लखनऊ अग्निकांड में चली गई निलेश की जान...अब सामने आई उनकी इमोशनल कर देने वाली कहानी!

Lucknow Fire Accident: लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने 27 वर्षीय नीलेश समेत 15 लोगों की जान ले ली और कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया. नीलेश का कमरा, जहां वह गेमिंग और एनिमेशन सीखते थे और अपने सपनों को आकार देते थे, अब खामोश हो चुका है.

यूपी तक

• 12:36 PM • 23 Jun 2026

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Lucknow Fire Accident: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने सिर्फ 15 जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि कई परिवारों के सपनों और खुशियों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया. इस हादसे में 27 वर्षीय नीलेश कुमार की दर्दनाक मौत ने हर किसी को झकझोर दिया है. उनका कमरा, जो कभी सपनों और रचनात्मकता का केंद्र था, आज एक सन्नाटे और दर्द की कहानी बयां कर रहा है.

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नीलेश का कमरा: जहां सपने पलते थे

नीलेश का कमरा कभी रचनात्मकता और उम्मीदों से भरा रहता था. वह घंटों बैठकर गेमिंग सॉफ्टवेयर और एनिमेशन सीखते थे. कमरे की दीवारों पर लगी पेंटिंग्स और स्केच बुक उनकी कला और जुनून की गवाही देती थीं. खासकर अपने माता-पिता की बनाई पेंटिंग, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो जाता था, नीलेश के गहरे प्रेम को दर्शाती थी.

लेकिन आज वही कमरा पूरी तरह शांत है. वहां रखी हर चीज ज्यों की त्यों मौजूद है, लेकिन उसे देखने वाला अब कोई नहीं है. परिवार के लोगों के अनुसार ऐसा लगता है जैसे समय वहीं थम गया हो.

भाई अभिषेक का दर्द और टूटी यादें

नीलेश के बड़े भाई अभिषेक जब उस कमरे में पहुंचे तो खुद को संभाल नहीं पाए. भावुक होकर उन्होंने बताया कि दोनों भाई साथ में पढ़ते, खेलते और देर रात तक बातें किया करते थे. छुट्टी के दिन भी पूरा समय साथ ही बिताते थे.

अभिषेक के शब्दों में दर्द साफ झलकता है, जब उन्होंने कहा कि अब वह अपने भाई के बिना उस कमरे में टिक नहीं पा रहे हैं. यह वही जगह थी जहां दोनों ने अपने बचपन और युवावस्था का बड़ा हिस्सा साथ बिताया था.

परिवार का बिखरता संसार

नीलेश के पिता शत्रुघ्न लाल का दर्द शब्दों से परे है. वे बार-बार यही कहते हैं कि उनके बेटे की मौत के लिए लापरवाही जिम्मेदार है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं मां अपने बेटे की याद में लगातार रो रही हैं और उसे देखे बिना रह नहीं पा रही हैं. परिवार के अनुसार नीलेश रोज की तरह घर से निकले थे, माता-पिता के पैर छूकर, किसी को अंदेशा नहीं था कि यह उनकी आखिरी विदाई होगी.

सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डिंग में कोई उचित एग्जिट व्यवस्था नहीं थी, जिससे लोग बाहर नहीं निकल सके. अगर वैकल्पिक रास्ता होता तो कई जानें बच सकती थीं. लोगों का आरोप है कि भवन की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, जिससे यह हादसा इतना बड़ा रूप ले सका.

रेस्क्यू और प्रशासनिक कार्रवाई

हादसे के बाद प्रशासन और दमकल विभाग ने राहत कार्य शुरू किया, लेकिन कई बाधाओं के कारण ऑपरेशन में कठिनाई आई. सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी.