Sitapur Land Dispute: सीतापुर में नजूल भूमि मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ब्रदर्स बंधुओं के आवासों पर डीएम कोर्ट का सार्वजनिक नोटिस चस्पा कराया. डीएम ने विवादित सरकारी जमीनों की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री पर रोक लगाते हुए अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं.
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जिले में चर्चित नजूल भूमि मामले में प्रशासन ने कार्रवाई और तेज कर दी है. डीएम कोर्ट से जारी सार्वजनिक नोटिस को सोमवार शाम यानी 18 मई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम सदर जनार्दन कुमार की मौजूदगी में ब्रदर्स बंधुओं के आवासों पर चस्पा कराया गया. प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर नोटिस तामील कराई, जिसके बाद इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया. डीएम राजागणपति के सख्त रवैये ने साफ संकेत दे दिया है कि अब सरकारी जमीन पर साम्राज्य" चलाने वालों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है.
सीतापुर में अब सत्ता नहीं, कानून का बुलडोजर चल रहा है. जिन लोगों ने वर्षों तक दबंगई को अपनी ताकत समझकर सरकारी जमीनों पर कब्जे का साम्राज्य खड़ा किया, अब उन्हीं की नींव प्रशासन हिला रहा है. डीएम राजागणपति का संदेश बिल्कुल साफ है चाहे रसूख कितना भी बड़ा हो, सरकारी जमीन पर कब्जे का हिसाब अब हर हाल में होगा और अगला नंबर किसका होगा, यही सवाल पूरे शहर में गूंज रहा है. छावनी कदीम, खैराबाद स्थित करोड़ों रुपये कीमत की नजूल भूमि को लेकर जिलाधिकारी न्यायालय से जारी सार्वजनिक नोटिस ने भू-माफिया नेटवर्क में हड़कंप मचा दिया है.
मामले को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी राजागणपति आर. ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा कदम उठाया है. डीएम ने उप जिलाधिकारी सदर, तहसीलदार, नगर पालिका परिषद और उप-निबंधक कार्यालय को निर्देश जारी कर संबंधित नजूल भूमि के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण, नई रजिस्ट्री, बंधक, उपहार या दाखिल-खारिज प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. आदेश के बाद भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारकों में हड़कंप मच गया है. प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने तक जमीन से जुड़ा कोई भी लेन-देन मान्य नहीं होगा.
प्रशासन ने साफ कहा है कि नजूल भूखण्ड संख्या 1692, 1693/1 और 1693/2 मूल रूप से सरकारी संपत्ति हैं और इन पर वर्षों से नियमों के विपरीत कब्जा और निर्माण किए गए. जांच में सामने आया कि जिन जमीनों को कभी बाग, तालाब और सार्वजनिक उपयोग के लिये पट्टे पर दिया गया था, वहां अब अवैध निर्माणों का जाल बिछ चुका है. इतना ही नहीं, वर्ष 2006 में हुए कथित बैनामों को भी प्रशासन ने नियमों के विपरीत मानते हुए कठघरे में खड़ा कर दिया है.
डीएम कोर्ट के नोटिस में साफ संकेत है कि अब न सिर्फ पट्टे निरस्त किए जाएंगे, बल्कि पूरी जमीन को सरकार अपने कब्जे में लेकर वहां वेंडिंग जोन और जनहित परियोजनाएं विकसित करेगी. प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि अवैध कब्जे और निर्माण हटाने की कार्रवाई बिना किसी क्षतिपूर्ति के की जा सकती है. शहर में चर्चा है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है. प्रशासन धीरे-धीरे उन तमाम संपत्तियों और कब्जों का रिकॉर्ड खंगाल रहा है.
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