Lucknow Crime News: लखनऊ का गोमती नगर रेलवे स्टेशन. प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन के पहिये थम चुके थे. छपरा से चलकर लखनऊ तक का लंबा सफर तय करने वाली इस पैसेंजर ट्रेन के अधिकांश यात्री अपने-अपने गंतव्य की ओर जा चुके थे. बोगियां खाली हो चुकी थीं और स्टेशन पर एक अजीब सा मुसाफिरों का सन्नाटा पसर गया था. तभी रेलवे के सफाई कर्मचारियों का एक दस्ता रूटीन चेकिंग और सफाई के लिए ट्रेन के स्लीपर कोच S1 के भीतर दाखिल हुआ.
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बोगी के भीतर बिखरे हुए अखबार के पन्ने, खाली बोतलें और मूंगफली के छिलके पड़े थे. लेकिन सीट नंबर के नीचे छिपी एक चीज ने सफाई कर्मचारी का ध्यान अपनी ओर खींचा. वहां एक लावारिस, भारी-भरकम टीन का बक्सा रखा हुआ था. उसके ठीक बगल में एक लावारिस बैग भी लावारिस हालत में पड़ा था. शुरुआत में इसे किसी यात्री का भूला हुआ सामान समझकर हटाने की कोशिश की गई, लेकिन बक्से का असामान्य वजन और उससे उठने वाली एक बेहद हल्की, मगर अजीब सी गंध ने सफाईकर्मी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दीं.
पॉलीथिन के अंदर क्या मिला?
बिना देर किए जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) को सूचना दी गई. कुछ ही मिनटों में जीआरपी की टीम बोगी के भीतर थी. बक्से के भारी ताले को जब लोहे के औजार से तोड़ा गया, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के पैरों तले जमीन खिसक गई. बक्से के भीतर का नजारा किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी था. बक्से के अंदर एक महिला का धड़ पड़ा हुआ था, जिसका सिर गायब था. धड़ पर सिला हुआ सलवार-सूट इस बात की गवाही दे रहा था कि वह एक महिला की लाश है. खौफ का मंजर यहीं खत्म नहीं हुआ. जब पास रखे बैग की जिप खोली गई, तो उसके भीतर अलग-अलग रंग की पॉलीथिन मिलीं. उन पॉलीथिन को खोलने पर पता चला कि हत्यारे ने महिला के हाथ और पैर काटकर अलग-अलग थैलियों में पैक करके वहां छुपाए थे.
एक सुनियोजित कत्ल और रेलवे एसपी का बयान
वारदात की सूचना आग की तरह फैली और देखते ही देखते रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए. रेलवे एसपी रोहित मिश्रा अपनी टीम के साथ S1 कोच के भीतर दाखिल हुए. क्राइम सीन का बारीकी से मुआयना करने के बाद उन्होंने फोरेंसिक टीम को साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए.
रेलवे एसपी रोहित मिश्रा के मुताबिक, मृतका की उम्र लगभग 25 से 30 वर्ष के बीच लग रही है. शव की इस वीभत्स हालत को देखकर पुलिस के आला अधिकारी भी हैरान थे. कत्ल के इस तरीके ने साफ कर दिया कि यह कोई अचानक उपजे गुस्से का नतीजा नहीं था. हत्यारे ने बेहद ठंडे दिमाग से और सुनियोजित तरीके से इस पूरी वारदात को अंजाम दिया था. महिला के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले हैं, जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मौत से पहले उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी या उसने खुद को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था.
