Lucknow fire incident: राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की दुनिया को उजाड़ दिया है. इस भयानक आग में करीब 15 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है. इस हादसे में जान गंवाने वालों में कानपुर के दो पक्के दोस्त संयम विच और सूरज भान सिंह भी शामिल थे. ये दोनों एक ही एनिमेशन स्टूडियो में साथ काम करते थे. फिलहाल दोनों की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है.
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दादी की तेरहवीं पर आना था घर
कानपुर के गोविंद नगर निवासी 28 साल के संयम के घर में पहले से ही दुख का माहौल था. कुछ दिन पहले ही उनकी दादी का निधन हुआ था और मंगलवार को उनकी तेरहवीं की तैयारी चल रही थी. परिवार को उम्मीद थी कि संयम घर आएगा और उसके साथ बैठने से उन्हें थोड़ी हिम्मत मिलेगी. लेकिन दरवाजे पर बेटे की जगह उसकी मौत की मनहूस खबर पहुंची थी. संयम के पिता पहले ही गुजर चुके थे और वह मां, बड़े भाई और भाभी का सहारा था. जिस बेटे के सिर पर सेहरा सजने के सपने देखे जा रहे थे, अब उसके अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही थी.
मां को अब तक नहीं दी गई खबर
कानपुर के ही बर्रा निवासी 25 साल के सूरजभान सिंह के घर की कहानी भी बेहद दर्दनाक थी. उनके पिता इस दुनिया को पहले ही छोड़ चुके थे और परिवार में सिर्फ मां और छोटा भाई ही थे. सूरजभान नौकरी के सिलसिले में लखनऊ में रहते थे और हर हफ्ते घर आते-जाते रहते थे. वह बीते रविवार को ही घर से वापस लखनऊ गए थे. किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी. परिवार ने अभी तक सूरजभान की मां को उनके निधन की खबर नहीं दी है. परिवार को डर है कि कहीं यह अचानक मिला सदमा उन्हें तोड़ न दे. छोटा भाई खबर मिलते ही ऋषिकेश से भागकर घर वापस आ गया है.
सेंसर गेट्स ने बंद किए बाहर निकलने के रास्ते
संयम के परिजनों ने बताया कि जिस इमारत में ये दोनों दोस्त काम करते थे, वहां ऑटोमेटिक सेंसर गेट्स लगे हुए थे. आग लगने के दौरान शॉर्ट सर्किट के कारण वह सेंसर गेट काम करना बंद कर दिए थे. लोग बाहर निकलने की पूरी कोशिश करते रहे, लेकिन धुएं और दम घुटने के कारण सब कुछ खत्म हो गया. इस हादसे ने न सिर्फ दो परिवारों को बल्कि पूरे मोहल्ले को गहरे सदमे में डाल दिया है. लोग बताते हैं कि संयम और सूरज भान दोनों ही बेहद मिलनसार थे. किसी ने नहीं सोचा था कि इतने कम समय में उन दोनों की सिर्फ यादें ही बाकी रह जाएंगी.
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