लखनऊ अग्निकांड के बाद पीड़ितों से मिलने KGMU पहुंचे अखिलेश यादव...ये सब बोले!

Lucknow Fire Tragedy: लखनऊ के अलीगंज स्थित एनीमेशन सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद सियासत तेज हो गई है. घायलों से मिलने KGMU पहुंचे अखिलेश यादव ने मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की और सुरक्षा मानकों में लापरवाही पर सवाल उठाए.

यूपी तक

• 10:05 AM • 24 Jun 2026

follow google news

Lucknow Fire Tragedy: राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित एनीमेशन सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई युवक गंभीर रूप से घायल हैं और विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं. हादसे के बाद जहां पीड़ित परिवार अपने बच्चों और परिजनों को खोने के गम में टूट चुके हैं, वहीं अब इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है.

यह भी पढ़ें...

कहीं पिता अपने जवान बेटे की मौत पर बिलखते नजर आ रहे हैं तो कहीं मां अपने कलेजे के टुकड़े को खोने के दर्द में बेसुध है. इन भावुक दृश्यों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इस हादसे का जिम्मेदार कौन है और इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई.

KGMU पहुंचे अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मंगलवार को लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे और वहां भर्ती घायलों का हालचाल जाना. उन्होंने उन युवाओं और उनके परिवारों से मुलाकात की जो इस भीषण आग में झुलस गए या जान बचाने के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए.

इस दौरान अखिलेश यादव एक ऐसे युवक से भी मिले जिसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई है. बताया जा रहा है कि उसने आग से बचने के लिए बिल्डिंग से छलांग लगा दी थी. युवक की हालत देखकर अखिलेश यादव भावुक हो गए और बाहर आकर मीडिया से बातचीत में कई गंभीर सवाल उठाए.

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठाए सवाल

मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यदि भवन में सुरक्षा मानकों और अग्नि सुरक्षा नियमों का सही ढंग से पालन किया गया होता तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता. उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक के कारण कई परिवारों ने अपने बच्चों और कमाने वाले सदस्यों को खो दिया.

उन्होंने कहा कि किसी परिवार के लिए अपने बेटे या परिजन को खोने से बड़ा कोई दुख नहीं हो सकता. जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके दर्द की भरपाई संभव नहीं है.

मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग

सपा प्रमुख ने सरकार से मांग की कि मृतकों के परिवारों को कम से कम एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. उनका कहना था कि जिन युवाओं की मौत हुई, वे 21 से 25 वर्ष की उम्र के थे और अपने भविष्य को संवारने के लिए मेहनत कर रहे थे. यदि वे जीवित रहते तो अपने परिवारों का सहारा बनते और समाज में महत्वपूर्ण योगदान देते. उन्होंने कहा कि सरकार के पास संसाधनों की कमी नहीं है और ऐसी स्थिति में पीड़ित परिवारों की आर्थिक मदद बड़े स्तर पर की जानी चाहिए.

घायल युवक के परिवार की मदद की भी मांग

अखिलेश यादव ने उस युवक का भी जिक्र किया जिसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई है. उन्होंने बताया कि वह युवक अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य है और उसकी मां भी नहीं है. परिवार के सामने अब इलाज और रोजमर्रा के खर्चों का संकट खड़ा हो गया है.

उन्होंने मांग की कि जब तक घायल युवक पूरी तरह स्वस्थ होकर दोबारा नौकरी पर नहीं लौटता, तब तक सरकार उसकी आय की भरपाई करे और उसके इलाज का पूरा खर्च वहन करे.

अधिकारियों को बचाने का आरोप

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की जा रही है. उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मुख्यमंत्री को सीधे इस मामले का चेहरा बना रहे हैं.

उनका कहना था कि जिन अधिकारियों की लापरवाही से यह हादसा हुआ, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए और केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके मामले को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए.

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का पलटवार

अखिलेश यादव के बयान के बाद प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि 15 लोगों की जान लेने वाले इस दर्दनाक हादसे पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए.

बृजेश पाठक ने दावा किया कि जिस भवन में हादसा हुआ, उससे जुड़ी कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं और निर्माण संबंधी अनुमतियां पिछली सरकार के कार्यकाल में दी गई थीं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

बिना फायर NOC के चल रहा था कॉम्प्लेक्स

प्रारंभिक जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार जिस कॉम्प्लेक्स में आग लगी, वह आवश्यक फायर एनओसी के बिना संचालित हो रहा था. इसके अलावा भवन में लगे बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम को लेकर भी सवाल उठे हैं.

बताया जा रहा है कि आग लगने के दौरान बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम जाम हो गया, जिससे अंदर मौजूद लोगों को समय रहते बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका और स्थिति और भयावह हो गई.

सीएम योगी ने बनाई हाई लेवल SIT

हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में एक कार्यक्रम में मौजूद थे. घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने तत्काल मामले का संज्ञान लिया और घटनास्थल का दौरा किया.

इसके बाद मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन के निर्देश दिए. साथ ही संबंधित विभागों को जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने के आदेश भी दिए गए.

अब तक 6 FIR, 4 गिरफ्तार और 4 अधिकारी निलंबित

अग्निकांड मामले में अब तक पुलिस छह एफआईआर दर्ज कर चुकी है. जांच के दौरान बिल्डिंग मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है.

इसके अलावा संबंधित भवन के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई है. लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भवन स्वामियों को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है कि आखिर आवासीय भवन का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कैसे किया जा रहा था.

निलंबित अधिकारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

इस बीच अलीगंज अग्निकांड के बाद निलंबित किए गए इंदिरा नगर फायर सब-स्टेशन अधिकारी कमलेंद्र कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपनी बात रखी है. उन्होंने पत्र में कहा है कि छोटे कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई उचित नहीं है और पूरे मामले में व्यापक स्तर पर जांच की जानी चाहिए.

उनके इस पत्र के सामने आने के बाद मामले में कई नए सवाल भी खड़े हो गए हैं. फिलहाल एसआईटी जांच जारी है और पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इस दर्दनाक हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है.