पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत ने यूपी का सियासी पारा बढ़ा दिया है. बीजेपी की इस अप्रत्याशित जीत से समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के मनोबल को गहरा झटका लगा है. सपा नेताओं को बंगाल की हार ने एक सीधा संदेश दिया है कि अगले साल होने वाला यूपी विधानसभा चुनाव उनके लिए आसान नहीं होने वाला. इसी बौखलाहट के चलते सपा के कार्यकर्ता बदजुबानी पर उतर आए हैं. उनके नेता पीएम मोदी को खुले मंच से गाली दे रहे हैं. जाति को लेकर नफरती बयान दे रहे हैं और उनके बेअंदाज होने का आलम यहां तक पहुंच गया है कि खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपनी पार्टी और नेताओं पर से अपना कंट्रोल खो रहे हैं.
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अजेंद्र सिंह लोधी की आपत्तिजनक टिप्पणी
हाल में हमीरपुर-महोबा से समाजवादी पार्टी सांसद अजेंद्र सिंह लोधी ने एक मीडिया बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए खुलेतौर पर गाली का इस्तेमाल किया. लोकतंत्र में आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन जब भाषा गाली और व्यक्तिगत अपमान में बदल जाए, तो मामला केवल राजनीतिक विरोध का नहीं रह जाता. ये सीधे तौर पर खीझ को दर्शाता है. ये बौखलाहट दिखाती है.
ब्राह्मणों पर भाटी के बयान से बवाल
लोधी के बयान से उपजा विवाद का मामला सिमटा भी नहीं था कि सपा नेता राजकुमार भाटी के बयान ने बवाल पैदा कर दिया. एक सार्वजनिक मंच से भाटी ने ब्राह्मणों को लेकर जिस तरह की बयानबाजी की उसका मकसद सिर्फ और सिर्फ समाज में खाई को बढ़ाने और जातीय हिंसा में समाज को धकेलना था. हालांकि भाटी ने बाद में इस पर सफाई भी मांग ली थी.
जाट-गुर्जर समुदाय पर भी विवादित बोल
सफाई के ठीक बाद भाटी का एक और बयान वायरल हो गया जो जाट और गुर्जर समुदाय के लिए अपमानजनक था. भाटी ने कहा कि केवल जाट और गुर्जर समुदाय ही ऐसे होते हैं जिनमें एक पत्नी के कई पति होते हैं. भाटी के बयान के बाद उनका व्यापक विरोध शुरू हो गया.
इंडी गठबंधन के अंदर भी विरोध
भाटी के बयान का असर ये हुआ समाजवादी पार्टी की इंडी गठबंधन में सहयोगी कांग्रेस ने भी अखिलेश यादव को घेरना शुरू कर दिया है. यूपी कांग्रेस चीफ अजय राय ने ब्राह्मणों के अपमान के मुद्दे पर भाटी को पार्टी ने निष्कासित कर देना चाहिए. सहयोगी दल की तरफ से सपा के लिए आई ये तीखी टिप्पणी सपा के लिए बेहद गंभीर है.
मारपीट तक उतरे सपा नेता
सपा नेताओं की आक्रामकता केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रही. अब इस कदर अधीर हो गए हैं की उनके नेता मारपीट तक पर उतर आए हैं. मऊ में सपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा महिला कार्यकर्ताओं के साथ जैसा अशालीन व्यवहार किया वो इसका ताजा उदाहरण है. इसी तरह मेमू ट्रेन उद्घाटन कार्यक्रम में सपा सांसद राजीव राय द्वारा बीजेपी नेता एके शर्मा को 'गुंडई को जेब में रखने की बात कहना' अंगुली दिखाकर चुनौती देना और बाद में “कार्यकर्ताओं को हाथ लगाने” पर परिणाम भुगतने की चेतावनी देना उदाहरण है की सपा अब माहौल बिगाड़ने की फिराक में है.
प्राण सिंह यादव की आपत्तिजनक टिप्पणी
कहानी यहीं नहीं रुकती है. महोबा के सपा नेता प्राण सिंह यादव ने एक प्रदर्शन के दौरान फिर आपत्तिजनक टिप्पणी की. प्राण सिंह की टिप्पणी ऐसी है कि उसे लिखा भी नहीं जा सका.
गौर करने वाली बात है कि पश्चिम बंगाल चुनावों के नजदीक आईं सपा नेताओं की टिप्पणियां यह भी इशारा करती हैं कि अखिलेश यादव अपनी पार्टी पर नियंत्रण खो रहे हैं. दरअसल समाजवादी पार्टी पिछले कुछ वर्षों में अपनी छवि बदलने का दावा करती रही है. वो संविधान, सद्भावना और सामाजिक तानेबाने की बड़ी बड़ी बातें करती है लेकिन पार्टी के नेताओं, प्रवक्ताओं और कार्यकर्ताओं की हालिया गतिविधियां साबित करती हैं की सपा अब भी वही पुराना राजनीतिक संस्कार अपने भीतर पाले हुए है. अखिलेश चाहकर भी पार्टी के उस ‘डीएनए’ को नहीं बदल पा रहे हैं.
लेखक: डॉ. शब्द प्रकाश (लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर लेखन करते हैं.)
(Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.)
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