संभल में रानी सुरेंद्र बाला की प्राचीन बावड़ी में खुदाई के दौरान ये दिखा, देखने उमड़ी लोगों की भीड़

अनूप कुमार

• 04:18 PM • 25 Dec 2024

UP News: संभल के चंदौसी में खुदाई के दौरान मिली रानी सुरेंद्र बाला की बावड़ी काफी चर्चाओं में बनी हुई है. आज ASI टीम ने भी बावड़ी की जांच की. पिछले 5 दिनों से लगातार बावड़ी की खुदाई की जा रही है. जैसे-जैसे जमीन खोदी जा रही है, वैसे-वैसे विशालकाय प्राचीन इमारत दिखाई देने लगी है. 

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UP News: संभल के चंदौसी में खुदाई के दौरान मिली रानी सुरेंद्र बाला की बावड़ी काफी चर्चाओं में बनी हुई है. आज ASI टीम ने भी बावड़ी की जांच की. पिछले 5 दिनों से लगातार बावड़ी की खुदाई की जा रही है. जैसे-जैसे जमीन खोदी जा रही है, वैसे-वैसे विशालकाय प्राचीन इमारत दिखाई देने लगी है. 

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इसी बीच 5 दिन की खुदाई के बाद आखिरकार रानी की बावड़ी का पहला तल मिल गया है. खुदाई के दौरान बावड़ी की पहली मंजिल का तल दिखाई देने लगा है. इस पहले तल को खोजने के लिए ही लगातार बावड़ी में खुदाई की जा रही थी. बता दें कि 12 फीट गहरी खुदाई के बाद बावड़ी की पहली मंजिल का फर्श दिखाई दिया है.

अब बावड़ी की दीवारों पर हुई प्राचीन नक्काशी भी दिखाई देने लगी है. मजदूर काफी ध्यान से बावड़ी की खुदाई कर रहे हैं, जिससे की इस प्राचीन धरोहर को नुकसान नहीं पहुंचे. फिलहाल मौके पर लोगों की भारी भीड़ भी जमा होनी शुरू हो गई है. हर कोई बावड़ी को देखने और इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक है.

सीढ़ियां भी आई नजर

बता दें कि पहली मंजिल का फर्श मिलने के दौरान बावड़ी में सीढ़ी भी दिखी है. माना जा रहा है कि ये सीढ़ियां नीचे की तरफ यानी पहली से दूसरी मंजिल की ओर ले जाती हैं. माना जा रहा है कि ये बावड़ी 2 से 3 मंजिला गहरी हो सकती है. फिलहाल अब दूसरी मंजिल का रास्ता तलाश कर उसके अंदर जाने का रास्ता भी खोजा जाएगा और फिर खुदाई की जाएगी. आपको ये भी बता दें कि बावड़ी की पहली मंजिल पर 8 कमरे दिखाई दिए हैं. माना जा रहा है कि दूसरी मंजिल की खुदाई में रानी के कमरे और बाबड़ी में स्थित कुआं भी मिल सकता है.

मिली जानकारी के मुताबिक, जब एक बार पहली मंजिल से मिट्टी हटा दी जाएगी, फिर ही सामने आएगा कि ये बावड़ी कितनी मंजिला गहरी है. लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने बुजुर्गों से सुना था कि यहां एक बड़ा कुआं भी हुआ करता था. फिलहाल बावड़ी की खुदाई जारी है और इसे देखने के लिए भारी संख्या में भीड़ जमा है. 

सहसपुर की रानी सुरेंद्र बाला की है ये बावड़ी

बता दें कि सहसपुर की रानी सुरेंद्र बाला की ये बावड़ी थी. रानी के परिवार का दावा है कि रानी जब यहां आती थीं, तब वह इसी बावड़ी में ठहरती थीं. यहां रियासत के सैनिक भी ठहरते थे. ये बावड़ी संभल के चंदौसी में मिली है. दावा है कि यहां पहले हिंदू आबादी रहती थी. मगर 1857 के बाद इलाका मुस्लिम बाहुल्य होता गया तो हिंदू आबादी यहां से चली गई. फिर ये जमीन बिक गई और रानी की बावड़ी को मिट्टी से भर दिया गया.