Ghaziabad News: सन्नाटा इतना गहरा कि खुद की सांसें सुनाई दें. लेकिन गाजियाबाद के इस घर में तो मानों सन्नाटा ही चीख रहा है और वो भी खौफनाक चीख. लोनी के भारत सिटी की उस 9वीं मंजिल पर बने फ्लैट का कमरा जहां कल तक तीन मासूम जिंदगियां चहकती थीं आज वहां सिर्फ यादें और पुलिस की तफ्तीश के निशान बचे हैं. फ्लैट की 9वीं मंजिल से कूद कर जान देने वाली 3 सगी बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) की ये दुखद कहानी हर कोई जानना चाह रहा है.
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गाजियाबाद उस रात फ्लैट में क्या हुआ और इन 3 बच्चियों ने ऐसा कदम क्यों उठाया इसे समझने के लिए यूपी Tak की हमारी टीम उस फ्लैट में पहुंची जहां ये कांड हुआ.
वो कमरा जहां मौत ने दी दस्तक
जब हमारी टीम उस कमरे में दाखिल हुई तो मंजर देख कलेजा मुंह को आ गया. कमरे के बाहर का दरवाजा टूटा हुआ था, जिसे पुलिस ने अंदर घुसने के लिए तोड़ा था. अंदर घुसते ही एक छोटा सा मंदिर दिखता है, जहां शायद इन बच्चियों ने कभी हाथ जोड़कर दुआएं मांगी होंगी. लेकिन उस रात दुआएं नहीं बल्कि एक 'खूनी गेम' का साया इस घर पर मंडरा रहा था.
पिता की सुरक्षा की दीवार को पार कर गई मौत
कमरे की बालकनी को देखकर पिता की ममता और उनकी फिक्र साफ नजर आती है. 9वीं मंजिल पर घर होने के कारण पिता चेतन कुमार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. बालकनी की रेलिंग करीब 4 फीट ऊंची थी, उस पर दोहरा प्रोटेक्शन, जाली अलग और शीशा अलग. पिता ने यह सब इसलिए किया था ताकि उनकी बच्चियों को गलती से भी खरोंच न आए. लेकिन उन्हें क्या पता था कि खतरा बाहर से नहीं, बल्कि उस मोबाइल स्क्रीन के अंदर से आ रहा था.
वो स्टूल और आखिरी छलांग
बालकनी में वो प्लास्टिक का स्टूल रखा हुआ है.. रेलिंग इतनी ऊंची थी कि ये छोटी बच्चियां वहां तक पहुंच नहीं सकती थीं. उन तीनों ने बारी-बारी से या शायद एक साथ उस स्टूल का सहारा लिया, उस पर चढ़ीं और 9वीं मंजिल से सीधे मौत की आगोश में कूद गईं. रात के 2:15 बजे जब पूरी दुनिया सो रही थी, इन तीन बच्चियों ने एक साथ दम तोड़ दिया.
'कोरियन गेम' का वो 50वां टास्क
शुरुआती जांच और पिता के बयानों से जो सच सामने आ रहा है, वो रूह कंपा देने वाला है. बताया जा रहा है कि तीनों बहनें एक 'कोरियन लव गेम' की आदी हो चुकी थीं. यह एक टास्क-आधारित गेम था. बच्चियों ने जो किया शायद वो इस गेम का 50वां और आखिरी टास्क था. बताया जा रहा है कि मंझली बहन इस गेम की 'हेड' थी और वही अपनी बहनों को गाइड कर रही थी.
मां को प्यार कर दी थी आखिरी विदाई
जानकारी के मुताबिक बच्चियों ने जब ये प्लान बनाया तो रात में सबसे छोटी बच्ची पाखी पहले अपनी मां के पास गई थी, उन्हें प्यार किया और 'बाय' बोलकर आई. मां को लगा शायद बच्ची सोने जा रही है, किसे पता था कि वो हमेशा के लिए विदा मांग रही है. पुलिस का कहना है कि तीनों बहनें कोविड काल से ही ऑनलाइन गेमिंग की लत का शिकार हो गई थीं. वे सब कुछ साथ करती थीं नहाना, खाना, स्कूल जाना और सोना. उनकी यह एकजुटता ही उनकी दुश्मन बन गई. गेम के चक्कर में उन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं की.
एसीपी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि माता-पिता अक्सर उन्हें गेम खेलने से टोकते थे, लेकिन लत इतनी गहरी थी कि बच्चियों ने चोरी-छिपे खेलना जारी रखा. आज वो घर वीरान है, बालकनी सूनी है और वो दोहरा शीशा भी उन मासूमों को नहीं बचा सका. यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हर उस माता-पिता के लिए चेतावनी है जिनके बच्चे मोबाइल की आभासी दुनिया में खोते जा रहे हैं.
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