Sitapur Viral Video Case: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के परसेंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक वायरल वीडियो ने तूल पकड़ा जब यह आरोप लगा कि एक डॉक्टर, डॉ. विनोद कुमार, शराब के नशे में मरीजों का इलाज कर रहे थे. वीडियो में डॉक्टर को नशे में धुत्त अवस्था में इलाज करते हुए दिखाया गया था, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इस घटना ने न केवल जिले के स्वास्थ्य विभाग को शर्मसार किया बल्कि पूरे राज्य में इसके खिलाफ हंगामा भी मच गया. आरोपों के बीच सीतापुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने जांच की और डॉक्टर को क्लीन चिट दे दी है, जो एक नया मोड़ इस विवाद में आया है.
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क्या है पूरा मामला?
यह घटना तब सामने आई, जब एक मरीज की हालत बिगड़ने पर उनके परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और 1076 हेल्पलाइन पर शिकायत की. इसके बाद 112 पुलिस को बुलाया गया, जिसने मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर दिया. इस दौरान एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें डॉ. विनोद कुमार नशे में दिख रहे थे और मरीजों का इलाज कर रहे थे. वीडियो में डॉक्टर का व्यवहार असामान्य था, जो तुरंत विवाद का कारण बना. वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर इस घटना की आलोचना शुरू हो गई और कई लोग डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे.
जांच और सीएमओ की रिपोर्ट
इस पूरे मामले की जांच सीतापुर के CMO, सुरेश कुमार द्वारा की गई. सीएमओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया कि डॉक्टर विनोद कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से गलत थे. उन्होंने कहा कि डॉक्टर का आवास अस्पताल के परिसर में ही था और वह केवल कुछ जरूरी काम के सिलसिले में इमरजेंसी में अस्पताल में गए थे. सीएमओ ने यह भी बताया कि डॉक्टर ने किसी मरीज का इलाज नहीं किया था और इस घटना में उनका कोई दोष नहीं पाया गया.
सीएमओ जांच में नशे के आरोप खारिज, कोई कार्रवाई नहीं
सीएमओ की जांच रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि डॉक्टर ने नशे की स्थिति में किसी भी मरीज का इलाज नहीं किया था. इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो में डॉक्टर के व्यवहार को गलत तरीके से पेश किया गया था और कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की आवश्यकता नहीं थी. सीएमओ के इस बयान के बाद, जिले के जिलाधिकारी राजा गणपति आर ने पुष्टि की कि डॉक्टर को क्लीन चिट दे दी गई है और किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है.
सीएमओ की क्लीन चिट से असंतुष्ट परिजन
हालांकि CMO द्वारा दी गई क्लीन चिट के बाद भी मरीजों के परिवार इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं. परिवार के सदस्य अब भी अपनी शिकायतों पर अड़े हुए हैं और उनके अनुसार जांच निष्पक्ष नहीं रही. उन्होंने दावा किया कि वीडियो में जो कुछ भी देखा गया वह सच है और डॉक्टर पर कार्रवाई होनी चाहिए. वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अगर जांच सही तरीके से की जाती तो न केवल डॉक्टर पर बल्कि अस्पताल के अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाती. परिजनों का कहना है कि सीएमओ का यह बयान न्याय का अपमान है क्योंकि उन्होंने वीडियो के वायरल होने के बाद भी दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया. उनके अनुसार, सीएमओ ने केवल एक पक्ष की बात सुनी और मामला ठंडा करने की कोशिश की.
जांच की निष्पक्षता पर सवाल
अब सवाल यह उठता है कि क्या जांच पूरी तरह से निष्पक्ष थी? कई लोग इसे सरकारी तंत्र की तरफ से एक ढिलाई और मिलीभगत का उदाहरण मान रहे हैं. अगर जांच सही तरीके से की जाती तो न केवल डॉ. विनोद कुमार के खिलाफ कार्रवाई की जाती, बल्कि अस्पताल प्रशासन और वहां के अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती जो इस घटना के जिम्मेदार हो सकते थे. दूसरी ओर, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है और दोषी पाए जाने पर ही डॉक्टर को क्लीन चिट दी गई है. ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि सीएमओ द्वारा दी गई क्लीन चिट पूरी तरह से सही है या नहीं.
क्लीन चिट के बावजूद जांच जारी, डीएम ने दिए कार्रवाई के संकेत
सीतापुर के जिलाधिकारी राजा गणपति आर ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सीएमओ ने अपनी जांच पूरी की और डॉक्टर को क्लीन चिट दे दी है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो के आधार पर जो कुछ भी छुपाया गया है उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. उनका यह बयान इस ओर इशारा करता है कि जांच पूरी होने के बाद भी प्रशासन मामले को हल्के में नहीं लेगा और जो भी आरोप सही पाए जाएंगे, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.
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