Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें 200 किलो चांदी के दान को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं. विश्व सिंधी सेवा संगम के अध्यक्ष राजू मनवानी ने दावा किया है कि उनके समाज ने राम मंदिर निर्माण के लिए भारी मात्रा में चांदी दान की थी, लेकिन पांच साल बीत जाने के बावजूद उन्हें न तो उसकी रसीद मिली है और न ही पूरे दान का स्पष्ट हिसाब दिया गया है. इस मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है.
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200 किलो चांदी दान का दावा
राजू मनवानी के अनुसार, सिंधी समाज के लोगों ने मिलकर करीब 200 किलो चांदी राम मंदिर निर्माण के लिए दान की थी. उनका कहना है कि यह दान देश-विदेश में बसे लगभग 15 देशों के करीब 200 लोगों द्वारा मिलकर दिया गया था. किसी ने एक किलो, किसी ने दो किलो और किसी ने पांच या दस किलो तक चांदी योगदान के रूप में दी थी. उन्होंने बताया कि यह चांदी उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को अयोध्या में मंदिर परिसर के अंदर एक कार्यक्रम के दौरान सौंपी थी.
रसीद और आमंत्रण न मिलने का आरोप
दानकर्ता पक्ष का आरोप है कि इतने बड़े योगदान के बावजूद उन्हें आज तक कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि राम मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में भी उन्हें आमंत्रण नहीं मिला था.
राजू मनवानी ने कहा कि अब उन्हें चिंता हो रही है कि दिया गया दान सही जगह उपयोग हुआ या नहीं. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या चांदी को पिघलाकर किसी अन्य खाते या उपयोग में लिया गया, इसका स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए.
पीएम मोदी और सीएम योगी से जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर राजू मनवानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि अगर सरकार द्वारा गठित किसी समिति या एसआईटी के माध्यम से जांच होती है तो सच्चाई सामने आ सकती है. उन्होंने कहा कि भविष्य में दान देने वाले लोगों को इस तरह की स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए पारदर्शिता बेहद जरूरी है.
ट्रस्ट की भूमिका और प्रतिक्रिया का इंतजार
राजू मनवानी ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने यह चांदी सीधे चंपत राय को सौंपी थी और उन्हें केवल वही व्यक्ति पहचान में आते हैं. ट्रस्ट के अन्य सदस्यों या प्रक्रियाओं के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है. फिलहाल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
बढ़ती बहस और पारदर्शिता पर सवाल
इस दावे के सामने आने के बाद राम मंदिर में हुए दान और उसके लेखा-जोखा को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है. अब सभी की नजर ट्रस्ट की प्रतिक्रिया पर टिकी है कि वह इस आरोप पर क्या सफाई देता है और 200 किलो चांदी के दान का पूरा विवरण सामने आता है या नहीं.
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