लखनऊ अग्निकांड के बीच बिल्डिंग मालिक के खुले कई राज... पेपर लीक से लेकर जमीनी विवाद का है इतिहास!

Lucknow Fire Incident: लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. अब आग लगी बिल्डिंग के मालिक वीरेंद्र शुक्ला के भाई और को-ओनर सुरेंद्र शुक्ला का नाम 2015 के चर्चित CPMT पेपर लीक से जुड़े हैं.

यूपी तक

• 01:31 PM • 23 Jun 2026

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Lucknow Fire Incident: लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने सबको झकझोरकर रख दिया है. इस भयानक आग में 15 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. आग इतनी भयावह थी कि लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग लगाई थी और बिजली के तारों को पकड़ कर नीचे उतरे थे. इस घटना में नीचे स्थित पेट स्टोर के कई जानवर भी घायल हुए थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद घटनास्थल और अस्पताल का दौरा किया था. अब इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है. इसी बीच जिस बिल्डिंग में आग लगी थी, उसके मालिक के भाई को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है.

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मालिक के भाई का विवादित इतिहास

आग लगने वाली इस इमारत के मालिक वीरेंद्र शुक्ला बताए जा रहे हैं. अब उनके भाई और को-ओनर सुरेंद्र शुक्ला का पुराना और विवादित रिकॉर्ड सामने आया है. इन दोनों भाइयों पर प्रॉपर्टी कारोबार के जरिए करोड़ों रुपए कमाने के आरोप लगते रहे हैं. ऐसा बताया जाता है कि इन्होंने कथित तौर पर किसानों से सस्ती जमीन खरीद कर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग का कारोबार किया था.

2015 सीपीएमटी पेपर लीक से कनेक्शन

सुरेंद्र शुक्ला का नाम साल 2015 के सीपीएमटी (कंबाइंड प्रीमेडिकल टेस्ट) पेपर लीक मामले में सामने आया था. उन पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने अपनी बेटी को परीक्षा में पास कराने और केंद्र पर विशेष सुविधा दिलाने के लिए पेपर लीक की साजिश रची थी. सुरेंद्र शुक्ला लखनऊ के नामचीन निजी संस्थान रामेश्वरम इंस्टिट्यूट के चेयरमैन हैं. इस हाई प्रोफाइल मामले में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई थी.

व्हाट्सएप से भेजा गया था प्रश्न पत्र

25 मई 2015 को पूरे उत्तर प्रदेश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई थी. उस समय आरोप लगा था कि परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले सुबह 9:30 से 9:45 के बीच परीक्षा केंद्र के भीतर से प्रश्न पत्र की फोटो खींचकर मुख्य हैंडलर को व्हाट्सएप पर ट्रांसफर की गई थी. यूपी एसटीएफ ने उस दिन लखनऊ के हजरतगंज में छापा मारकर 12 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था, जिनके पास से पेपर और आंसर की बरामद हुई थी.

हालांकि, एसटीएफ की जांच में पर्याप्त सबूत न मिल पाने के कारण सुरेंद्र शुक्ला को इस मामले में राहत मिल गई थी. लेकिन अब अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद वीरेंद्र शुक्ला की बिल्डिंग पर सवाल उठे हैं, तो उनके भाई सुरेंद्र शुक्ला का यह पुराना इतिहास एक बार फिर से काफी ज्यादा चर्चा में आ गया है.