Firozabad News: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद कस्बे में बीते 30 मई को एक बच्चे की जमीन पर पटक-पटक कर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस खौफनाक मामले में कोर्ट ने 10 जुलाई को बदायूं के रहने वाले दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मौत की सजा सुनाई है. इस समय दोषी जितेंद्र फिरोजाबाद की जिला जेल में बंद है. जेल में आने के बाद इस कैदी का व्यवहार कैसा है, उसकी सुरक्षा कैसे की जा रही है और वह किस मानसिक स्थिति में है, इस बारे में जेल अधीक्षक अमित चौधरी ने बहुत कुछ बताया है.
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कैदी की कड़ी सुरक्षा और निगरानी
जेल अधीक्षक अमित चौधरी ने बताया कि जिस कैदी को मौत की सजा या कैपिटल पनिशमेंट मिलती है, उसकी जेल स्तर पर विशेष निगरानी की जाती है. जितेंद्र पाठक की सुरक्षा के लिए दो सिपाहियों को तैनात किया गया है, जो चौबीसों घंटे उस पर नजर रखते हैं. इसके साथ ही बैरक में लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी उसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. सुरक्षा के ये पुख्ता इंतजाम इसलिए किए गए हैं ताकि वह मानसिक अवसाद के कारण खुद को कोई नुकसान न पहुंचाए और जेल का कोई नियम न तोड़े.
बार-बार गलती मान रहा है कैदी
जेल अधीक्षक के मुताबिक, जितेंद्र पाठक के हाव-भाव में पिछले दो दिनों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है. वह इस समय मिले-जुले भावों से गुजर रहा है. सजा मिलने के शुरुआती एक-दो दिन उसने ठीक से खाना भी नहीं खाया था. वह कई बार बेहद उदास और अवसाद जैसी स्थिति में चला जाता है, जिसके लिए जेल प्रशासन उसकी काउंसलिंग भी करवा रहा है. जब भी जेल अधिकारी राउंड के दौरान उसके पास जाते हैं, तो वह खुद से बार-बार सिर्फ यही एक बात बोलता है कि 'हमसे गलती हुई है'.
कानूनी रास्ते और परिजनों की दूरी
जेल प्रशासन ने साफ किया कि सजा सुनाए जाने के बाद से आज तक जितेंद्र पाठक से मुलाकात करने उसका कोई भी परिजन या रिश्तेदार जेल नहीं आया है. वहीं, उसे मेंटली इल (मानसिक रूप से बीमार) घोषित किए जाने जैसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि, मौत की सजा मिलने के बाद भी उसके पास अभी आगे के कानूनी रास्ते खुले हुए हैं. वह फैसले के खिलाफ 30 दिनों के अंदर हाई कोर्ट में अपील दायर कर सकता है. वहां से याचिका खारिज होने पर वह सुप्रीम कोर्ट जा सकता है और फिर राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाने का विकल्प भी बचेगा.
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