क्राइम एक्सपर्ट्स और फॉरेंसिक टीम की शुरुआती जांच में यह आशंका जताई गई है कि महिला की हत्या गोमती नगर स्टेशन पर या चलती ट्रेन में नहीं की गई. हत्यारे ने वारदात को किसी अन्य गुप्त स्थान पर अंजाम दिया. वहां बेहद धारदार हथियार का इस्तेमाल करके शव को टुकड़ों में काटा गया, उसे बक्से और बैग में भरा गया और फिर केवल पहचान छिपाने के मकसद से शव को इस ट्रेन में रख दिया गया. हत्यारे का सबसे बड़ा मकसद यह था कि लाश अपने गृह जनपद या कत्लगाह से कोसों दूर किसी अनजान शहर में जाकर लावारिस हालत में मिले, जिससे पुलिस कभी उस तक न पहुंच सके.
छह स्टेशन और मिस्ट्री की सबसे अहम कड़ी
जांच के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही था कि आखिर यह भारी-भरकम टीन का बक्सा और बैग ट्रेन में कब, कहां और किस स्टेशन पर चढ़ाया गया? छपरा से चलकर लखनऊ के गोमती नगर तक पहुंचने वाली इस ट्रेन के मार्ग को खंगालना शुरू किया गया.
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, छपरा से गोमती नगर के बीच लगभग 20 स्टेशन आते हैं. लेकिन पुलिस की तफ्तीश के मुताबिक, इस पूरी मिस्ट्री की सबसे अहम कड़ी वो छह स्टेशन हैं, जहाँ ट्रेन का ठहराव ज्यादा देर के लिए होता है या जहाँ की परिस्थितियां अपराधी के अनुकूल हो सकती थीं. पुलिस की तीन टीमें अब इन छह मुख्य स्टेशनों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं:
- छपरा कचहरी और छपरा जंक्शन: जहां से यह ट्रेन शाम करीब पौने सात बजे रवाना होती है. क्या शुरुआत में ही इस बक्से को बोगी में डाल दिया गया था? पुलिस शुरुआती पॉइंट की गतिविधियों को खंगाल रही है.
- थावे स्टेशन: शक की सबसे गहरी सुई इस स्टेशन पर टिक रही है. यहाँ यह ट्रेन करीब 30 मिनट यानी आधे घंटे तक खड़ी रहती है. लंबा ठहराव होने की वजह से किसी भी संदिग्ध के लिए इतने भारी बक्से और बैग को स्लीपर कोच के भीतर लाकर सीट के नीचे सेट करना अपेक्षाकृत बेहद आसान हो सकता है.
- कप्तानगंज स्टेशन: यह उत्तर प्रदेश का स्टेशन है, जहां ट्रेन रात के करीब 12 बजे पहुंचती है. यहां ट्रेन का ठहराव महज पांच मिनट का है, लेकिन आधी रात का समय होने के कारण स्टेशन पर निगरानी और सुरक्षा तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर हो सकता है. पुलिस इस समय की सीसीटीवी फुटेज को खंगालने में जुटी है.
- गोरखपुर रेलवे स्टेशन: जांच एजेंसियां इस बड़े जंक्शन को बेहद महत्वपूर्ण मान रही हैं. ट्रेन यहां रात के करीब 1 बजकर 25 मिनट पर पहुंचती है और लगभग 10 मिनट तक रुकती है. गोरखपुर एक बहुत बड़ा और व्यस्त जंक्शन है, जहाँ चौबीसों घंटे यात्रियों की भारी आवाजाही रहती है. पुलिस को अंदेशा है कि हत्यारे ने इसी भारी भीड़ और अफरा-तफरी का फायदा उठाकर बक्से को S1 कोच में प्लांट किया होगा.
- गोंडा स्टेशन: यह स्टेशन भी पुलिस की रडार पर है. यहां ट्रेन तड़के सुबह करीब चार बजे पहुंचती है और पांच मिनट के लिए रुकती है. सुबह के इस वक्त का फायदा भी अपराधी उठा सकता था.
इन सभी स्टेशनों और इनके बीच पड़ने वाले छोटे स्टेशनों की हर एक गतिविधि, टिकट बुकिंग काउंटर और प्लेटफार्म के एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स को खंगाला जा रहा है.
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