Firozabad Aarav Murder Case: फिरोजाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है. करीब डेढ़ महीने तक चली सुनवाई के बाद 9 जुलाई को आरोपी को दोषी करार दिया गया था, जिसके बाद 10 जुलाई को अदालत ने उसे मृत्युदंड की सजा दी. यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. बताया जा रहा है कि कोर्ट में सजा सुनाए जाने के दौरान आरोपी ने खुद को थप्पड़ मारा. जहां पीड़ित परिवार ने फैसले पर राहत जताई है, वहीं आरोपी के परिवार ने इसे एकतरफा बताते हुए उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही है.
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मामले के मुताबिक, आरोपी विराज ने डेढ़ साल के मासूम आरव को उसकी मां से अलग कर सड़क पर पटक-पटककर मौत के घाट उतार दिया था. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बच्चे की मां से शादी करना चाहता था, लेकिन बच्चे को रास्ते की रुकावट मानता था. इसी वजह से उसने वारदात को अंजाम दिया. घटना के बाद पुलिस ने तेजी से जांच पूरी करते हुए महज 6 दिन में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी, जिसमें सीसीटीवी फुटेज समेत कई अहम सबूत और गवाह शामिल थे. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए यह सख्त फैसला सुनाया.
फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष जताया, जबकि आरोपी पक्ष ने फैसले पर सवाल उठाए हैं. आरोपी के परिवार का कहना है कि मामले में मोबाइल जांच समेत अन्य पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए और किसी संभावित मास्टरमाइंड की भूमिका सामने आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्हें उचित न्याय नहीं मिला है और वे इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालयों में अपील करेंगे. वहीं, यह मामला न्याय व्यवस्था में त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील मामलों में प्रभावी सुनवाई के उदाहरण के तौर पर भी देखा जा रहा है, साथ ही इसने बच्चों की सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है.
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