Aditya Pratap Singh Murder Case: उत्तर प्रदेश के रायबरेली के चर्चित आदित्य प्रताप सिंह हत्याकांड में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. 18 अगस्त 2026 को जिला जज ने सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और सदर प्रत्याशी आरपी यादव, ढाबा संचालक सुरेश यादव समेत 14 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दो आरोपियों को बरी कर दिया गया. फैसला सामने आने के बाद आरपी यादव के समर्थक जेल के बाहर जुटे और नारेबाजी की.
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सोमू ढाबे में विवाद के बाद शुरू हुआ मामला
मामला 9 अक्टूबर 2019 का है. सिकन्दरपुर निवासी आदित्य प्रताप सिंह रतापुर चौराहे के पास स्थित सोमू ढाबे पर खाना खाने गए थे. यहां भोजन के भुगतान को लेकर ढाबा संचालक सुरेश यादव से उनका विवाद हो गया. आरोप था कि सुरेश और उसके साथियों ने आदित्य और उनके दोस्तों के साथ मारपीट की. इसके बाद जब आदित्य घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में हमलावरों ने उन पर हमला कर उनकी हत्या कर दी.
अगले दिन पुलिया के पास मिला था शव
वारदात के अगले दिन 10 अक्टूबर 2019 को गढ़ी गांव के पास एक पुलिया के किनारे आदित्य प्रताप सिंह का शव बरामद हुआ था. मामले में पोस्टमार्टम कराया गया और 25 दिसंबर 2019 को पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद 20 जनवरी 2020 से अदालत में सुनवाई शुरू हुई. करीब आठ साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई.
आरोपी सुरेश यादव के ढाबे पर चला था बुलडोजर
मामले की जांच और कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने भी सख्ती दिखाई थी. तत्कालीन जिलाधिकारी नेहा शर्मा के आदेश पर आरोपी सुरेश यादव की अवैध जमीन पर बने ढाबे को बुलडोजर से गिराया गया था. इसके अलावा आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई के लिए गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्की के आदेश भी दिए गए थे. यह कार्रवाई प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में की गई थी.
परिवार ने जताई खुशी
फैसले के बाद आदित्य की बहन रुचि सिंह ने संतोष जताया, लेकिन बरी किए गए आरोपियों से परिवार को खतरा बताते हुए हाई कोर्ट जाने की बात कही. शासकीय अधिवक्ता विवेक सिंह राठौड़ ने कहा कि 'कठिन परिश्रम के बाद 14 लोगों को सजा दिलाई गई है.' वहीं उम्रकैद की सजा पाए आरपी यादव ने फैसले को चुनौती देने और हाई कोर्ट जाने की बात कही है.
इन 14 दोषियों को मिली उम्रकैद
अदालत ने सुरेश यादव, विनोद कुमार, राम सुमेर, जयचंद्र, सौरभ शर्मा, मानू, आरपी यादव, रमेश यादव, अंकित यादव, हर्षित यादव, लव कुश कुमार, गया बक्श सिंह, अतुल तिवारी और सचिन कुमार सोनी को उम्रकैद की सजा सुनाई. वहीं, साक्ष्यों के अभाव में अभीतेज सिंह और रामकृष्ण यादव को बरी कर दिया गया. फैसले के बाद मामले को लेकर रायबरेली में सियासी चर्चाएं भी तेज हो गई हैं.
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