KDA Action: लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश में प्रशासन अब उन इमारतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं. इसी क्रम में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रिहायशी क्षेत्र में संचालित एक कोचिंग सेंटर को सील कर दिया. जांच में सामने आया कि जिस चार मंजिला इमारत में कोचिंग संचालित की जा रही थी, वह मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत थी, लेकिन वहां लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं.
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रिहायशी भवन में धड़ल्ले से चल रही थी कमर्शियल एक्टिविटी
प्रशासनिक जांच में पाया गया कि चार मंजिला भवन का इस्तेमाल केवल आवासीय उद्देश्य के लिए किया जा सकता था, लेकिन इसके बावजूद वहां बड़े स्तर पर कोचिंग सेंटर संचालित किया जा रहा था. अधिकारियों के अनुसार, यह न केवल भवन उपयोग नियमों का उल्लंघन था बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता था.
कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षा बल मौजूद रहे. सबसे पहले कोचिंग में पढ़ रहे विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिसके बाद भवन का निरीक्षण शुरू किया गया.
फायर सेफ्टी के नियमों की मिली गंभीर अनदेखी
निरीक्षण में सबसे बड़ी कमी फायर सेफ्टी से जुड़ी पाई गई. अधिकारियों के मुताबिक इमारत में आवश्यक अग्निशमन उपकरण मौजूद नहीं थे. न तो पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर मिले और न ही आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी के पर्याप्त इंतजाम थे.
अधिकारियों का कहना है कि यदि ऐसी इमारत में कोई हादसा हो जाता, तो लोगों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो सकता था. लखनऊ अग्निकांड जैसी त्रासदी की आशंका को देखते हुए तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया गया.
बिना अनुमति संचालित हो रहा था बेसमेंट
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि भवन में बेसमेंट का निर्माण और उपयोग भी नियमों के अनुरूप नहीं था. प्रशासन के अनुसार, बेसमेंट संचालन की अनुमति भवन स्वामी के पास नहीं थी. इसके बावजूद उसका उपयोग किया जा रहा था.
कानपुर विकास प्राधिकरण ने भवन का नक्शा और स्वीकृत दस्तावेज भी तलब किए हैं ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया था या नहीं.
एंट्री-एग्जिट व्यवस्था में भी मिली बड़ी खामियां
कानपुर विकास प्राधिकरण के सचिव अभय पांडे ने बताया कि भवन में कई गंभीर तकनीकी और सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गई हैं. उन्होंने कहा कि बिल्डिंग सेटबैक नियमों का उल्लंघन करते हुए निर्माण किया गया है. इसके अलावा भवन में आपातकालीन स्थिति के लिए आवश्यक दो अलग-अलग एंट्री और एग्जिट मार्ग भी उपलब्ध नहीं थे.
उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में छात्र वहां पढ़ाई करते हुए मिले थे, इसलिए किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए कोचिंग सेंटर का संचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है.
फायर विभाग करेगा सेफ्टी ऑडिट
प्रशासन ने फायर विभाग को भी जांच के लिए बुलाया है. फायर सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. जब तक भवन सभी आवश्यक मानकों और विभागीय मंजूरियों को पूरा नहीं कर लेता, तब तक वहां किसी भी प्रकार की शैक्षणिक या व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं की जा सकेगी.
पूरे इलाके में चल रही थीं ऐसी कई गतिविधियां
स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि जिस गली में यह इमारत स्थित है, वह पूरी तरह आवासीय क्षेत्र है. इसके बावजूद कई भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं. प्रशासन अब ऐसे अन्य भवनों की भी जांच कर रहा है ताकि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके.
कार्रवाई पर उठे सवाल
हालांकि इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है. स्थानीय लोगों और आम नागरिकों का कहना है कि यदि भवन में इतनी गंभीर खामियां पहले से मौजूद थीं, तो प्रशासन ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की. लोगों का सवाल है कि लखनऊ जैसे बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय ऐसे मामलों में पहले ही सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई.
फिलहाल कानपुर विकास प्राधिकरण की यह कार्रवाई प्रदेशभर में चल रहे सुरक्षा ऑडिट अभियान का हिस्सा मानी जा रही है. प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में नियमों का उल्लंघन करने वाली अन्य इमारतों के खिलाफ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
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