इटावा में स्वास्थ्य विभाग के अंदर फैले भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा! 55000 रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए एसीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव, फिर जो हुआ वो चौंका देगा

Etawah corruption case: इटावा में स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव को कानपुर विजिलेंस टीम ने ₹55,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया. यह रिश्वत डायग्नोस्टिक सेंटर के रजिस्ट्रेशन के लिए ली जा रही थी.

यूपी तक

• 01:25 PM • 11 Jun 2026

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Etawah corruption case: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कानपुर विजिलेंस की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया. अमूमन लोगों की सेहत का ध्यान रखने वाले स्वास्थ्य विभाग के ही एक बड़े अधिकारी खुद अपनी जेब का ध्यान रखने में ज्यादा व्यस्त दिखाई दिए. मामला इटावा जिले का है, जहां स्वास्थ्य विभाग के रजिस्ट्रेशन प्रभारी और एसीएमओ (ACMO) डॉ. श्रीनिवास यादव को विजिलेंस की टीम ने ₹55,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है. इस कार्रवाई के बाद से पूरे प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची हुई है और सरकारी दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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डायग्नोस्टिक सेंटर के रजिस्ट्रेशन के नाम पर मांगी ₹1.5 लाख की घूस

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब एक स्थानीय व्यक्ति ने जिले में 'श्रीजी डायग्नोस्टिक सेंटर' खोलने के लिए स्वास्थ्य विभाग में आवेदन किया था. शिकायतकर्ता को उम्मीद थी कि उसके सभी नियम और कागजात पूरे हैं, तो उसे आसानी से अनुमति मिल जाएगी. लेकिन रजिस्ट्रेशन प्रभारी डॉ. श्रीनिवास यादव ने सेंटर के रजिस्ट्रेशन और अनुमति देने के एवज में कथित तौर पर पूरे ₹1.5 लाख की मोटी रकम की मांग कर दी. एक तरफ जहां सरकार आम जनता तक बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर नया सेंटर खोलने से पहले ही आवेदकों की जेब का 'एक्सरे' करने की तैयारी कर ली जाती है.

₹1 लाख की पहली किश्त देने के बाद भी बनाया जा रहा था दबाव

शिकायतकर्ता के मुताबिक, वह अधिकारी के भारी दबाव में आकर पहले ही ₹1 लाख की रकम रिश्वत के तौर पर दे चुका था. यानी काम का रेट पूरी तरह फिक्स था. लेकिन ₹1 लाख ऐंठने के बाद भी डॉक्टर साहब का पेट नहीं भरा और वे बाकी बची रकम के लिए शिकायतकर्ता पर लगातार मानसिक दबाव बनाने लगे. बार-बार पैसे मांगे जाने से परेशान होकर पीड़ित ने सोचा कि अगर वह इसी तरह पैसे देता रहा, तो डायग्नोस्टिक सेंटर शुरू होने से पहले ही वह खुद कर्ज के दलदल में फंसकर मरीज बन जाएगा. इसके बाद उसने हार मानने के बजाय सीधे कानपुर विजिलेंस विभाग से संपर्क किया और मामले की लिखित शिकायत दर्ज करा दी.

विजिलेंस टीम ने बिछाया जाल और रंगे हाथों दबोचे गए 'साहब'


शिकायत मिलने के बाद कानपुर विजिलेंस की टीम ने पूरी सतर्कता बरतते हुए अपना होमवर्क किया. टीम ने सबसे पहले शिकायत की गोपनीय जांच की, जरूरी सबूत जुटाए और फिर आरोपी अधिकारी को पकड़ने के लिए एक पुख्ता जाल बिछाया. पूरी योजना के मुताबिक, जैसे ही शिकायतकर्ता डॉ. श्रीनिवास यादव को रिश्वत की बाकी बची रकम के ₹55,000 देने पहुंचा और डॉक्टर साहब ने पैसे हाथ में लिए, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठी विजिलेंस की टीम ने मौके पर धावा बोल दिया. टीम ने एसीएमओ को रंगे हाथों धर दबोचा और उनके पास से रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली. जिस हाथ से डॉक्टर साहब नोट गिनने की तैयारी कर रहे थे, उसी हाथ में अब कानून की गिरफ्त थी.

स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप, अब पूरी 'भ्रष्टाचार चेन' की होगी जांच

एसीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव की गिरफ्तारी की खबर जंगल में आग की तरह फैलते ही पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया. जो लोग अब तक व्यवस्था को अपने हिसाब से चला रहे थे, उन्हें समझ आ गया कि कानून का डंडा कभी भी चल सकता है. फिलहाल आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है और उन्हें जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा. अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह वसूली सिर्फ एक व्यक्ति का खेल था या फिर इसमें विभाग के कुछ और बड़े नाम भी शामिल हैं, क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों की जड़ें काफी गहरी होती हैं.

इस पूरी घटना ने साबित कर दिया है कि भले ही कुछ लोग सरकारी कुर्सी को अपनी कमाई का शॉर्टकट या एटीएम समझ लेते हैं, लेकिन एक सही शिकायत और सही समय पर उठाया गया कदम पूरी कहानी बदल सकता है. फिलहाल इटावा में यह चर्चा जोरों पर है कि पीड़ित के डायग्नोस्टिक सेंटर का रजिस्ट्रेशन तो बाद में हुआ, लेकिन घूसखोर साहब का नाम विजिलेंस के रजिस्टर में पहले दर्ज हो गया.