सपा नेता कमाल अख्तर ने सचेतक पद से दिया इस्तीफा, समझिए सांसद रुचि वीरा से विवाद और 'हार के टोटके' की इनसाइड स्टोरी

SP Leader Kamal Akhtar Resigns: समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक कमाल अख्तर ने अचानक इस्तीफा देकर यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी. जानिए रुचि वीरा विवाद, आजम खान गुट की नाराजगी, इस्तीफे के पीछे की वजह और विधानसभा चुनाव से पहले सपा की रणनीति.

SP Leader Kamal Akhtar Resigns

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कुमार अभिषेक

• 06:01 PM • 30 Jun 2026

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SP Leader Kamal Akhtar Resigns: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के भीतर से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है. विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक (Chief Whip) कमाल अख्तर ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है जिसे पार्टी हाईकमान ने स्वीकार भी कर लिया है. मुरादाबाद की तेजतर्रार सांसद रुचि वीरा के साथ हुए सीधे विवाद और संगठन में वर्चस्व की जंग के बाद कमाल अख्तर का यह कदम यूपी की सियासत में चर्चा का गर्म विषय बन गया है. इस इस्तीफे के पीछे जहां आजम खान गुट की नाराजगी को शांत करने की कोशिश देखी जा रही है. वहीं इस पद से जुड़ा एक दिलचस्प चुनावी टोटका भी सामने आया है.

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मुरादाबाद पीडीए पंचायत से शुरू हुआ विवाद

इस पूरे विवाद की स्क्रिप्ट पिछले दिनों मुरादाबाद में आयोजित हुई सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) पंचायत के दौरान लिखी गई थी. मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा ने इस पंचायत से दूरी बना ली थी और वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं. इसके बाद रुचि वीरा ने सीधे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि मुरादाबाद के पूरे जिला संगठन को एक खास नेता ने अपने कब्जे में ले रखा है और उनके (सांसद) खिलाफ लगातार माहौल बनाया जा रहा है.

जिला संगठन को बचाने के लिए दिया इस्तीफा!

हालांकि रुचि वीरा ने अपने बयानों में सीधे तौर पर कमाल अख्तर का नाम नहीं लिया था. लेकिन उनका इशारा साफ था कि जिला संगठन कमाल अख्तर के इशारों पर उनके खिलाफ काम कर रहा है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कमाल अख्तर ने जिला संगठन के पदाधिकारियों को सांसद के गुस्से और गाज गिरने से बचाने के लिए खुद को आगे कर मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया ताकि उन पर हो रहे हमले कम हो सकें.

आजम खान और रुचि वीरा के गुस्से को शांत करने की कवायद

सांसद रुचि वीरा को सपा के कद्दावर नेता आजम खान की बेहद करीबी और पसंद माना जाता है. रुचि वीरा की नाराजगी से यह सियासी संकेत जा रहा था कि मुरादाबाद मंडल में आजम खान गुट पार्टी से खफा है. ऐसे में चुनाव से ठीक पहले सपा किसी भी बड़े डैमेज से बचना चाहती थी. माना जा रहा है कि कमाल अख्तर के इस्तीफे के जरिए समाजवादी पार्टी मुरादाबाद मंडल में आजम खान और रुचि वीरा के गुस्से को ठंडा करने में कामयाब हो सकती है, जिससे संगठन की गुटबाजी कम होगी.

राजभर ने कसा था तंज

गौरतलब है कि रुचि वीरा की इस नाराजगी को सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भुनाने की कोशिश की थी. राजभर ने बयान दिया था कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है और उनका सीधा इशारा रुचि वीरा की तरफ ही था.

इस्तीफे के पीछे का दिलचस्प टोटका

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि रुचि वीरा के विवाद के अलावा कमाल अख्तर खुद भी लंबे समय से इस पद को छोड़ना चाहते थे.  इसके पीछे यूपी विधानसभा का एक दिलचस्प अंधविश्वास या 'टोटका' जुड़ा है.

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि समाजवादी पार्टी में जो भी नेता मुख्य सचेतक के पद पर रहता है वह अगला विधानसभा चुनाव हार जाता है. आगामी यूपी चुनाव के मद्देनजर कमाल अख्तर इस पद से मुक्त होना चाहते थे.

कमाल अख्तर का बयान और सपा का अगला कदम

इस पूरे घटनाक्रम पर जब कमाल अख्तर से बात की गई तो उन्होंने बेहद नपे-तुले अंदाज में कहा 'मैंने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश का पालन किया है. मैं पार्टी का एक सच्चा सिपाही हूं, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी आगे मुझे जो भी जिम्मेदारी देंगे, मैं उसका पूरी ईमानदारी से निर्वहन करूंगा.'

जातीय समीकरण साधने की तैयारी

सपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने यह निर्णय आगामी यूपी चुनाव के मद्देनजर जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए लिया है. कमाल अख्तर के इस्तीफे के बाद अब उनकी जगह पर सपा के किसी दूसरे बड़े और कद्दावर विधायक को मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिससे चुनावी समीकरणों को और मजबूत किया जा सके.