AK Sharma vs Rajiv Rai Dispute: मऊ जिले के दोहरीघाट रेलवे स्टेशन पर खुशियों की रेल चलनी थी.लेकिन वहां सियासत की ऐसी ट्रेन दौड़ी कि हर तरफ हंगामा मच गया. मौका था दोहरीघाट-औड़िहार मेमो ट्रेन के उद्घाटन का जहां यूपी के कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा और सपा सांसद राजीव राय के समर्थक आमने-सामने आ गए. मंच पर जितनी गर्माहट थी उससे कहीं ज्यादा उबाल नीचे कार्यकर्ताओं के बीच दिखा. धक्का-मुक्की, नारेबाजी और पथराव जैसी नौबत के बीच पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा. अब कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी दोनों नेता सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को गुंडा और हिस्ट्रीशीटर का गिरोह चलाने वाला बताकर चुनौती दे रहे हैं.
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ए.के. शर्मा का पलटवार
कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा ने कार्यक्रम के बाद सपा कार्यकर्ताओं पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि 'मैं तो डर रहा था कि कहीं मुट्ठी भर उनके लोग और हजारों की संख्या में हमारे लोग भिड़ गए तो क्या होगा? बदनामी ए.के. शर्मा की होती.' उन्होंने सरजू मैया का धन्यवाद करते हुए कहा कि मऊ में अब गुंडे-माफियाओं के लिए कोई जगह नहीं है. उन्होंने सपा की नारेबाजी को गुंडई करार देते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने सवा शेर बनकर जवाब दिया है.
राजीव राय की खुली चुनौती
वहीं सपा सांसद राजीव राय मंच पर और मंच के नीचे भी बेहद गुस्से में नजर आए. उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री के साथ आए हिस्ट्रीशीटर गिरोह ने उनकी गाड़ी रोकने की कोशिश की. राजीव राय ने कहा कि सांसद को 5 लाख लोगों ने जिताया है, मैं मंत्री के रहमोकरम पर नहीं हूं. आगे से ऐसा करके देख लेना.' उन्होंने सीएम योगी को टैग करते हुए सवाल किया कि आखिर ए.के. शर्मा के कार्यक्रमों से भाजपा के ही अन्य विधायक और मंत्री दूरी क्यों बना लेते हैं?
बैनर-पोस्टर और दुकान तोड़ने का आरोप
विवाद की जड़ केवल नारेबाजी नहीं थी. राजीव राय ने आरोप लगाया कि मंत्री के समर्थकों ने गरीब दुकानदारों की दुकानें सिर्फ इसलिए उजाड़ दीं क्योंकि वहां मंत्री जी का पोस्टर लगना था. उन्होंने कहा कि गरीबों की आह लेकर नेता बनने वालों को जनता सबक सिखाएगी.
उद्घाटन के दौरान माहौल इतना बिगड़ गया था कि आरपीएफ और कई थानों की फोर्स को बीच-बचाव करना पड़ा. दोनों तरफ से 'छेड़ेंगे नहीं और छोड़ेंगे नहीं' वाले अंदाज ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए.
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