जिस घर में कल तक बच्चों की खिलखिलाहट गूंजती थी आज वहां सिर्फ और सिर्फ सिसकियां और सन्नाटा है.उत्तर प्रदेश के भदोही से एक ऐसी कलेजा कंपा देने वाली वारदात सामने आई है जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. दो महीने पहले मां अपने पांच मासूम बच्चों और पति को छोड़कर प्रेमी संग फरार हो गई. पत्नी के जाने के गम और बच्चों की तन्हाई से टूट चुके लाचार पिता ने आखिरकार मौत को गले लगा लिया. अस्पताल में सांसें टूटने से ठीक पहले उस बेबस पिता के ये शब्द हर किसी के दिल में चुभ गए 'सर, मेरी बीवी दूसरे के साथ भाग गई. मैं बुलाते-बुलाते थक गया...'
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क्या है पूरा मामला
भदोही जिले के सुरियावा थाना क्षेत्र स्थित कुसौड़ा गांव के रहने वाले लल्लू गौतम मजदूरी करके अपने परिवार की आजीविका चलाते थे. घर की माली हालत भले ही तंग थी. लेकिन पांच बच्चों और पत्नी के साथ उनका हंसता-खेलता संसार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी.
प्रेमी संग फरार हुई पत्नी और इधर टूट गया परिवार
करीब दो महीने पहले लल्लू की पत्नी अपने पांच छोटे-छोटे बच्चों और पति को छोड़कर अपने प्रेमी के साथ चली गई. पत्नी के जाने के बाद लल्लू पूरी तरह से टूट गए. वे लगातार फोन पर पत्नी से लौटने की गुहार लगाते रहे. मासूम बच्चों की कसमें देते रहे. लेकिन पत्थरदिल हो चुकी पत्नी वापस नहीं लौटी.
अंदर ही अंदर घुटता रहा लाचार पिता
अपनों के दूर जाने के बाद लल्लू का मन उदास और गुमसुम रहने लगा. दिन-रात मजदूरी करके वे बच्चों का पेट तो भर रहे थे. लेकिन हर पल उन्हें बच्चों के संवरते-बिगड़ते भविष्य की चिंता सता रही थी. आखिरकार पत्नी के गम और और डिप्रेशन में बुधवार को उन्होंने खौफनाक कदम उठा लिया.
तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तुरंत सुरियावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहां से गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. हालांकि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. मौत से ठीक पहले उन्होंने पुलिस और डॉक्टरों के सामने अपना वही दर्द बयां किया कि वे पत्नी को वापस बुलाते-बुलाते थक चुके थे.
मासूमों के सिर से छिना आसरा
इस पूरे दर्दनाक वाक्ये में सबसे बड़ा और संवेदनशील पहलू उन पांच मासूम बच्चों का है जो अब इस दुनिया में पूरी तरह से अनाथ हो चुके हैं. कुछ महीने पहले मां का आंचल छूटा था और अब पिता का साया भी हमेशा के लिए उठ गया. पुलिस मामले की वैधानिक जांच कर रही है.लेकिन गांव के हर शख्स की आंखें नम हैं. आज उन बेबस चेहरों पर सिर्फ एक ही यक्ष प्रश्न है कि इस बेरहम दुनिया में अब उनका सहारा कौन बनेगा और उनका पालन-पोषण कैसे होगा?
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