Lucknow Fire Incident: राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक कोचिंग सेंटर में लगी भयानक आग ने 15 लोगों की जिंदगी छीन ली है. इस दर्दनाक अग्निकांड ने न सिर्फ एक इमारत को खाक किया, बल्कि कई परिवारों के सपने और उम्मीदें भी जलाकर राख कर दिया. इन्हीं में से एक परिवार अब्दुल रहमान का है, जो इस हादसे का शिकार हो गया. रहमान अपने दिव्यांग पिता और मजबूर मां का इकलौता सहारा था, जिस पर बहन की भी जिम्मेदारी थी. हादसे के बाद रहमान का परिवार अब इंसाफ और मुआवजे की गुहार लगा रहा है, वहीं इस घटना ने प्रशासन और सिस्टम की घोर लापरवाही पर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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परिवार का इकलौता सहारा था रहमान
लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले अब्दुल रहमान के कजिन (चचेरे भाई) ने बताया कि घर में पिता विकलांग हैं और मां पहले टीचिंग करती थीं. रहमान ने एनिमेशन का कोर्स किया था और वह पिछले 3 महीने से उसी संस्थान में काम करने के साथ-साथ पढ़ाई भी कर रहा था. वह घर का इकलौता कमाने वाला था और पिछले कई सालों से परिवार का पालन-पोषण उसी के कंधों पर था. चचेरे भाई ने बताया कि उन्हें इस हादसे की जानकारी सोशल मीडिया से दोपहर 3 बजे लगी, लेकिन रात 8 बजे पता चला कि उनका भतीजा रहमान भी इस आग का शिकार हो गया है. अब परिवार के सामने यह बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि उनका जीवन कैसे कटेगा और जिम्मेदारियां कौन उठाएगा.
परिवार ने की 'बुलडोजर एक्शन' की मांग
रहमान के परिजनों ने इस अग्निकांड में भारी लापरवाही का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि लखनऊ में कई जगहों पर खुले ट्रांसफार्मर और नंगे तार हादसों का कारण बन रहे हैं. बिना फायर एनओसी (NOC) और कमर्शियल अनुमति के बिल्डिंगों का संचालन गलत है. परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में निष्पक्ष जांच, ज्यादा से ज्यादा मुआवजे और आरोपियों पर सख्त से सख्त सजा की मांग की है. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि जैसे सीएम योगी अन्य मामलों में सख्त एक्शन लेते हैं, वैसे ही इस मामले के आरोपियों पर भी 'बुलडोजर कार्रवाई' होनी चाहिए.
प्रशासन का एक्शन और एसआईटी का गठन
लखनऊ अग्निकांड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है. इस मामले में अब तक तीन लोगों—रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तशा कृष्ण जयसवाल—को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके खिलाफ बीएनएस (BNS) की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है. इसके साथ ही, लापरवाही बरतने के आरोप में बिजली विभाग और एलडीए (LDA) के चार अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया है. सीएम योगी के निर्देश पर पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव और लखनऊ जोन के एडीजी (ADG) प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है. एसआईटी 7 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. वहीं, मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया गया है.
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