Mathura News: मथुरा की वीर शहादत: एक दशक बाद भी परिजन न्याय की आस में. 2 जून 2016 की रात ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था. उस दिन मथुरा में हुए जवाहर बाग कांड में उत्तर प्रदेश पुलिस के कई जांबाज अधिकारी और कर्मी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए शहीद हो गए. 2 जून 2026 को इस दर्दनाक घटना को पूरे 10 साल पूरे हो जाएंगे, लेकिन शहीदों के परिजनों के दिलों में आज भी वही पीड़ा, वही सवाल और वही इंतजार कायम है.
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यह एक दशक सिर्फ समय का नहीं, बल्कि दर्द, निराशा और टूटती उम्मीदों का दशक रहा. शहीद मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी की भावनाएँ आज भी व्यवस्था पर प्रश्न उठाती हैं. उनका कहना है कि बिछोह का दर्द कभी कम नहीं हो सकता, लेकिन उससे भी बड़ा दुख यह है कि शहादत को वह सम्मान और न्याय नहीं मिल सका जिसकी उम्मीद थी.
घटना के बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और नई सरकार से परिजनों को उम्मीदें थीं. लेकिन समय के साथ यह उम्मीदें भी धूमिल होती चली गईं. आरोप है कि दोषियों को अब तक कठोर सजा नहीं मिल सकी और शहीदों की स्मृति में अपेक्षित स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई.
जवाहर बाग में शहीद मुकुल द्विवेदी की स्मृति को संजोने के लिए भी अब तक कोई बड़ा स्मारक या सरकारी पहल सामने नहीं आई, जिससे परिजनों और क्षेत्रीय लोगों में निराशा व्याप्त है. परिजन सवाल उठा रहे हैं कि क्या कर्तव्य पथ पर जान न्यौछावर करने वाले वीरों का यही परिणाम होना चाहिए?
अर्चना द्विवेदी की लिखी पंक्तियां आज भी हर किसी को भावुक कर देती हैं. उन्होंने अपने पति के कर्तव्य, समर्पण और बलिदान को शब्दों में पिरोया है. उनकी यह पीड़ा सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन सभी शहीद परिवारों की आवाज है, जो आज भी न्याय और सम्मान की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार से फिर उम्मीद जताई जा रही है कि शहीदों के सम्मान में ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सके.10 साल बाद भी न्याय और सम्मान का इंतजार, शहीद परिवारों में गहरी निराशा, स्मारक और सरकारी पहल का अभाव, सरकार से फिर जगी उम्मीद.
आज इस घटना की बरसी पर पूरा मथुरा उन वीर सपूतों को नमन कर रहा है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना कर्तव्य को सर्वोपरि रखा.मुकुल द्विवेदी के साथ शहीद हुए थाना प्रभारी संतोष कुमार के परिजन भी योगी सरकार से न्याय और सम्मान की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
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