Meerut fire department: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मेरठ का फायर विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है. छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शहर भर के कोचिंग संस्थानों में बड़े स्तर पर जांच अभियान शुरू किया गया है. फायर विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कोचिंग सेंटर में ऐसी कोई लापरवाही ना हो, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.
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तीन टीमों ने शुरू की जांच
इस सघन जांच अभियान का नेतृत्व मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) सुरेंद्र सिंह कर रहे हैं. फायर विभाग ने शहर में चेकिंग के लिए तीन अलग-अलग टीमों को मैदान में उतारा है. परतापुर, घंटाघर और पुलिस लाइन फायर स्टेशन की टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. ये टीमें लगातार कोचिंग सेंटर्स का निरीक्षण कर रही हैं और वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं और आग बुझाने वाले उपकरणों की बारीकी से जांच कर रही हैं.
बेसमेंट में नहीं चलेंगी कोचिंग
सीएफओ सुरेंद्र सिंह ने जांच के दौरान सख्त निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने साफ कहा है कि किसी भी स्थिति में बेसमेंट के अंदर कोचिंग सेंटर या क्लासेस का संचालन नहीं होने दिया जाएगा. दरअसल, बेसमेंट में आग लगने की स्थिति में बाहर निकलना बेहद मुश्किल होता है और धुआं तेजी से फैलने के कारण जान का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसके साथ ही अधिकारियों ने हिदायत दी है कि आपात स्थिति के लिए एंट्री और एग्जिट के रास्ते पूरी तरह से खुले और अवरोध मुक्त होने चाहिए.
बड़े संस्थानों की भी हुई जांच
अभियान के दौरान शहर के कुछ बड़े और नामचीन कोचिंग सेंटर्स की भी जांच की गई थी. इनमें 'फिजिक्स वाला' और 'आकाश' इंस्टीट्यूट जैसे बड़े नाम शामिल थे. जांच के दौरान इन संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गई हैं. सीएफओ ने बताया था कि फिजिक्स वाला के पास फायर एनओसी भी मौजूद है और उपकरण सही हालत में थे. विभाग का कहना है कि सभी संस्थानों के लिए नियम एक समान हैं और आगे भी यह चेकिंग अभियान नियमित रूप से चलता रहेगा.
विद्युत व्यवस्था की हो रही जांच
फायर विभाग सिर्फ आग बुझाने वाले उपकरणों को ही नहीं देख रहा है, बल्कि बिल्डिंग्स के अंदर लगी विद्युत व्यवस्था, वायरिंग की स्थिति और बिजली लोड की भी जांच कर रहा है. अक्सर क्षमता से अधिक एसी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगने से शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है. अधिकारियों के मुताबिक, शहर में बड़े कोचिंग संस्थानों की संख्या 50 से ज्यादा हो सकती है. फिलहाल उच्च शिक्षा अधिकारियों से आधिकारिक लिस्ट मांगी गई है. लिस्ट मिलते ही जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा और जिले के सभी प्रमुख कोचिंग सेंटर्स की जांच पूरी होने तक यह अभियान जारी रहने वाला है.
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