गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसी हाई-फाई टेक्नोलॉजी खोज निकाली है जिसे जानकर अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों का भी दिमाग घूम जाएगा. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में गाजियाबाद पुलिस एक ऐसा मशीन लेकर घूम रही है जिससे यह पता लगा सकते हैं कि कोई शख्स बांग्लादेशी या रोहिंग्या तो नहीं है.वायरल वीडियो में कौशांबी थाने के एसएचओ अजय शर्मा एक व्यक्ति से पूछताछ करते नजर आ रहे हैं. एसएचओ साहब चेकिंग के दौरान एक व्यक्ति की पीठ पर छोटी सी मशीन लगाते हैं. जब वह शख्स खुद को बिहार के अररिया जिले का बताता है तो एसएचओ साहब तपाक से कहते हैं 'झूठ बोल रहे हो मशीन तो बांग्लादेश बता रही है. जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, लोगों ने यूपी पुलिस के इन 'होनहार' पुलिसकर्मियों को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया. फिलहाल इस मामले में एसएचओ अजय शर्मा को वार्निंग दी गई है.
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वायरल वीडियो के बाद फंस गए एसएचओ अजय शर्मा
मामला बढ़ता देख सहायक पुलिस आयुक्त इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि 'सोशल मीडिया के माध्यम से एक वायरल वीडियो संज्ञान में आया है.इस वीडियो की जांच के क्रम में यह पाया गया कि वायरल वीडियो थाना क्षेत्र कौशांबी में स्थानीय पुलिस टीम के द्वारा किए जा रहे एरिया कांबिनेशन का है.उन्होंने बताया कि एरिया कांबिनेशन के समय अस्थाई बस्ती और झुग्गी में रहने वाले निवासियों से पूछताछ और सत्यापन की प्रक्रिया की जा रही थी.इस दौरान थाना प्रभारी कौशांबी द्वारा वहां रह रहे निवासियों से वार्ता की जा रही है. फिलहाल इस मामले में थाना प्रभारी कौशांबी को सख्त चेतावनी दी गई है कि ऐसी व्यवहार की भविष्य में पुनरावृत्ति ना हो सभी तथ्यों की जांच कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है.
वायरल वीडियो में दिख रही रोशिनी खातून ने बता दी सच्चाई
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में नजर आ रही लड़की का नाम रोशिनी खातून है. जब यूपी Tak ने रोशिनी ने पुलिस के इस रवैये को लेकर सवाल किया तो उसने कहा कि 'पुलिस ने मजाकिया अंदाज में झूठ बोलने वाली बात कही थी. इस दौरान रोशिनी ने पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी का व्यवहार अच्छा था. रोशिनी ने बताया कि पुलिस ने आईडी दिखाने की बात करते हुए कहा कि झूठ बोलोगे तो मशीन से पकड़ लेंगे. लेकिन ऐसा कुछ नही था.वो लोग कागज देखकर चले गए.'
सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही गाजियाबाद पुलिस
फिलहाल गाजियाबाद पुलिस के इस वायरल वीडियो पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं. यूजर्स कमेंट कर रहे हैं कि गाजियाबाद पुलिस ने ऐसी तकनीक ईजाद कर ली है कि अब पासपोर्ट और आधार कार्ड की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. साथ ही लोग ये भी सवाल उठा रहे हैं कि 'क्या किसी की नागरिकता तय करने का पैमाना कोई ऐसी कथित मशीन हो सकती है? बिना किसी पुख्ता दस्तावेज या मेडिकल साक्ष्य के महज एक यंत्र के आधार पर किसी को बांग्लादेशी करार देना कितना जायज है?
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