Meerut Fire Department: लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश में फायर सेफ्टी को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है. इसी क्रम में मेरठ का फायर विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है और शहर के सभी कोचिंग संस्थानों में बड़े स्तर पर जांच अभियान शुरू कर दिया गया है. इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कोचिंग सेंटर में ऐसी लापरवाही न हो जो भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बने.
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तीन टीमों के साथ मैदान में उतरा फायर विभाग
फायर विभाग ने इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए तीन अलग-अलग टीमें गठित की हैं, जिनमें परतापुर, घंटाघर और पुलिस लाइन फायर स्टेशन की टीमें शामिल हैं. इन टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है और ये लगातार कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच कर रही हैं.
फायर सेफ्टी और एग्जिट सिस्टम की गहन जांच
निरीक्षण के दौरान सबसे पहले फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थिति की जांच की जा रही है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि फायर एक्सटिंग्विशर सही स्थिति में हैं या नहीं, उनका नियमित मेंटेनेंस हुआ है या नहीं और आपात स्थिति में उनका तुरंत उपयोग किया जा सकता है या नहीं. इसके साथ ही एंट्री और एग्जिट मार्गों की भी बारीकी से जांच की जा रही है, क्योंकि कई जगह गैलरी में सामान रखकर रास्ते अवरुद्ध कर दिए जाते हैं, जिससे आपात स्थिति में लोगों के बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है.
बड़े कोचिंग संस्थानों की भी हुई जांच
इस अभियान के दौरान शहर के कुछ बड़े और नामचीन कोचिंग संस्थानों की भी जांच की गई, जिनमें फिजिक्स वाला और आकाश जैसे संस्थान शामिल हैं. जांच के दौरान इन संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं और किसी बड़ी कमी की जानकारी सामने नहीं आई. हालांकि फायर विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी संस्थानों के लिए नियम समान रहेंगे और नियमित निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा.
बेसमेंट में कोचिंग पर पूर्ण प्रतिबंध
मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी स्थिति में बेसमेंट में कोचिंग सेंटर या क्लासेस का संचालन नहीं किया जाएगा. उन्होंने बताया कि बेसमेंट में आग लगने की स्थिति में धुआं तेजी से फैलता है और बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है, जिससे जानमाल का खतरा बढ़ जाता है.
बिजली सुरक्षा और वायरिंग पर विशेष ध्यान
फायर विभाग केवल अग्निशमन उपकरणों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि भवनों की विद्युत सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दे रहा है. इसमें वायरिंग की स्थिति, बिजली लोड और शॉर्ट सर्किट के जोखिम की जांच की जा रही है, क्योंकि अधिकांश आग की घटनाएं बिजली से जुड़ी लापरवाही या शॉर्ट सर्किट के कारण होती हैं.
50 से अधिक कोचिंग सेंटर जांच के दायरे में
अधिकारियों के अनुसार मेरठ में 50 से अधिक बड़े कोचिंग संस्थान हो सकते हैं, हालांकि अभी सभी की आधिकारिक सूची उपलब्ध नहीं है. सूची मिलते ही अभियान का दायरा और बढ़ाया जाएगा और सभी संस्थानों का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा.
अभियान जारी रहेगा, छात्रों की सुरक्षा प्राथमिकता
फायर विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक जिले के सभी प्रमुख कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह जांच नहीं ली जाती. इसका उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर छात्र सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर सके और किसी भी संभावित हादसे को पहले ही रोका जा सके.
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