Akhilesh Yadav Birthday: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का आज यानी 1 जुलाई को जन्मदिन है. सपा चीफ के जन्मदिन पर आज हम आपको एक ऐसा किस्सा सुनाएंगे, जिसे जानने के लिए आपको पुराने वक्त में लौटना पड़ेगा. ये कहानी तब की है, जब अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद बन चुके थे.
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यह रोचक किस्सा साल 2007 का है. प्रिया सहगल ने अपनी किताब ‘द कंटेंडर्स: हू विल लीड इंडिया टुमॉरो’ में इस किस्से का जिक्र किया है. यह वही साल था जब बसपा चीफ मायावती ने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी को शिकस्त देते हुए उत्तर प्रदेश की सत्ता हासिल की थी. इसी चुनावी हार पर चर्चा के लिए समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अमर सिंह के तब दिल्ली के लोदी रोड स्थित आवास पर इकट्ठा हुआ था.
डिनर चल रहा था. अचानक अमर सिंह ने सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव से कहा कि 'नई पीढ़ी की राजनीति के लिए नई पीढ़ी के नेता की जरूरत है.'
फिर अमर सिंह ने इस बातचीत में अपनी बेटियों को शामिल किया. अमर सिंह ने अपनी एक बेटी से पूछा- वो टीवी पर कौन सा सीरियल देखती हैं? जवाब मिला 'हैना मॉन्टेना'. अमर सिंह ने मुलायम से कहा कि देखिए अखिलेश की बेटियां भी इसी उम्र की होंगी और अपने बच्चों के जरिए उन्हें पता चलता होगा कि युवा क्या देखते और क्या चाहते हैं. ऐसा कहते हुए अमर सिंह ने अखिलेश यादव को पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया.
अब जब यहां हैना मॉन्टेना सीरियल का जिक्र आ ही गया है तो इसके बारे में भी जान लीजिए. हैना मॉन्टेना असल में 2006 में आई एक टीन सिचुएशन कॉमेडी थी. अमेरिकन सिंगर मिली सायरस स्टारर इस टीवी शो में मिली स्टीवर्ट नाम की एक साधारण टीन एज लड़की फेमस पॉप सिंगर हैना मॉन्टेना के नाम से दोहरी जिंदगी जी रही होती है.
आइये फिर से आपको मूल किस्से पर ले जाते हैं. जब अमर सिंह ने अखिलेश यादव को लेकर यह प्रस्ताव मुलायम के सामने पेश किया तो सिर्फ मुलायम को छोड़ बाकी सभी राजी थे. तब मुलायम सिंह यादव ने कहा कि वह पार्टी के विचारक जनेश्वर मिश्र से इस बारे में राय लेंगे. किताब के मुताबिक जब छोटे लोहिया के नाम से मशहूर जनेश्वर मिश्र से मुलायम ने उनकी राय मांगी तो उन्होंने तुरंत हामी भर दी.
हालांकि अखिलेश सपा के यूपी अध्यक्ष 2009 में बन पाए लेकिन अमर सिंह की वो पैरवी ही थी, जिसने समाजवादी दिग्गजों के सामने अखिलेश के लिए इस रास्ते को प्रशस्त किया. अखिलेश यादव ने भी इस मौके को भरपूर भुनाया. अखिलेश ने तत्कालीन माया सरकार के खिलाफ जंग का ऐलान किया और समाजवादी पार्टी के संगठन में युवा शक्ति को अहम पदों पर बिठाया. अखिलेश के हल्ला बोल का ही नतीजा था कि 2012 के विधान सभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को बंपर जीत मिली और वह खुद 38 साल की उम्र में यूपी के सबसे युवा सीएम बन गए.
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