सीएफओ पर गंभीर आरोप लगाने वाले निलंबित अधिकारी कमलेन्द्र सिंह ने कुछ ही घंटों में बदला अपना बयान, वीडियो बनाकर कह दी ये बड़ी बात

Lucknow Fire Incident: लखनऊ अग्निकांड मामले में निलंबित फायर अधिकारी कमलेंद्र कुमार सिंह के वायरल वीडियो और बाद में आए यू-टर्न ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. पहले उन्होंने सीएफओ पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में अपने बयान से पलटते हुए माफी मांग ली.

यूपी तक

• 10:32 AM • 24 Jun 2026

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Lucknow Fire Incident: लखनऊ के अलीगंज स्थित बहुचर्चित अग्निकांड मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है, जिसने जांच और प्रशासनिक कार्रवाई को और अधिक चर्चाओं में ला दिया है. हादसे के बाद निलंबित किए गए फायर विभाग के अधिकारी कमलेंद्र कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने अपने निलंबन पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों और सीएफओ पर गंभीर आरोप लगाए थे. लेकिन कुछ ही घंटों में उन्होंने अपने ही बयान से पलटते हुए नया वीडियो जारी किया और माफी मांग ली, जिससे पूरे मामले में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.

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वायरल वीडियो में लगाए थे गंभीर आरोप

प्रारंभिक वायरल वीडियो में कमलेंद्र कुमार सिंह ने आरोप लगाया था कि दमकल प्रक्रिया में देरी और समन्वय की कमी के लिए सीएफओ जिम्मेदार हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है. उन्होंने सीएफओ को पूरे मामले का मुख्य जिम्मेदार बताते हुए उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग तक कर दी थी.

कुछ ही घंटों में बदला बयान, मांगी माफी

हालांकि, बाद में जारी किए गए नए वीडियो में कमलेंद्र कुमार सिंह अपने पहले बयान से पूरी तरह पीछे हटते नजर आए. उन्होंने कहा कि उन्हें एक व्यक्ति द्वारा भ्रमित किया गया था और मानसिक तनाव के कारण उन्होंने यह वीडियो दिया था. उन्होंने अपने बयान पर खेद जताते हुए माफी भी मांगी और वरिष्ठ अधिकारियों पर भरोसा जताया. इस अचानक बदलाव ने पूरे मामले को और उलझा दिया है.

सीएफओ पर लगे लापरवाही के आरोप

वायरल बयान में यह भी कहा गया था कि लखनऊ अग्निकांड में दमकल प्रक्रिया में देरी और खराब समन्वय सीधे सीएफओ की लापरवाही को दर्शाता है. साथ ही यह दावा भी किया गया कि जिस भवन में आग लगी, उसका उपयोग नियमों के खिलाफ कमर्शियल गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, जिसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को होनी चाहिए थी.

आग के बाद सुरक्षा और भवन नियमों पर सवाल

घटना के बाद यह तथ्य भी सामने आए कि जिस इमारत में हादसा हुआ, वह मूल रूप से रिहायशी उपयोग के लिए स्वीकृत थी, लेकिन उसमें लंबे समय से कमर्शियल गतिविधियां चल रही थीं. इसके अलावा एंट्री-एग्जिट व्यवस्था, फायर सेफ्टी और इमरजेंसी प्रबंधन को लेकर भी गंभीर खामियां बताई जा रही हैं, जिसने हादसे को और भयावह बना दिया.

जांच, गिरफ्तारियां और प्रशासनिक कार्रवाई

लखनऊ अग्निकांड मामले में अब तक छह एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें बिल्डिंग मालिक, पेट शॉप संचालक, एनीमेशन सेंटर संचालक और एक आईटी कंपनी ऑपरेटर शामिल हैं. वहीं चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है. मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय SIT गठित की गई है, जो जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.