार के 9 वर्षों में जो नींव रखी गई है, वह आने वाले समय में यूपी को न केवल कृषि में, बल्कि समग्र आर्थिक विकास में भी अग्रणी बनाने वाली है.

लेखक: डॉ. प्रदीप कुमार सिंह (असोसिएट प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय)

Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.