Aaj ka UP: यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' हर बार की तरह आज भी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी सियासी और सामाजिक हलचलों को लेकर हाजिर है. इस शो में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विस्तृत विश्लेषण करते हैं. आज की पहली बड़ी खबर समाजवादी पार्टी से है जहां अखिलेश यादव के बेहद करीबी मुस्लिम चेहरों में से एक और कांठ के विधायक कमाल अख्तर ने अचानक मुख्य सचेतक के पद से इस्तीफा दे दिया है. इस इस्तीफे को मुरादाबाद मंडल में मची अंदरूनी सिर फुटौव्वल और सांसद रुचिवीरा की नाराजगी को शांत करने के अखिलेश यादव के दांव के रूप में देखा जा रहा है. वहीं आज की दूसरी बड़ी खबर शामली से है जहां धर्म परिवर्तन कर मोहम्मद अली बने दवा कारोबारी के इकलौते बेटे आयुष मलिक की दोबारा मूल धर्म (सनातन धर्म) में वापसी हुई है. इस री-कन्वर्ट करने के पीछे की क्या कहानी है और कैसे उसकी काउंसिलिंग की गई, यह हमारी दूसरी बड़ी खबर है. तीसरी खबर इसी से जुड़ी हुई है कि सुरक्षा एजेंसियों को आयुष मलिक के पास से क्या संदिग्द्ध चीजें मिली थीं, जिसके कारण उस पर रेडिकलाइज होने का शक गहराया और उसके ईमेल के पासवर्ड में पीएफआई (PFI) का कोड '2047' व 'आई एम ऑन मिशन' जैसी बातें सामने आईं. आइए इन सभी खबरों को विस्तार से समझते हैं.
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कमाल अख्तर का मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा
समाजवादी पार्टी के भीतर मुरादाबाद मंडल की राजनीति में इस वक्त बड़ा भूचाल आया हुआ है. मुरादाबाद के कांठ विधानसभा क्षेत्र से विधायक और अखिलेश यादव के रणनीतिकारों में शुमार कमाल अख्तर ने अचानक मुख्य सचेतक के पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि कमाल अख्तर का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की इच्छा का सम्मान करते हुए इस्तीफा दिया है. लेकिन सियासी गलियारों में इसके मायने कुछ और ही निकाले जा रहे हैं.
यह पूरा विवाद मुरादाबाद की सांसद रुचिवीरा की नाराजगी से जुड़ा है। हाल ही में मुरादाबाद में हुए सपा के 'पीडीए (PDA) सम्मेलन' में रुचिवीरा नहीं पहुंची थीं, जिसके बाद ओम प्रकाश राजभर ने दावा कर दिया था कि शिवसेना और टीएमसी की तरह सपा भी टूटने वाली है और रुचिवीरा इसका नेतृत्व करेंगी. बताया जा रहा है कि रुचिवीरा (जो आजम खान की बेहद करीबी मानी जाती हैं) ने मुरादाबाद संगठन में अपनी उपेक्षा का पूरा ठीकरा कमाल अख्तर के मत्थे फोड़ा था। उनका मानना था कि पूरा स्थानीय संगठन कमाल अख्तर के इशारे पर चलता है और उनकी कोई सुनवाई नहीं होती. मुरादाबाद मंडल सपा का एक मजबूत गढ़ है, जहां मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है। अखिलेश यादव इस मजबूत गढ़ में कोई अंतर्कलह नहीं चाहते थे. इसलिए आजम खान के गुट और रुचिवीरा के गुस्से को शांत करने के लिए कमाल अख्तर का इस्तीफा लिया गया है. माना जा रहा है कि इस पद पर अब किसी दूसरे मुस्लिम चेहरे को जगह दी जाएगी.
मोहम्मद अली से फिर 'आयुष मलिक' बना शामली का लड़का
शामली से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया था, जहां इलाके के सबसे बड़े दवा कारोबारी का इकलौता बेटा आयुष मलिक धर्म परिवर्तन कर 'मोहम्मद अली' बन गया था. इस बकरीद पर जब उसकी लंबी दाढ़ी और नमाज पढ़ते हुए तस्वीर वायरल हुई तो पूरे क्षेत्र में हंगामा मच गया. परिवार का आरोप है कि सैकड़ों करोड़ की प्रॉपर्टी हड़पने के लिए चांदनी कुरैशी नाम की लड़की और उसके पिता ने मिलकर साजिश रची, आयुष को मौलाना इसरार अहमद के वीडियो लिंक्स भेजे और दिल्ली की एक मस्जिद में गुपचुप शादी कर ली. इसके बाद लड़की पक्ष ने आयुष के पिता पर जायदाद बेटे के नाम करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया.
इसके बाद परिवार और इलाके में हिंदुओं की लड़ाई लड़ने वाले संगठन के यशवीर महाराज ने आयुष को वापस लाने की मुहिम शुरू की. आयुष को एकांत में रखकर कई दिनों तक लगातार काउंसिलिंग की गई. उसे गीता और रामायण की चुनिंदा शिक्षाएं दी गईं. परिवार और यशवीर महाराज का दावा है कि इस चिंतन के बाद आयुष ने खुद ही अपनी दाढ़ी कटवाई और सनातन धर्म में वापसी का फैसला किया. सोशल मीडिया पर आए वीडियो में वह घर में पूजा-पाठ करते, दादी से आशीर्वाद लेते और पिता के हाथों प्रसाद खाते दिख रहा है. फिलहाल आयुष डेढ़ हफ्ते के लिए मौन व्रत पर है और अपनी बहन के घर पर है.
सुरक्षा एजेंसियों का शक; ईमेल पासवर्ड में 'PFI कोड 2047' और 'आई एम ऑन मिशन' का क्या है राज?
आयुष मलिक के इस धर्म परिवर्तन और दोबारा मूल धर्म में लौटने के मामले में एक बड़ा और गंभीर खुलासा सुरक्षा एजेंसियों की जांच में हुआ है. यही कारण है कि इसे सिर्फ एक सामान्य धर्मांतरण नहीं बल्कि डीरेडिकलाइजेशन का मामला माना जा रहा है. जब आयुष ने इस्लाम कुबूल किया था, तब सुरक्षा एजेंसियों को उसकी कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी.
जांच में सामने आया कि आयुष ने अपने ईमेल का पासवर्ड प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (PFI) के कोड '2047' पर बना रखा था. इतना ही नहीं उसने अपने ईमेल के आखिर में 'I am on mission' (मैं एक मिशन पर हूँ) शब्द भी लिखे थे. इन सब जानकारियों के बाद सुरक्षा एजेंसियों को शक था कि वह केवल धर्म परिवर्तन ही नहीं कर रहा था, बल्कि धीरे-धीरे रेडिकलाइज भी हो रहा था. यही वजह है कि उसे वापस सामान्य स्थिति में लाने और उसकी काउंसिलिंग करने में लंबा वक्त लगा. अब सभी को इंतजार है कि जब आयुष मलिक का मौन व्रत टूटेगा और वह मीडिया के सामने आएगा तो वह इस पूरे घटनाक्रम पर क्या बयान देता है.
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