Indresh Kumar Ram Mandir Statement: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गबन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एसआईटी रिपोर्ट और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने बिना किसी का नाम लिए इशारों में राजनीतिक दलों व अखिलेश यादव को इस मुद्दे पर राजनीति न करने की सलाह दी है. इसी बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
ADVERTISEMENT
अखिलेश यादव ने SIT रिपोर्ट पर उठाए सवाल
आजमगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने कहा 'अयोध्या एक आस्था का स्थान है. केवल भारतीयों का नहीं, बल्कि दुनिया में जितने भी सनातनी हैं या हमारे भारत की संस्कृति को समझते हैं, उनके लिए श्रद्धा के भाव के साथ, धार्मिक नगरी होने की वजह से, भावनात्मक जुड़ाव रहा है.' उन्होंने आगे कहा 'सरकार को झुककर एसआईटी बनानी पड़ी. एसआईटी की रिपोर्ट किसको दी गई? यह भी एक प्रश्नचिह्न है. जो कार्रवाई हो रही है, उससे पूरे देश की जनता दुखी है और जो घटना हुई है, वह बहुत ही निंदनीय है.' सपा प्रमुख ने यह भी कहा 'हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है.' वहीं, चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने मामले में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित करने की मांग उठाई.
इंद्रेश कुमार बोले- 'राजनीतिकरण की जरूरत नहीं'
आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने कहा 'एसआईटी रिपोर्ट के बाद लगातार एक्शन हो रहे हैं और आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है. ऐसे में किसी भी राजनेता को इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की जरूरत नहीं है.' उन्होंने आगे कहा 'सरकार, राम मंदिर ट्रस्ट और पूरा समाज सजग है कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. अयोध्या की महिमा सदैव रही है और हमेशा बनी रहेगी. राजनेताओं को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, बल्कि एक श्रद्धालु के रूप में देखना चाहिए.'
VHP ने बताया क्यों दिया गया इस्तीफा
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, 'चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे देने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी और न ही हमने उन्हें ऐसा करने की सलाह दी. उन दोनों ने स्वयं नैतिक आधार पर इस्तीफा देने का निर्णय लिया, ताकि जांच की निष्पक्षता पर किसी भी प्रकार का संदेह न रहे.' उन्होंने आगे कहा 'यह एक साहसिक और नैतिक निर्णय है, जिसका हम स्वागत करते हैं. इस मामले में कहीं भी संदेह न रहे, इसलिए दोनों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दिया है.'
जांच और सियासत दोनों पर बनी हुई है नजर
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार तेज हो रही है. अलग-अलग पक्ष अपने-अपने तर्क और दावे सामने रख रहे हैं.
(आज तक के इनपुट से)
ADVERTISEMENT










