Mood Kya hai Gonda: बृजभूषण सिंह कैसे बैठा रहे गोंडा में समीकरण? पत्रकारों ने बताया इन 7 सीटों पर क्या है माहौल?

अंचल श्रीवास्तव

• 06:22 PM • 28 Jul 2026

Mood Kya Hai Gonda: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गोंडा की सातों सीटों का चुनावी समीकरण बदलता दिख रहा है. जानिए भाजपा-सपा की स्थिति, बृजभूषण शरण सिंह की भूमिका, एंटी-इंकंबेंसी और स्थानीय पत्रकारों की ग्राउंड रिपोर्ट में किसका पलड़ा भारी है.

Mood kya hai Gonda

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Mood Kya hai Gonda: साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गोंडा जिले की सभी 7 विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एकतरफा परचम फहराया था. लेकिन 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान अभी से चढ़ने लगा है. यूपी Tak की स्पेशल सीरीज 'मूड क्या है' में जब स्थानीय वरिष्ठ पत्रकारों से जिले के चुनावी मिजाज पर बात की गई तो कई चौंकाने वाले समीकरण सामने आए.

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जिले में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का वर्चस्व, मनकापुर राजघराने (केंद्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह) से उनकी टसल, सपा में जाने की अटकलें, भीतरघात और राम मंदिर के मुद्दों के बीच क्या भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहरा पाएगी या सपा सेंध लगाएगी? आइए जानते हैं गोंडा का पूरा सियासी गणित.

गोंडा की राजनीति के दो ध्रुव

वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, गोंडा की राजनीति मुख्य रूप से दो बड़े चेहरों के इर्द-गिर्द घूमती है. एक तरफ बृजभूषण शरण सिंह और दूसरी तरफ मनकापुर राजघराने के कीर्तिवर्धन सिंह (केंद्रीय राज्य मंत्री व सांसद).

जिले की कई सीटों पर विधायकों को दोनों गुटों के बीच सामंजस्य बैठाने में सहज-असहज होना पड़ता है. स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि गोंडा में केवल जातीय समीकरण काम नहीं करता बल्कि बृजभूषण शरण सिंह का 'बूथ और चुनाव मैनेजमेंट' सबसे बड़ा कारक साबित होता है. यदि 2027 से पहले बृजभूषण सिंह सपा का दामन थामते हैं या अपने समर्थकों को निर्दलीय/विपक्ष से उतारते हैं, तो जिले का पूरा समीकरण बदल सकता है.

राम मंदिर, महंगाई और पेपर लीक का मुद्दा

पत्रकारों की राय में भाजपा के पास बूथ स्तर तक बेहद मजबूत और कैडर-बेस्ड संगठन है जो उसकी सबसे बड़ी ताकत है. हालांकि स्थानीय स्तर पर कुछ एंटी-इंकंबेंसी और मुद्दे भी हवा दे रहे हैं.

राम मंदिर में चोरी/वित्तीय अनियमितता के आरोप: पत्रकारों का कहना है कि अयोध्या से सटे गोंडा में ब्राह्मण व आम मतदाताओं के एक वर्ग में इस मुद्दे को लेकर खिन्नता है.

स्थानीय समस्याएं: यूरिया खाद की किल्लत, महंगाई, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दे युवाओं और किसानों के बीच चर्चा में हैं.

PDA समीकरण: यदि समाजवादी पार्टी कुर्मी, यादव और मुस्लिम (PDA) का मजबूत गठबंधन बनाने में सफल रहती है तो कई सीटों पर भाजपा को कड़ी टक्कर मिलेगी.

विधानसभा सीट-वार 2027 का पूरा गणित

गौरा विधानसभा: भाजपा के प्रभात वर्मा यहां से विधायक हैं. यह कुर्मी बाहुल्य क्षेत्र है. विकास कार्यों के मामले में विधायक की स्थिति मजबूत है. लेकिन यदि सपा किसी दमदार कुर्मी प्रत्याशी को उतारती है, तो मुकाबला बेहद कड़ा और फंसा हुआ हो सकता है.

मनकापुर (सुरक्षित) विधानसभा: यह क्षेत्र मनकापुर राजघराने का गढ़ माना जाता है. पत्रकारों का मानना है कि सांसद कीर्तिवर्धन सिंह की सहमति और राजघराने का आशीर्वाद जिस प्रत्याशी को मिलेगा, उसकी जीत की राह आसान होगी.

मेहनौन विधानसभा: भाजपा के विनय द्विवेदी यहां से विधायक हैं. यह क्षेत्र ब्राह्मण, कुर्मी और अल्पसंख्यक बाहुल्य है. पत्रकारों के अनुसार, क्षेत्र में जमीनी काम न होने और जनता की नाराजगी के कारण यहां भाजपा के लिए इस बार राह आसान नहीं होगी और सपा से कड़ी चुनौती मिल सकती है.

कर्नलगंज विधानसभा: भाजपा के अजय सिंह विधायक हैं. कर्नलगंज में बृजभूषण शरण सिंह और विधायक के बीच की खटास किसी से छिपी नहीं है. पत्रकारों का कहना है कि यदि बृजभूषण सिंह का समर्थन अजय सिंह को नहीं मिला या भीतरघात हुआ तो सपा (पूर्व मंत्री योगेश सिंह) के लिए यह सीट निकालने का बड़ा मौका बन सकती है.

कटरा बाजार विधानसभा: लगातार कई बार से भाजपा के बावन सिंह यहां से जीतते आ रहे हैं. लेकिन लंबे समय से एक ही विधायक होने के कारण सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकंबेंसी) और ठाकुर-ब्राह्मण के बीच चल रही राजनीतिक तल्खी से भाजपा की राह में अड़चनें आ सकती हैं.

तरबगंज विधानसभा: भाजपा के प्रेम नारायण पांडे की स्थिति बेहद मजबूत मानी जा रही है. ब्राह्मण बाहुल्य होने के साथ-साथ क्षेत्र में विकास कार्यों और सर्वसवर्ण समर्थन के चलते वे मजबूत स्थिति में हैं, बशर्ते विपक्ष कोई बेहद मजबूत क्षत्रिय प्रत्याशी न उतार दे या बृजभूषण सिंह का रुख विपरीत न हो.

गोंडा सदर विधानसभा: बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण सिंह यहां से विधायक हैं. शहरी क्षेत्र होने के कारण यूजीसी, चंदा चोरी और पेपर लीक जैसे मुद्दे यहां असर दिखा सकते हैं. इसके अलावा विधायक के क्षेत्र में कम रहने की शिकायतों पर भी सपा मुकाबला कड़ा करने की कोशिश में है. हालांकि सीट का अंतिम फैसला बृजभूषण सिंह के निजी प्रभाव और टिकट वितरण पर ही टिकेगा.

क्या रहेगा 2027 का रुझान?

गोंडा के पत्रकारों का मिला-जुला निष्कर्ष यह है कि भाजपा का मजबूत संगठन और बूथ मैनेजमेंट आज भी उसकी सबसे बड़ी पूंजी है. हालांकि 2022 की तरह सातों की सातों सीटें जीतना इस बार भाजपा के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा. प्रत्याशी चयन, भीतरघात और बृजभूषण शरण सिंह की भावी राजनीतिक भूमिका ही तय करेगी कि 2027 में गोंडा में कमल खिलेगा या साइकिल रफ्तार पकड़ेगी.