LPG Price Hike in Mathura: मथुरा के नौहझील क्षेत्र में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के कारण ग्रामीण इलाकों में उज्ज्वला योजना के सिलेंडर अब कोनों में धूल फांक रहे हैं. मजबूरी में महिलाएं एक बार फिर पारंपरिक लकड़ी और उपलों के चूल्हे की ओर लौटने को विवश हैं. सुबह होते ही गांवों में घरों से निकलता धुंआ इस बात का गवाह है कि स्वच्छ ईंधन का सपना अब महंगाई की भेंट चढ़ चुका है.
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धुएं से महिलाओं की सेहत पर गंभीर खतरा
इस समय जब गैस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. गैस रिफिल कराना गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट से बाहर होता जा रहा है जिससे 'धुआं मुक्त' रसोई का दावा जमीनी स्तर पर दम तोड़ता नजर आ रहा है. पारंपरिक चूल्हे से निकलने वाला जहरीला धुआं सीधे तौर पर महिलाओं की आंखों और फेफड़ों पर प्रहार कर रहा है. घंटों धुएं के बीच खाना पकाने से महिलाओं में आंखों में जलन, पानी गिरना और समय से पहले मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं.
दमा और टीबी जैसी सांस की बीमारियों को भी दे रहा दावत
नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर सुरेश चंद्र का कहना है कि बंद कमरों या छोटी रसोइयों में चूल्हे का धुआं किसी जहरीली गैस से कम नहीं है जो न केवल आंखों की रोशनी छीन रहा है बल्कि दमा और टीबी जैसी सांस की बीमारियों को भी दावत दे रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि सिलेंडर के दाम एक हजार के पार होने, बुकिंग के बाद भी समय पर डिलीवरी न मिलने के कारण वे जंगल से लकड़ी बीनने और उपले पाथने को मजबूर हैं.
गैस की कालाबाजारी और कीमतों पर लगाम लगाने की मांग
क्षेत्र की महिला आरती, कुमकुम, राखी, विमलेश ने सरकार से मांग की है कि गैस की कालाबाजारी कीमतों पर लगाम लगाई जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति सुचारू की ज, ताकि उन्हें इस जानलेवा धुएं से निजात मिल सके. यदि स्थिति यही रही, तो आने वाले समय में ग्रामीण स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है.
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